विश्वास की नई सुबह

अनघा ने बहुत ही शांत भाव से प्रणव की सारी बातें सुनीं और फिर मुस्कुराते हुए कहा, “प्रणव जी, जो बेटा अपने माता-पिता के दुख को देखकर खुद शादी से डरने लगे, वह इंसान दिल का कितना सच्चा होगा, यह समझने के लिए मुझे किसी परीक्षा की जरूरत नहीं है। माता-पिता का सम्मान करना किसी … Read more

चुप्पी की टूटी परतें

“मुझे माफ कर दो रोहिणी,” शैलेश जी का गला रुंध गया, “मैंने तुम्हें कभी वह साथी नहीं समझा जो बराबरी पर खड़ा होता है। मैंने हमेशा तुम पर अपनी मर्जी थोपी। आज मुझे एहसास हो रहा है कि बच्चे तो अपनी दुनिया में चले गए, अब इस ढलती उम्र में हम दोनों ही एक-दूसरे का … Read more

ममता की धूप

रितिका अब और खुद को संभाल नहीं पाई। उसके सब्र का बांध टूट गया और वह फफक-फफक कर कल्याणी जी के सीने से लिपट गई। वह किसी छोटी बच्ची की तरह रोने लगी, “मां… मुझे माफ कर दीजिए… मुझे माफ कर दीजिए मां!” कल्याणी जी ने उसे कसकर अपने आलिंगन में भर लिया। रितिका के … Read more

धूप की पहली चुस्की

सुनैना ने मुस्कुराते हुए अपने आंसू पोंछे और कहा, “बाबूजी, आज से रोज सुबह की पहली चाय आपके कमरे में, आपके उठने से पहले पहुंचेगी। और जब तक आप चाय नहीं पी लेंगे, इस घर का कोई दूसरा चूल्हा नहीं जलेगा।” पंकज ने आगे बढ़कर पिता और पत्नी दोनों को अपने आलिंगन में समेट लिया। … Read more

आत्मसम्मान की कसौटी

“अथर्व,” बृजेश जी की आवाज़ में अब क्रोध नहीं, बल्कि एक पिता का गहरा आत्ममंथन था, “तुझे बचाने की अंधी दौड़ में मैं यह भूल ही गया था कि मैं तुझे एक नागरिक और एक सच्चा इंसान बनाने की जगह एक कायर और धोखेबाज़ बनाना सिखा रहा था। तूने सही कहा बेटा, सच और प्रायश्चित … Read more

प्यार का धागा

 “भाभी! क्या सीरियसली?” तान्या की आवाज में साफ कड़वाहट और तंज था, “आप मेरे पच्चीसवें जन्मदिन पर अपने हाथ से सिली हुई ड्रेस गिफ्ट कर रही हैं? आपको पता भी है कि मैं किस सर्कल में उठती-बैठती हूं? मेरी सारी फ्रेंड्स इंटरनेशनल और प्रीमियम ब्रांड्स के कपड़े पहनती हैं। अगर मैं लोकल टेलर जैसी हाथ … Read more

रिश्ते की असली नींव

 गायत्री जी ने भरे गले से कहा, “तान्या, सच कहूँ तो जब मैं यहाँ आ रही थी, तो मेरे मन में बहुत सा मैल था। मुझे लगा था कि तुम आजकल की हवा में उड़ने वाली लड़की हो जो परिवार को अपनी शर्तों पर चलाना चाहती है। लेकिन आज तुमने मेरी आंखें खोल दीं। तुमने … Read more

ढलती धूप की सुनहरी छांव

 विनीत ने कहा, “बाबूजी, मां और आपने पिछले तीस सालों में कभी अपने लिए कोई छुट्टी नहीं ली। जब भी छुट्टियां लीं, हमारे दाखिलों के लिए, हमारी शादियों के लिए या किसी रिश्तेदारी को निभाने के लिए लीं। अब आपकी असली छुट्टियां शुरू होती हैं। आप दोनों जाइए, झीलों के किनारे बैठिए, सुकून से सूर्यास्त … Read more

उपयोगी खजाना

 अंकिता मम्मी कहां हैं?  अभय ने ऑफिस जाने से पहले अपनी पत्नी अंकिता से पूछा ।   “आपको तो पता है कि जब सफाई जैसा कुछ काम होता है तो मम्मी  बीरेन (नौकर) के साथ ही लग जाती हैं। उनको ऐसा लगता है कि हर कीमती सामान कूड़ा समझ कर फेंक दिया जाएगा।” अंकिता ने अपनी … Read more

आंसुओं की छांव में पनपती उम्मीद

 “अवनी, सच तो यह है कि उस दिन शायद मैं भी वही करता जो आज तुम्हारे पापा कर रहे हैं। शायद हर वो बाप यही करता है जिसकी बेटी बिना उसकी रज़ा के घर की दहलीज़ लांघ जाती है। हमें पापा की ज़बान से निकले उन कड़वे शब्दों को नहीं देखना चाहिए, हमें उस ज़हर … Read more

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