रिश्तों की धूप-छांव
मिहिर थोड़ा रुका, उसने माँ के हाथ को अपने गाल से लगाया और आगे बोला, “और रही बात सौम्या की, माँ… तो सौम्या तो मेरी आत्मा है, मेरी अर्धांगिनी है। उसके साथ तो मुझे अपना पूरा जीवन बिताना है। अगर मैं पहले आपके पास आ गया, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मेरा … Read more