रिश्तों की खूबसूरत डोर

उस रात कांता देवी बहुत देर तक सो नहीं पाईं। वे करवटें बदलती रहीं और पिछले एक साल का हर वो पल याद करती रहीं जब उन्होंने मीरा को बेवजह टोका था और मीरा ने बदले में सिर्फ एक शांत मुस्कान देकर बात टाल दी थी। उन्हें अहसास हुआ कि अगर मीरा चाहती तो हर … Read more

असली न्याय

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

माँ की पुरानी साड़ी – विकास श्रीवास्तव

गाँव के एक छोटे से घर में रामलाल, उनकी पत्नी सरला और उनका बेटा मोहित रहते थे। रामलाल एक साधारण किसान थे। दिन-रात मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर में पैसे कम थे, लेकिन प्यार और अपनापन बहुत था। सरला के पास एक पुरानी नीली साड़ी थी। वही साड़ी उन्होंने अपनी शादी में … Read more

रील मेकिंग – एम. पी. सिंह “मोहि “

आज के डिजिटल युग में अधिकांश युवाओं के लिए रील मेकिंग मनोरंजन का साधन बन गया है. मनोरंजन करते करते ज्ञान और कला मैं वृद्धि होनी स्वभाविक है. कुछ लोग अपनी इस कला को अपनी आय का ज़रिया बना लेते है.  छोटे छोटे विडिओ बनाकर अपने हुनर को दुनियाँ तक पहुंचा रहे है. इस काम … Read more

गुरु दक्षिणा

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

भाई दूज

राघव वहीं सोफे पर धम्म से बैठ गया। उसकी आँखें पथरा गई थीं। वह पलक झपकाना भूल गया था। नीती का वह बहाना इतना खोखला था कि कोई भी समझ सकता था कि वह बस राघव से मिलना नहीं चाहती थी। राहुकाल या मुहूर्त का तो बस नाम था; असली बात तो यह थी कि … Read more

रिश्तों की छांव  

“चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

खामोश रिश्तों की गूंज – अनुपमा

बाहर आसमान से बारिश की बूंदें लगातार गिर रही थीं, लेकिन मीरा के अंदर जो तूफान उठ रहा था, उसके सामने ये बारिश बहुत मामूली लग रही थी। सुबह से ही उसने कुछ नहीं खाया था। डाइनिंग टेबल पर रखी चाय की प्याली कब ठंडी हो गई, उसे इसका एहसास तक नहीं हुआ। वह बस … Read more

पक्की उम्र का प्यार – रमा शुक्ला 

 निहारिका के माता-पिता कमरे में आए। पिताजी के चेहरे पर एक ऐसी राहत और खुशी थी, जो निहारिका ने बहुत समय बाद देखी थी। उन्होंने निहारिका के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारे लिए एक बहुत ही होनहार लड़के का रिश्ता आया है। नाम सुमेध है। एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर … Read more

कर्ज रोशनी का – गोविंद गुप्ता

राधिका उनके चरणों में गिर पड़ी और रोने लगी। उसने अपना परिचय दिया और अपनी पहली तनख्वाह का लिफाफा उनके हाथों में रख दिया। “मांजी, मैं राधिका। आपने मुझे जो जीवनदान दिया था, आज मैं आपका वह कर्ज चुकाने आई हूँ। यह मेरी पहली तनख्वाह है। आपकी उस रात की मदद ने एक गरीब की … Read more

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