तूलिका ने चाय का बर्तन गैस पर चढ़ाते हुए पति मुकुल से कहा…”मुकुल …! फोन क्यों नहीं उठाते, बच्चे उठ जाएंगे फोन उठाइये ना । तूलिका मुकुल की दो बेटियां थी । छः वर्षीय श्रेया और दस वर्षीय रिया ।मुकुल ने करवट बदलते हुए अलसाये स्वर में कहा…”फोन उठा लो ना तुम तूलिका ! देख तो रही हो मैं सो रहा हूँ।
तूलिका ने जोर की साँस लेते हुए चाय छाना और चाय की ट्रे कमरे के टेबल पर पटकते हुए कहा..”लोगों को मना कर दो ना इतनी सुबह कॉल करने के लिए, जिनलोगों से आप हर एक दिन बीच करके सुबह उठते ही फोन पर लग जाते हो फिर जब आप एक दिन नहीं करोगे फोन तो लोग तो पूछकर आपसे हाल चाल लेना चाहेंगे ना, तो फिर मुझे फोन मत पकड़ाया करो आप l
चाय की चुस्की लेते हुए मुकुल ने तूलिका से पूछा..किसका फोन था? मुकुल की तरफ आँखें तरेरते हुए तूलिका ने स्क्रीन देखकर कहा…”सुचित्रा चाची लिखा है । मुकुल हड़बड़ाते हुए बिस्तर से उठ खड़ा हुआ । तूलिका ने दिमाग पर जोर डालते हुए अचंभित होकर कहा..”सुलोचना चाची को तो जानती हूँ , ये सुचित्रा चाची कौन हैं ?
इतने दिनों में पहले नाम कभी नहीं सुना । मुकुल ने हौले से मुस्कुराते हुए कहा…”अरे हाँ ! ये उन्हीं की बहन हैं । मैं तो भूल ही गया था उन्होंने पिछले सोमवार ही फोन करके मुझे कहा था डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लेने लेकिन ऑफिस में व्यस्तता के कारण मैं भूल गया था ।
तूलिका हैरान होकर एक टक मुकुल को देखी जा रही थी तभी पास वाले कमरे से उल्टी की आवाज आई तो वह दौड़ी दौड़ी देखने गई । तूलिका ने देखा उसकी छः वर्षीय बेटी श्रेया जमीन पर उल्टियाँ कर चुकी थी और बाथरूम में जाकर रो रही थी ।
तूलिका ने साफ किया जमीन और श्रेया को नहलाकर बाथरूम साफ करके बाहर आई । तब तक इधर मुकुल नहाकर शीशे के सामने खड़े थे ।
मुकुल ने एक बार भी नहीं पूछा श्रेया को क्या हुआ । बस तूलिका को ये बोलकर निकलने ही वाले थे कि आने में थोड़ी देर हो जाएगी तब तक तूलिका ने चीखते हुए कहा…थोड़ी देर में क्यों आना है, और भी रिश्तेदारों से पता कर लीजिए जिन्हें जाँच कराना हो सबका करा के आइये, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना हो करा के आइये ।
अपने बच्चे और परिवार से क्या मतलब है ? मैं बोलती हूँ मुझे दिखा लेने दीजिए तो मुझ पर भी चिल्लाते हैं ..”अरे ! तुम बात को बहुत खींचती हो, दिखा दूँगा जब मुझे लगेगा, चिंता मत करो बच्चों को ये सब लगा रहता है ।
थोड़ा सामाजिक भी होना चाहिए । मुकुल ने सारी बातें सुनकर घूर के देखा तूलिका को और श्रेया का माथा चूमते हुए कहा…”आता हूँ बेटा आपको कल दिखा दूँगा डॉक्टर को ।
दरवाजा बंद करके मुकुल निकल चुके थे । अभी भी तूलिका का मन शांत नहीं था, वह अंदर ही अंदर उबल रही थी । श्रेया को वह बालकनी में ले जाकर पानी पिलाई तो श्रेया शांत हुई । तूलिका के फोन पर बार बार किसी का फोन आ रहा था गुस्से से वह फोन ही नहीं उठाना चाहती थी ।
सुनते सुनते जब उससे नहीं रहा गया तो उसने फोन लिया और देखा मुकुल की दीदी ममता का फोन था । तूलिका समझ गई थी कि इन्हें भी जरूर कोई काम होगा । उसने फोन उठाकर कहा..”बोलिए दीदी ! क्या काम है ?
