दिल का विस्तार

रुचिका को अपनी गलती का गहरा एहसास हुआ। उसने सोचा कि जब सास ने सुबह नमक ज्यादा होने की बात कही थी, तो वह कोई उसका अपमान नहीं कर रही थीं। वे तो सिर्फ अपने शरीर की मजबूरी और बेटे की आदत के बीच का सच बता रही थीं। गलती उसकी अपनी थी कि उसने … Read more

सादगी का उजास

 अम्माजी की बात सुनते ही कमिश्नर साहब और सांसद महोदय ने भी खाना शुरू किया। देखते ही देखते सन्नाटा प्रशंसा के शोर में बदल गया। जो हाई-सोसायटी महिलाएं हमेशा डाइट और विदेशी व्यंजनों की बातें करती थीं, वे एक के बाद एक खस्ता पूरियां और रबड़ी-मालपुआ मांग-मांग कर खाने लगीं। श्रीमती सिंघानिया भी चुपचाप दो … Read more

वह मुझसे बेहतर क्यों..? – लतिका श्रीवास्तव

शुभी के भीतर कुछ सुलग उठा।आज फिर वही हुआ जो वह नहीं चाहती थी। एक ही घर में दो बहुएँ थीं—बड़ी और छोटी। बड़ी बहू शांता घर के काम में बहुत सलीकेदार थी। खाना स्वादिष्ट बनाती, घर को करीने से रखती और मेहमानों का स्वागत भी पूरे मन से करती।सास गायत्री जी हर काम उसे … Read more

रिश्तों की महक

 कुणाल का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने अंजलि से कहा, “अंजलि, तुम्हें हो क्या गया है? पिछले पाँच सालों में तो तुमने कभी ऐसा नहीं सोचा। आज अचानक तुम्हारे मन में यह ज़हर कहाँ से भर गया? बाबूजी और माँ ने कभी हमसे एक पैसा नहीं माँगा, भैया और भाभी ने हमेशा हमें … Read more

“कटे पंखों की परवाज ” – राशि सिंह

“कुछ सपने हमेशा सपने ही रह जाते हैं… कभी मुकम्मल या कहिए हकीकत का जामा नहीं पहन पाते।” रोशनी ने नितारा से मुस्कराते हुए कहा, लेकिन उसकी मुस्कान हजारों आँसुओं में लिपटी हुई थी। शाम अपने पूरे शबाब पर थी। सूरज विदा होने से पहले आकाश पर अपनी आखिरी सुनहरी लकीरें खींच रहा था। सामने … Read more

रिटर्न गिफ़्ट – के कामेश्वरी

सुशीला जी पति की मृत्यु पर उदास बैठी हुई थीं। उनका पूरा घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था। उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि पति के साथ छोड़ने के बाद उनका क्या हाल होगा, बल्कि वह इस बात को लेकर परेशान थीं कि बेटा और बहू इन रिश्तेदारों को बारहवीं (तेरहवीं/श्राद्ध) पर रिटर्न … Read more

ये कैसा बंधन – उमा वर्मा

आज सुबह सुबह खबर मिली कि तुम नहीं रहे ।यह तो होना ही था।कल  ही तो बेटे के साथ तुम्हे  देखने गयी थी ।बिस्तर पर पड़े असहाय सा मुझे देखते रहे तुम ।पलक भी नहीं झपका रहे थे ।न जाने क्या सोच रहे थे तुम ।पूरे शरीर पर मशीन लगी हुई थी ।डाक्टर ने तो … Read more

रिश्तों का आईना

 भाभी की यह बात सुनकर शालिनी का कलेजा भर आया। जहाँ वह कल तक भाभी पर गुस्सा हो रही थी, वहीं भाभी का यह निश्छल प्रेम देखकर उसकी आँखें फिर छलक पड़ीं। उसने अपने आँसू पोंछते हुए बेहद कोमल स्वर में कहा, “अरे नहीं भाभी, बिल्कुल नहीं! आप कहीं वापस मत आइए। मेरी तो अचानक … Read more

चौखट की धूप

 एक रात जब तान्या भूख से बिलखते हुए खाली दूध का गिलास देखकर सो गई और आरव अपनी फटी हुई कॉपी को गोंद से चिपका रहा था, मंजरी पूरी रात आलोक की तस्वीर के सामने घुटनों के बल बैठकर रोती रही। “हे ईश्वर, मैं क्या करूं? मैं तो अनपढ़ नहीं हूं, बीए किया है मैंने, … Read more

दहलीज का दायरा

 मनोज ने तुरंत खड़े होकर अपने सूटकेस की चेन खींची और बनावटी गंभीरता ओढ़ते हुए कहा, “हाँ भैया, सारिका बिल्कुल ठीक कह रही है। और वैसे भी, भाभी इतनी बीमार हैं, इस हालत में हमारा यहाँ रुकना आप पर अतिरिक्त बोझ ही बनेगा। हम तो सोच रहे हैं कि अभी इसी वक्त कैब बुक करते … Read more

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