खून का कर्ज

 तान्या का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, “तू पागल हो गई है क्या अवनि? तू उस धोखेबाज, मतलबी और गिरे हुए इंसान से उम्मीद लगा रही है? जिसने तुझे उस वक्त छोड़ दिया जब तू मां बनने वाली थी, जिसने तेरे मां-बाप की अमानत छीन ली! तुझे क्या लगता है, वो पत्थर दिल इंसान अपनी ऐय्याशी छोड़कर यहां अपनी बेटी के लिए आएगा? उसे तो यह भी नहीं पता होगा कि बाप का फर्ज क्या होता है!”

अस्पताल के आईसीयू के बाहर लगी लाल बत्ती मानो जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय कर रही थी। गलियारे की ठंडी फर्श पर बैठी अवनि की आंखें बेबस होकर ऑपरेशन थिएटर के बंद दरवाजे को ताक रही थीं। हर बीतते पल के साथ उसके दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। भीतर उसकी सात साल की नन्ही परी, पीहू, जिंदगी की जंग लड़ रही थी। स्कूल वैन के भयानक हादसे ने अवनि की दुनिया को हिलाकर रख दिया था। डॉक्टर जब बाहर निकले, तो उनके चेहरे की शिकन देखकर अवनि का कलेजा मुंह को आ गया।

डॉक्टर ने भारी आवाज में कहा कि बच्ची का बहुत ज्यादा खून बह चुका है और उसका ब्लड ग्रुप अत्यंत दुर्लभ ‘बॉम्बे ब्लड ग्रुप’ जैसा रेयर नेगेटिव है, जो पूरे शहर के किसी भी ब्लड बैंक में मौजूद नहीं है। अगर अगले दो घंटों में खून की व्यवस्था नहीं हुई, तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी। अवनि के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अपने सभी सगे-संबंधियों, सहकर्मियों और परिचितों को फोन लगा दिया, पर हर तरफ से सिर्फ निराशा हाथ लगी। तभी अचानक उसके जेहन में एक चेहरा कौंधा—अमित। वही अमित, जो पीहू का जैविक पिता था और जिसका ब्लड ग्रुप बिल्कुल पीहू से मेल खाता था।

अवनि की उंगलियां फोन डायल करते हुए कांप रही थीं। जिस इंसान से उसने कभी दोबारा न मिलने की कसम खाई थी, जिसने उसके साथ ऐसा विश्वासघात किया था कि उसकी रूह तक कांप उठी थी, आज उसी इंसान के सामने अपनी बेटी की सांसों की भीख मांगने के लिए वह मजबूर थी। फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से अमित की चौंकी हुई आवाज आई। अवनि ने अपने सारे स्वाभिमान को किनारे रखकर सिसकते हुए कहा कि पीहू की जिंदगी खतरे में है, अस्पताल में उसका खून नहीं मिल रहा और अगर वो नहीं आया तो उसकी बच्ची नहीं बचेगी। इससे पहले कि अमित कुछ कह पाता, अस्पताल के बेसमेंट के कमजोर नेटवर्क के कारण फोन कट गया। अवनि बेसुध होकर दीवार से टिक गई और उसकी यादों का कारवां बरसों पीछे उस सुनहरे दौर में चला गया, जब उसकी जिंदगी में सब कुछ फूलों सा खिला था।

भोपाल की वादियों में अवनि और अमित का रिश्ता किसी सपने जैसा शुरू हुआ था। दोनों एक ही प्रतिष्ठित आर्किटेक्चरल फर्म में सीनियर डिजाइनर थे। काम के प्रति समर्पण, कलात्मक सोच और एक-दूसरे के प्रति गहरा आदर धीरे-धीरे बेपनाह मोहब्बत में बदल गया। दोनों के परिवार बेहद खुश थे और पूरे विधि-विधान व धूमधाम से उनकी शादी संपन्न हुई थी। अवनि एक शांत, गंभीर और उच्च संस्कारों वाली स्त्री थी, जबकि अमित थोड़ा महत्वाकांक्षी और भावुक स्वभाव का था। शादी के शुरुआती दो साल इतने खूबसूरत गुजरे कि आसपास के लोग उनकी मिसाल दिया करते थे। दोनों साथ में दफ्तर जाते, शाम को साथ लौटते और सपनों का आशियाना बुनते।

