दो पीढ़ियों का रिश्ता
लंदन की सर्द और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कार ने बनारस की संकरी और जानी-पहचानी गलियों में प्रवेश किया, तो कबीर के चेहरे पर एक अजीब सी सुकून भरी मुस्कान तैर गई। कबीर और उसकी पत्नी मायरा शादी के तीन साल बाद पहली बार भारत आ रहे थे। मायरा वैसे तो भारतीय मूल … Read more
बाबूजी का आत्मसम्मान
लाल सुर्ख जोड़े में सजी, माथे पर भारी मांगटीका और हाथों में रची गहरी मेहंदी के बीच वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। पर उसकी आँखों में वो चमक नहीं थी जो एक दुल्हन की आँखों में होनी चाहिए। मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो कॉल चालू था। स्क्रीन के दूसरी तरफ समीर … Read more
नयी उड़ान, नयी पहचान
“दुनिया का काम है कहना, दादी,” आयुष ने मुस्कुराते हुए कहा। “सोचिए, जब कल को मेरी शादी होगी और मेरी पत्नी भी स्नेहा दीदी की तरह नौकरी करके थकी हारी घर आएगी, तो क्या मुझे उसे चाय बनाकर नहीं पिलानी चाहिए? क्या आप नहीं चाहेंगी कि आपके पोते की पत्नी को वो आराम और सम्मान … Read more
दो शरीर और एक आत्मा
निधि जब इस घर में बहू बनकर आई थी, तो उसे सबसे ज्यादा हैरानी अपने सास-ससुर का आपसी तालमेल देखकर हुई थी। उसके ससुर जी, यानी पंडित विद्याधर, अपने जमाने के प्रखर विद्वान और यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि, अनुशासन और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि घर के तीनों बच्चे आज … Read more
माँ का हृदय
सुमित्रा जी की आंखों में अब हल्के से आंसू तैरने लगे थे, लेकिन वो दुख के नहीं थे। उन्होंने कांता का हाथ पकड़कर कहा, “तू नहीं समझेगी कांता। अगर वो मांगता, तो मैं चारों अंगूठियां एक साथ उतार कर दे देती। लेकिन फिर वो दोबारा कभी नहीं आता। उसने चोरी की है, वो जानता है … Read more
सास का तजुर्बा
नंदिनी अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर लॉन में बिखरी सुबह की सुनहरी धूप को देख रही थी। उसके हाथों में रची गाढ़ी लाल मेहंदी अभी भी उसकी शादी की गवाही दे रही थी। महज़ तीन दिन पहले ही तो वह अपने पिता के घर की चौखट लांघकर इस नए घर में … Read more
गुरु दक्षिणा
मास्टर विद्यानाथ थोड़ा घबरा गए। उन्होंने अपनी कमज़ोर आँखों से डॉक्टर को पहचानने की कोशिश की। “कौन हो बेटा? उठो, तुम इतने बड़े आदमी हो, मेरे पैर क्यों छू रहे हो?” डॉ. समर ने जब अपना सिर उठाया तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, “मास्टर जी… आपने … Read more