तूलिका की खनकदार आवाज सुनकर ममता झेंप गई । उसने घबराते हुए कहा..”काम ? ऐसा क्यों बोल रही हैं भाभी ! आपसे बात करने के लिए और श्रेया के बारे में पता चला तो उसका हाल खबर जानने के लिए नहीं कर सकती क्या ? “हाँ.. हाँ दीदी !
बिल्कुल कर सकती हैं फोन लेकिन आज तक बेवजह आपने किया नहीं है फोन ।ममता को तूलिका की तंज भरी आवाज पहली बार सुनने को मिली जो बर्दाश्त से बाहर था ।
फिर भी उसे अपना काम तो निकालना था । हालचाल तूलिका और श्रेया , रिया का पूछकर उसने तूलिका से कहा…”भाभी ! मुझे जरा अपनी सहेली के घर जाना था फंक्शन में आप मेरे बच्चे विहान और पंखुड़ी को अपने घर रख लेती थोड़ी देर तो अच्छा होता, फिर लौटते समय आकर ले जाऊंगी मेरे पति भी घर में नहीं हैं नहीं तो वो रख लेते ।
दीदी ! आप हाल खबर लेने के लिए फोन की थीं या अपना काम निकालने । मैं तो पहले से जानती थी आप सिर्फ काम के वक्त मुझे याद करती हैं । और आप तो हमेशा थोड़ी देर के लिए ही कहकर जाती हैं वापस लौटने में आपको देर होता ही होता है ।तूलिका ने सुना दिया तो ममता ने फोन पटक कर रख दिया ।
फिर मुकुल के दोस्त साहिल का फोन आया..भाभी ! मुकुल फोन नहीं उठा रहा । मेरे एक संबंधी हैं वो आपके घर आएंगे कल उन्हें कुछ जमीन के सिलसिले में काम है । चुपचाप मूक बनी तूलिका सुन रही थी । साहिल ने कई बार हेलो..हेलो किया तो शांति से तूलिका ने कहकर फोन रख दिया ..वो चाची को दिखाने गए हैं अस्पताल । बता दूँगी उन्हें ।
दो घंटे बाद…
मुकुल ने फोन करके तूलिका से कहा…”सॉरी ! टेस्ट कराने बोला है डॉक्टर ने, यहाँ चाची का घर नजदीक है मैं यहीं रुक जाऊंगा तुम खाना खाकर सो जाना । गुस्से से जल रही थी तूलिका । उसने कहा..आपको अब याद आया है, खाकर सो जाना, सुबह के गए हुए आप शाम के सात बजने आए तब फोन कर रहे हैं ।
मुकुल के पास कोई जवाब नहीं था उसने फोन रख दिया । तभी रिया के ट्यूशन से फोन आया मुकुल को समझ नहीं आया कि सर कुछ कहना चाह रहे हैं । उसने सोचा..”तूलिका व्यस्त होगी तो मुझे बच्चे को पिक करने के लिए बुला रहे । उसका पूरा ध्यान चाची पर था ,उसने फोन काट दिया ।
अब रिया की सहेली स्वाति और उसके भैया पवन मिलकर रिया को घर लेके आए । रिया के सिर पर पट्टी बंधी थी उसे स्कूटर वाले ने ठोकर मार दिया था।
पर ईश्वर की कृपा से चोट कम लगी थी। तूलिका देखी और घबरा गई, उसके आंखों से आँसू बहने लगे । रिया की सहेली और भैया ने उसे प्यार से शांत कराया। सिर पर हाथ रखकर तूलिका बैठी ही थी कि फिर से मुकुल का फोन आया..”रास्ते में हूं निकल गया वहाँ से, एक बार रिया के ट्यूशन में फोन कर लेना कई मिस्ड कॉल हो गए, बात हुई तुम्हारी, सब ठीक तो है ?