मगर खुशियों के इस शांत समंदर में तूफान की आहट तब हुई, जब फर्म में रोहिणी नाम की एक नई क्लाइंट रिलेशनशिप मैनेजर की एंट्री हुई। रोहिणी बेहद महत्वाकांक्षी, चतुर और चालाकी से रिश्ते भुनाने में माहिर थी। उसकी मीठी बातों और दिखावे की चकाचौंध के पीछे एक बेहद लालची फितरत छिपी थी। रोहिणी की नजर अमित की प्रतिभा, उसकी साख और अवनि के रसूख पर टिक गई थी। वह किसी भी कीमत पर शॉर्टकट से अमीर बनना चाहती थी और इसके लिए उसे अमित एक आसान जरिया नजर आया। रोहिणी ने अमित की झूठी तारीफें करना शुरू किया, उसके काम को अवनि से बेहतर बताना शुरू किया और धीरे-धीरे उसके करीब आने लगी।

उसी दौरान अवनि के माता-पिता, जो इंदौर में रहते थे, अचानक एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। अवनि अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसने तुरंत ऑफिस से लंबा अवकाश लिया और माता-पिता की सेवा के लिए इंदौर चली गई। यह समय अवनि के लिए अत्यंत कष्टकारी था। एक तरफ उसके माता-पिता की गिरती तबीयत थी और दूसरी तरफ वह खुद गर्भवती थी। अवनि की गैरमौजूदगी ने रोहिणी के लिए रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया। रोहिणी ने अमित को अकेला पाकर उसके घर आना-जाना बढ़ा दिया। वह अमित की ऐसी हमदर्द बनी मानो दुनिया में उससे बढ़कर उसका कोई शुभचिंतक न हो। अमित भी धीरे-धीरे रोहिणी के बिछाए मोहजाल में उलझता चला गया और अपनी गर्भवती पत्नी के संघर्ष को भूलने लगा।

कुछ ही महीनों के भीतर अवनि के माता-पिता का साया उसके सिर से हमेशा के लिए उठ गया। इस गहरे आघात ने अवनि को भीतर तक तोड़ दिया। माता-पिता ने अपनी सारी पुश्तैनी जायदाद, पुश्तैनी बंगला और बड़ी बैंक एफडी इकलौती बेटी अवनि के नाम कर दी थी। जब रोहिणी को पता चला कि अवनि करोड़ों की संपत्ति की मालकिन बन चुकी है, तो उसकी लालच की भूख और बढ़ गई। उसने अमित के कान भरने शुरू कर दिए कि अवनि अब उस पर हुक्म चलाएगी, अवनि को अपने पैसों का घमंड है और वह अमित को कभी अपने बराबर का दर्जा नहीं देगी। रोहिणी ने अमित को भड़काया कि अगर वे दोनों मिलकर एक नई आर्किटेक्चरल कंपनी खोल लें, तो वे दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत बड़े फंड की जरूरत होगी।

रोहिणी ने एक बेहद खौफनाक साजिश रची। उसने अमित को विश्वास दिलाया कि वह अवनि की संपत्ति पर नियंत्रण पा ले ताकि वे दोनों एक नया जीवन शुरू कर सकें। अवनि उस समय डिप्रेशन, अस्वस्थता और गर्भावस्था के नाजुक दौर से गुजर रही थी। एक रात अमित ने रोहिणी के कहे अनुसार अवनि के हर्बल काढ़े में हल्की नींद की दवा मिला दी। अचेतन और अर्ध-मूर्छित अवस्था में अवनि से यह कहकर कई कागजातों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए कि ये माता-पिता की संपत्ति के कानूनी हस्तांतरण और बैंक की सामान्य औपचारिकताएं हैं। अवनि ने अपने जीवनसाथी पर आंख मूंदकर भरोसा किया और दस्तखत कर दिए।

लेकिन बुराई का अंत कभी सुखद नहीं होता। रोहिणी केवल अवनि को नहीं, बल्कि अमित को भी लूटने आई थी। जैसे ही संपत्ति अमित की पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए एक संयुक्त ट्रस्ट में आई, रोहिणी ने अमित की अंधभक्ति का फायदा उठाया। एक पार्टी के दौरान नशे की हालत में उसने अमित से भी उन सभी संपत्तियों को अपनी निजी शेल कंपनी के नाम ट्रांसफर करने के अंतिम पेपर्स पर साइन करवा लिए। अगली ही सुबह, रोहिणी करोड़ों की चल-अचल संपत्ति को समेटकर, बैंक खाते खाली कर विदेश फरार हो गई।

