बरगद की छाँव और महुआ की महक
“लल्ली, मुझे कभी-कभी डर लगता था कि कहीं ये नई पीढ़ी हमारे इन रिश्तों की अहमियत भूल न जाए। पर आज जब मैंने देखा कि तेरी बहू जानकी ने कितनी श्रद्धा से मेरे पैर छुए, हेमंत ने स्टेशन पर मुझे देखते ही कैसे गले लगा लिया… मेरा सारा डर काफूर हो गया। हमारे संस्कार मरे … Read more