बंजर कोख की अमर छांव

 एक मां के सामने उसका बेटा तड़पे और वह अपने गहने बचाकर रखे, इतनी पत्थर दिल नहीं हूँ मैं।” पूरा घर सन्न रह गया। मनोरमा चाची, जो ज़िंदगी भर बड़ी मां को अपनी सौतन और दुश्मन समझती रहीं, उनके पैरों में गिरकर फूट-फूट कर रोने लगीं। चाचा हरिशंकर की आंखें शर्म और पश्चाताप के आंसुओं … Read more

सूखी डाली पर पल्लव

 अंजलि के पैर कांप रहे थे। आलोक ने उसका हाथ कसकर थाम रखा था। जैसे ही वे केबिन में दाखिल हुए, डॉ. सीमा के चेहरे पर एक चौड़ी और आत्मीय मुस्कान खिली हुई थी। उन्होंने रिपोर्ट की फाइल आगे बढ़ाते हुए कहा, “बधाई हो अंजलि जी, बधाई हो आलोक जी! बीटा एचसीजी का स्तर बहुत … Read more

शिकायतों का मीठा पिटारा

  बार-बार कानों में समधन राजेश्वरी जी के वे कड़क और गंभीर शब्द गूंज रहे थे, जो उन्होंने आज सुबह फोन पर कहे थे—”कौशल्या जी, अगर आज आपके पास थोड़ा सा भी वक्त हो तो दोपहर तक हमारे घर आ जाइए। अंकिता को लेकर कुछ बहुत जरूरी बातें करनी हैं। उसकी शिकायतें अब इतनी बढ़ चुकी … Read more

रिश्तों की मिठास

किचन के दरवाजे के पास खड़ी सुलोचना देवी की नज़रें बार-बार फ्रिज की तरफ जा रही थीं। उनका गला सूख रहा था, लेकिन मन में एक अजीब सी हिचक और संकोच की दीवार खड़ी थी। पिछले दो दिनों से उनके पति बैकुंठ जी की तबीयत थोड़ी सुस्त थी। उम्र के छिहत्तरवें पड़ाव पर पहुँचते-पहुँचते शरीर … Read more

ममता की रिहाई

“एक मां ने अपनी ही कोख से जन्मी औलाद को बेहतर भविष्य के नाम पर दूसरों की गोद में सौंप दिया, पर जब वही बेटी जिंदगी और मौत की दहलीज पर खड़ी होकर अपनी मां का आंचल तलाशने लगी, तब जो सच सामने आया उसने रूह कंपा दी…” हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में मशीनों की … Read more

बंद दरवाजों की सिसकियाँ

शारदा जी की आवाज में एक कँपकँपाती हुई चीख थी, “पल्लवी! अपने भाई की बात पर अभी इसी वक्त यकीन कर लो… अगर तुमने उसकी खामोश सिसकियों को महज मियां-बीवी की तकरार समझकर टाल दिया, तो पूरी उम्र मेरी तरह पछतावे की आग में जलती रहोगी! देर मत करो, खुदा के लिए देर मत करो!” … Read more

हिसाब काँच के बर्तनों का

 आकाश अपनी पत्नी के इस अचानक बदले रूप को देखकर सन्न रह गया। परिवार के अन्य रिश्तेदारों के सामने उसे अपनी घोर बेइज़्ज़ती महसूस हुई। वह गुस्से से लाल होकर शालिनी की तरफ झपटा, “शालिनी! तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? भाभी और माँ प्यार से दे रही हैं और तुम यहाँ तमाशा खड़ा कर … Read more

लचकता कदम, संभलता विश्वास

यह सुनते ही अनुराग के होश उड़ गए। वह असहाय होकर रोने लगा। उसने कांपते हाथों से अपना फोन ढूंढने की कोशिश की और सबसे पहले शिखा का नंबर मिलाया। उसने रोते हुए शिखा को अपनी हालत बताई और कहा, “शिखा, मैं अस्पताल में हूं। डॉक्टर कह रहे हैं कि मैं शायद कई महीनों तक … Read more

बंद दरवाजों के पार

 फ़ोन की दूसरी तरफ़ नलिनी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। एक पल के लिए उसका दिमाग़ सुन्न हो गया। उसके कानों में सिर्फ़ सन्नाटा गूँजने लगा। क्रोध, घृणा, ग्लानि और डर—सारे भाव एक साथ उसके भीतर उमड़ पड़े। उसने तुरंत खुद को सँभाला। उसे पता था कि अगर इस वक़्त उसने अपना आपा खोया, … Read more

रेशमी धागों का अनकहा बंधन

माधव की आवाज सुनते ही अनिका के होश उड़ गए। ऐसा लगा मानो किसी ने उस पर घड़ों ठंडा पानी उड़ेल दिया हो। उसके हाथ से चाय का कप छूटते-छूटते बचा। कमरे में एक गहरा, दमघोंटू सन्नाटा छा गया। शालिनी भी घबरा गई और नजरें चुराने लगी। अनिका का चेहरा सफेद पड़ चुका था। उसे … Read more

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