हेलो…हेलो , कुछ बोलो तो मुकुल ने कहा तो तूलिका बोली घर आइए घर में बात करूंगी, किस किस बात के लिए लड़ूं समझ नहीं आता। सबके लिए फुर्सत है हमारी बेटियों के लिए नहीं ।
घर पहुंचने से पहले ही मुकुल को बहुत थकान सी हो रही थी अंग अंग उसका टूट रहा था । सोचा कल जाकर श्रेया को दिखा दूँगा और अभी तूलिका को बहला दूंगा उसके लिए कुछ खरीद लेता हूं। बोलूँगा मसाज करने तो वो सारी शिकायतें भूल जाएगी मेरी थकान देखकर । उसने फूल वाली से एक गजरा और दुकान से तूलिका के मनपसंद पीले रंग का सूट लिया ।
घर पहुंचकर जैसे ही सरप्राइज करने वाला था दरवाजे पर रिया की दोस्त वंशिका उदास सी दिखी । घबराते हुए अंदर गए मुकुल तो घर की स्थिति देखने लायक नहीं थी । श्रेया को लेकर तूलिका लेटी हुई थी और बगल में आँख बंद करके रिया सिर पर पट्टी लगाई हुई थी। उसका चोट देखकर मुकुल ने घबराते हुए पूछा..क्या बात है, क्या हुआ बेटा ?
श्रेया का शरीर भी बुखार से तप रहा था, घर में दी जाने वाली गोलियों का कोई असर न था । पवन ने सारी बातें बताई फिर भी तूलिका से पूछने लगे मुकुल..बोलने की हालत में नहीं थी वो फिर भी हिम्मत करके खड़ी हुई और बोलने लगी…क्या गलती है मुकुल मेरे बच्चों की ?बच्चों के लिए कोई इतना लापरवाह कैसे हो सकता है ।
दूर हो या नजदीक , दोस्त हो या जिसका घर अस्पताल के नजदीक हो सबका ठेका आप क्यों लेते हैं ? सबकी छोटी बीमारी में आप दौड़ कर जाते हैं । अपने बच्चों की बीमारी में कभी कहते हैं ज्यादा खाने से तबियत खराब हुई होगी, तो कभी मामूली है, कभी गैस बना होगा।
ये सब क्या है ? कितना सहन करूँ ? मुझे भी आपने इतनी छूट नहीं दी कि बाहर आपके बगैर कहीं जाऊं, क्या माहौल कर दिया दूसरों के चक्कर में। # अफसोस होता है आपकी सोच पर कोई ऐसा कैसे हो सकता है । अपना घर जलाकर दूसरों के घर में उजाले नहीं करते, कभी ना बोलना भी आना चाहिए ।
चीख चीख कर तूलिका रो रही थी तभी मुकुल ने पूछा…ममता दीदी को भेजा था मिस्ड कॉल देखकर तुमसे मिलने । “कोई नहीं आया मुकुल..कोई नहीं। कब समझेंगे आप सबको सिर्फ आपसे काम निकलना है । उन्होंने भी आज उसी काम के लिए फोन किया था पर मैने हामी नहीं भरी । तूलिका ने सिसकते हुए कहा।
मुकुल सोच में पड़ गए । सारे रिश्ते एक जैसे ही हैं। अच्छा है कम से कम सगे संबंधियों से तो अच्छे दोस्त हैं मदद के लिए आगे तो आ जाते हैं। पहली बार आज उसे अपनी गलती का आभास हो रहा था क्योंकि उसका शरीर भी बुरी तरह से भाग भाग कर दर्द से फट रहा था फिर भी उसने हिम्मत बाँध कर श्रेया को गोद में लिया
और तूलिका को बोलते हुए गया मैं दिखाकर लाता हूँ तुम रिया का ध्यान रखना । डॉक्टर ने कई टेस्ट लिखे और श्रेया को इंजेक्शन दिया अभी फिलहाल वो ठीक थी ।
मुकुल श्रेया को लेकर घर आ गए और तूलिका के गले लगाकर अपने किए का पछतावा जाहिर करते हुए कहा..”बहुत #अफसोस है मुझे अपनी सामाजिकता निभाने पर तूलिका ! अपने परिवार और बच्चों का ही दुःख नहीं देख पाया लेकिन वादा करता हूँ आगे अपने परिवार को अनदेखा कभी नहीं करूंगा ।
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#अफसोस
मौलिक, स्वरचित
अर्चना सिंह