रिश्तों की छांव
“चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more