सिंदूरी साँझ का इंतज़ार
नैना के मुँह से कोई शब्द नहीं फूटा। उसने काँपते हाथों को आगे बढ़ाया, जैसे यह तस्दीक करना चाहती हो कि सामने खड़ा इंसान हाड़-मांस का सच है या कोई छलावा। जैसे ही उसकी उंगलियों ने अनिरुद्ध के खुरदुरे कोट को छुआ, अनिरुद्ध ने एक झटके में उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपने सीने … Read more