जब अवनि को इस काले सच का पता चला, तो उसका पूरा अस्तित्व बिखर गया। वह इस बात से नहीं टूटी कि उसकी संपत्ति चली गई, बल्कि इस बात से टूट गई कि जिस इंसान को उसने अपना जीवन, अपना तन-मन सौंपा था, उसी ने अपनी अजन्मी संतान और अपनी बीमार पत्नी की पीठ में छुरा घोंपा था। अवनि ने बिना एक आंसू बहाए, आत्मसम्मान का दामन थामा और अमित को तुरंत तलाक देकर उसकी जिंदगी से हमेशा के लिए बेदखल कर दिया। कोर्ट की सीढ़ियों पर खड़े होकर अवनि ने अमित से कहा था कि धोखा देकर पाई गई दौलत कभी सुख नहीं देती और जिस दिन तुम्हें अपनी गलती का अहसास होगा, उस दिन तुम्हारे पास आंसू पोंछने के लिए खुद का साया भी नहीं होगा।

रोहिणी के भाग जाने और अवनि के चले जाने के बाद अमित सड़क पर आ गया। जब पुलिस और कानूनी जांच शुरू हुई, तो अमित को अहसास हुआ कि उसने अपनी हवस और लालच के चक्कर में क्या अनमोल खो दिया था। उसकी नौकरी चली गई, समाज में मुंह दिखाने लायक इज्जत नहीं बची और सबसे बढ़कर उसने उस निश्छल प्यार को खो दिया जो अवनि उससे करती थी। जब कुछ महीनों बाद उसे खबर मिली कि अवनि ने एक बेहद प्यारी बेटी को जन्म दिया है, तो वह अस्पताल के बाहर घंटों रोता रहा, लेकिन उसके अंदर अवनि के सामने जाने की हिम्मत नहीं थी। उसने शहर छोड़ दिया और एक छोटे से कस्बे में मामूली ड्राफ्ट्समैन का काम करते हुए प्रायश्चित की आग में जलने लगा। वह हर दिन अपनी इस गलती के लिए ईश्वर से माफी मांगता था।

“अवनि! अवनि! होश में आ, तू कहां खोई है?” अवनि की सबसे करीबी सहेली तान्या ने उसके कंधे को झकझोरते हुए कहा। तान्या हांपती हुई अस्पताल पहुंची थी।

अवनि ने शून्य में ताकते हुए कहा, “तान्या, मैंने अमित को फोन किया था… मैं उसी का इंतजार कर रही हूं।”

तान्या का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, “तू पागल हो गई है क्या अवनि? तू उस धोखेबाज, मतलबी और गिरे हुए इंसान से उम्मीद लगा रही है? जिसने तुझे उस वक्त छोड़ दिया जब तू मां बनने वाली थी, जिसने तेरे मां-बाप की अमानत छीन ली! तुझे क्या लगता है, वो पत्थर दिल इंसान अपनी ऐय्याशी छोड़कर यहां अपनी बेटी के लिए आएगा? उसे तो यह भी नहीं पता होगा कि बाप का फर्ज क्या होता है!”

अवनि ने अपनी भीगी आंखों से तान्या की तरफ देखा और बेहद शांत मगर दृढ़ आवाज में कहा, “तान्या, गलतियां इंसान से होती हैं, पर खून का रिश्ता कभी झूठा नहीं होता। अगर उसके दिल में इंसानियत का एक कतरा भी बचा होगा, तो वो जरूर आएगा। और अगर वो शैतान भी बन चुका होगा, तो भी अपनी औलाद को बचाने एक परिंदा भी अपनी जान दांव पर लगा देता है। मुझे अपने यकीन पर भरोसा है।”

तभी आईसीयू का दरवाजा खुला और हेड नर्स तेजी से बाहर आई। नर्स ने पूछा, “श्रीमती अवनि कौन हैं?”

अवनि हड़बड़ाकर खड़ी हुई, “जी, मैं हूं! क्या हुआ सिस्टर? मेरी बच्ची ठीक है ना?”

