आज सुबह से ही दादी मां अत्यंत उत्साह के साथ पूरे घर में दौड़ भाग कर रही हे,, 2 दिन बाद सावन की तीज आ रही हे,, ओर इस बार तो उनकी लाड़ली पोती की पहली तीज है,, तो वो खुद सारी तैयारियां अपने अनुसार करवा रही हे,,
बाहर वाले बड़े पेड़ पर झूला डलवा दिया हे,,
मेंहदी लगाने वाली को भी बोल दिया हे वो भी कल दिन में आकर सभी बहुओं बेटियों पोतियों के हाथ पैरों में सुंदर सी मेंहदी लगा देगी,, घेवर मालपुए खाजे पैठे सब बनवा लिए हे,
बस अब आज दोपहर तक उनकी पोती शिवी भी आ जाएगी,, वो बेसब्री से उसका इंतजार कर रही हे,,
जैसे ही घर के दरवाजे पर गाड़ी रुकी,, दादी ने दौड़ कर अपनी शिवी को गले से लगाया, उसकी नजर उतारी ओर उसे घर में लेकर आ गई।।
शिवी की मम्मी ताईजी काकी जी,, सभी भाई बहन खूब मस्ती कर रहे हे,,
भोजन के बाद शाम को सबने हरा लहरिया पहना,, हरे कांच की चूड़ियां पहनी,,
ओर सभी तैयार हो कर शिवजी के मंदिर गए वहां पूजा अर्चना की ,, उसके बाद भाई बहनों का पवित्र प्रेम का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला था,, तो सब उसकी तैयारी में लग गए,,
शिवी ओर उसकी बहनों नेअपने हाथ से राखी बनाई ,,ओर 2 पहले ही नारियल मिठाइयां सब लेकर आ गए,,अब आज रक्षा बंधन है सुबह से ही घर में चहल पहल मची हुई है,,
सभी भाई बहन तैयार हे,,
आज शिवी की दादी माँ ओर ताईजी मम्मी काकी जी सबने मिलकर सेवईयां की खीर पूरी सब्जी बनाई हैं
सबने दोपहर को भोजन किया और फिर सभी बहनों ने भाईयों को राखी बांधी,,
अब कल शिवी भी अपने ससुराल वापिस जाएगी,, ये सोचकर सभी परिवार वाले थोड़े उदास भी हे,, पर उन सबको ये खुशी हे कि शिवी को बहुत अच्छा परिवार मिला हे वो वहां बहुत खुश हे,,
तो ये हे एक मेरी छोटी सी लघु कथा जिसमें मैने सावन के अलग अलग रंग भरने की कोशिश की हे,, हम मारवाड़ी लोगों में आज भी सावन माह के सभी व्रत उत्सव बहुत धूम धाम से मनाये जाते हे ,, ओर आज भी बहन बेटियां इस माह में अपने पिहर जरूर जाती हे
भारती अनिल सोनी
उज्जैन