ऐसी भाभी सबको मिले – कमलेश आहूजा

रिया अपने भाई रोहित के शहर में ही रहती थी,इसलिए हर रविवार मायके आना उसका जैसे नियम बन गया था। माँ के जाने के बाद मायके की सारी जिम्मेदारी उसकी छोटी भाभी नेहा ने अपने ऊपर ले ली थी। नेहा ने कभी उसे ननद समझकर नहीं, बल्कि अपनी बड़ी बहन की तरह सम्मान और प्यार दिया था।

उस रविवार भी रिया सुबह-सुबह मायके आ गई। नेहा की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी और अगले दिन बच्चों की परीक्षा थी,फिर भी उसने रिया का मुस्कुराकर स्वागत किया।उसकी पसंद का नाश्ता बनाया,चाय पिलाई और फिर दोपहर के खाने की तैयारी में लग गई।

“नेहा, तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है, फिर भी इतना सब क्यों कर रही हो?” रिया ने अपनी चिंता जाहिर की।

“दीदी,आप मायके आई हो,और मैं आपके लिए इतना भी न करूँ?” नेहा मुस्कुराकर बोली।

थोड़ी देर बाद बच्चों ने पढ़ाई में मदद के लिए नेहा को बुलाया। वह किचन का काम छोड़कर उनके पास बैठ गई।

उधर रिया किचन में अकेली काम करने लगी।तभी रोहित की नजर उस पर पड़ी।वह नेहा के पास जाकर गुस्से से बोला-“नेहा,तुम बच्चों को लेकर यहाँ बैठी हो और दीदी किचन में अकेली काम कर रही हैं।तुम्हें नहीं लगता,दीदी क्या सोचेंगी?”

नेहा ने रोहित की ओर देखा। उसके पास अपनी सफाई में कहने को बहुत कुछ था,लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।वह चुपचाप रोहित की बात सुनती रही।तभी रिया वहाँ आ गई।उसने रोहित को नेहा पर गुस्सा करते देखा तो बोली -“रोहित, तुम नेहा को क्यों डाँट रहे हो?उसकी तबीयत ठीक नहीं है फिर भी सुबह से वो मेरी खातिरदारी में लगी हुई है।ऊपर से बच्चों की परीक्षा है।अभी बच्चों के पास बैठ गई तो क्या हो गया ?”

रोहित चुप हो गया।

रिया ने नेहा की ओर देखते हुए कहा-“नेहा ने मुझे कभी अपनी ननद समझा ही नहीं। माँ के जाने के बाद इसने मुझे कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी। हर तीज-त्योहार पर मेरे और मेरे परिवार के लिए तोहफे लेना, हर रस्म निभाना,मेरी पसंद का ध्यान रखना… इसने कभी किसी चीज में कोई कमी नहीं छोड़ी।मैं तो हर रविवार बेझिझक चली आती हूँ,लेकिन नेहा ने कभी यह नहीं सोचा कि मैं उसके आराम में बाधा डाल रही हूँ।मेरे आने पर हमेशा उसके चेहरे पर खुशी होती है।आज मेरी बारी थी उसका हाथ बँटाने की,और मैं खुशी से काम कर रही हूँ।इसमें नेहा की कोई गलती नहीं है।”कहते कहते रिया की आंखें नम हो गईं।

रिया की बात सुनकर नेहा की आँखों में भी आँसू आ गए।रिया ने आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लिया और कहा – 

“तुमने मुझे इतना प्यार दिया है,कि मायका आने पर आज भी माँ के घर आने जैसा एहसास होता है।सच कहूँ नेहा,भाभी हो तो तुम जैसी!”

नेहा ने भावुक होकर रिया को गले लगा लिया।

रोहित भी मुस्कुरा दिया।उसे समझ आ गया था,कि घर में रिश्तों को निभाने वाली नेहा को डाँट की नहीं,उसके स्नेह को समझने की जरूरत थी।

सच भाभी जब ननद को बेटी या बहन जैसा स्नेह देती है,तो वह रिश्ता सिर्फ ननद-भाभी का नहीं रहता—मायके की माँ जैसी ममता बन जाता है। और तब ननद के दिल से यही निकलता है..’ऐसी भाभी सबको मिले।’ 

कमलेश आहूजा

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