दोहरे चेहरे – शुभ्रा बैनर्जी 

ममता जी नगर की गणमान्य नेता की पत्नी थीं।नेता जी के साथ पार्टी प्रचार में भी जातीं थीं। पूर्ण रूप से समाज के प्रति जागरूक थीं।पति कंस्ट्रक्शन वर्क में थे।आय अच्छी ही थी। मोहल्ले के लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा थीं वो।जब भी किसी बच्ची का रिजल्ट आया, उसे शाबासी देते हुए कहतीं”देख बिटिया, … Read more

*दोहरे चेहरे* – तोषिका

“आपका ये *दोहरे चेहरे* के बारे में मुझे सब पता है अब अच्छा बनने का नाटक मत कीजिए आप।” सीमा ने अपनी सास लता से बोला। “ये क्या बोल रही हो तुम बहु?” गुस्से में लता ने बोला। “अब झूठ बोलने से कुछ नहीं होगा, मुझे सब दिख भी रहा है और अच्छे से समझ … Read more

मुक़ाबला

सरिता ने काव्या का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा, “पागल लड़की! दुनिया का कोई भी डर, कोई भी ब्लैकमेलर एक माँ की ममता से बड़ा नहीं हो सकता। माना कि तूने लापरवाही की, लेकिन इस डर से तू अपने ही परिवार से कट जाएगी? जब भी ज़िंदगी में … Read more

एक थाली में खाने से प्यार बढ़ता है

काव्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने पास को देखा, फिर मुझे देखा, और फिर पास को देखा। “लेकिन… आपने तो कहा था कि आपके पास टाइम नहीं है?” उसकी आवाज़ अब बिल्कुल बदल चुकी थी। उसमें अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक मीठा सा आश्चर्य था। “मैंने इसलिए कहा था ताकि तुम्हें सरप्राइज … Read more

मेरे जीवनसाथी

कुणाल से रहा नहीं गया। वह भीड़ को चीरता हुआ अपनी माँ के पास पहुँचा और धीमे स्वर में बोला, “माँ, आरुषि को बहुत गर्मी लग रही है। वो भारी कपड़ों में है। रस्म को अंदर हॉल में शिफ्ट कर लेते हैं, वहाँ एसी चल रहा है।” माँ ने उसे झिड़कते हुए कहा, “पागल हो … Read more

मुझे माफ कर दो माँ

“रोहन… तुम्हारी माँ… हमें छोड़कर चली गई।” वाक्य इतना छोटा था, लेकिन रोहन के कानों में किसी बम के धमाके की तरह गूँजा। उसके हाथ से नाश्ते का निवाला छूटकर प्लेट में गिर गया। दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया। “क्या… क्या कह रहे हैं आप? ओ गॉड! कब… कैसे? परसों तक तो…” रोहन के मुँह … Read more

सच्चा प्यार

समीर और काव्या की शादी को आठ साल हो चुके थे। इन आठ सालों में उनके घर की दीवारें न जाने कितनी ही बार उनकी हँसी, उनकी नोक-झोंक और उनके एक खास ‘पेट डायलॉग’ की गवाह बन चुकी थीं। समीर स्वभाव से थोड़ा लापरवाह था। सुबह ऑफिस जाते वक्त गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ देना, … Read more

गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा – डॉ आभा माहेश्वरी

रमेश एक मेहनती किसान था। उसके पास थोड़ी-सी जमीन थी, लेकिन वह अपनी मेहनत और ईमानदारी से अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। गाँव में उसकी एक बात सबसे अधिक प्रसिद्ध थी—उसका तेज गुस्सा। छोटी-सी बात पर भी वह अपना आपा खो बैठता था। कई बार उसकी पत्नी सीता और बेटा मोहन उसे समझाते, “गुस्सा … Read more

शातिर – गीता वाधवानी

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं पता है ना तुम्हें नमन, रूप ने कहा।   नमन-” हां मैं भी करता हूं ”   रूप -” तो फिर मेरे मम्मी पापा से शादी की बात करो ना, मैं कुछ नहीं कह सकती अपने पापा से, तुम्हें पता है ना वह कितने गुस्से वाले हैं। ”   नमन -” नहीं … Read more

दोहरे चेहरे – खुशी

रंजिता जी आ गई इतनी बड़ी सेविका है।औरतों और बच्चों का वो भी लड़कियों का कितना ध्यान रखती हैं।इनके परिवार में कौन कौन है? एक बेटा राघव उसकी पत्नी शमा और दो पोते विराज और मिहिर प्यारा सा परिवार है।इनके पति कैलाश नाथ जी का कुछ अरसे पहले ही निधन हो गया बीमार रहते थे। … Read more

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