नर्स के चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान थी, “घबराइए मत, एक चमत्कार हो गया है। बच्ची के लिए दुर्लभ ब्लड ग्रुप का डोनर मिल गया है। एक सज्जन बिल्कुल सही समय पर पहुंचे हैं, उनका ब्लड पूरी तरह मैच कर गया है और वे इस वक्त अंदर बच्ची को ब्लड डोनेट कर रहे हैं। आपकी बेटी अब खतरे से बाहर है।”

अवनि और तान्या अवाक रह गईं। दोनों कदमों को संभालते हुए धीरे-धीरे आईसीयू के बड़े कांच वाले पार्टीशन के पास पहुंचीं। कांच के उस पार का दृश्य देखकर अवनि के पैरों की शक्ति मानो खत्म हो गई और आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला।

एक बेड पर नन्ही पीहू अचेत पड़ी थी, जिसके चेहरे पर धीरे-धीरे जीवन की लालिमा लौट रही थी। और ठीक उसके बगल वाले बेड पर लेटा था अमित। उसका शरीर थका हुआ था, कपड़े धूल से सने थे, मानो वह सैकड़ों मील का सफर तय करके बिना रुके सीधे यहां पहुंचा हो। उसकी बांह से लाल खून की नली सीधे पीहू की ओर जा रही थी। अमित की आंखें अपनी बेटी के नन्हे चेहरे पर टिकी थीं और उसके गालों पर पश्चाताप के आंसू लगातार बह रहे थे। जैसे ही अमित की नजर कांच के बाहर खड़ी अवनि पर पड़ी, उसने अपनी नजरें शर्म और कृतज्ञता से नीचे झुका लीं और हाथ जोड़ दिए। उन जुड़े हुए हाथों में कोई सफाई नहीं थी, सिर्फ एक गहरा प्रायश्चित और माफी की भीख थी।

तान्या ने अवनि के कंधे पर हाथ रखा और रुंधे गले से कहा, “अवनि, तू सच कहती थी… पश्चाताप की आग सबसे बड़े पापी को भी पवित्र कर देती है। आज एक पिता ने सचमुच अपनी बच्ची को नया जीवन दे दिया।”

कुछ घंटों बाद पीहू को होश आ गया। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। अमित चुपचाप वार्ड से निकलकर अस्पताल के गलियारे में एक कोने में खड़ा था। अवनि धीरे-धीरे चलकर उसके पास पहुंची। दोनों के बीच कई सालों की खामोशी एक पल में पिघल गई।

अमित ने नजरें उठाए बिना कांपती आवाज में कहा, “अवनि, मैं जानता हूं कि मेरे गुनाह इतने बड़े हैं कि इस जन्म में उनकी कोई माफी नहीं हो सकती। मैंने तुम्हें जो दर्द दिया, उसका बोझ मैं हर रोज अपने सीने पर लेकर जीता हूं। आज जब तुम्हारा फोन आया, तो मुझे लगा कि भगवान ने मुझे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा कर्ज चुकाने का मौका दिया है। मैं तुमसे तुम्हारा हक या अपनी बेटी पर कोई अधिकार मांगने नहीं आया हूं। मैं बस यह देखना चाहता था कि मेरी बच्ची सलामत रहे। अब मैं हमेशा के लिए जा रहा हूं…”

अमित मुड़ने ही वाला था कि अवनि ने धीमे स्वर में कहा, “अमित… रुकिए।”

अमित ठिठक गया। अवनि ने गहरी सांस ली और कहा, “जो बीत गया, वो एक भयानक अंधेरा था जिसे न तुम बदल सकते हो और न मैं भूल सकती हूं। उस धोखे ने मुझे तोड़ दिया था, लेकिन आज तुमने अपनी नन्ही बेटी को नई जिंदगी देकर यह साबित कर दिया कि तुम्हारे भीतर का इंसान पूरी तरह मरा नहीं था। नफरत को ढोते-ढोते मैं भी थक चुकी थी। मैं तुम्हें तुम्हारे अतीत के लिए माफ नहीं कर सकती, लेकिन आज जो तुमने पीहू के लिए किया, उसके लिए मैं जिंदगी भर तुम्हारी आभारी रहूंगी।”

अवनि ने आगे बढ़कर कहा, “पीहू जब बड़ी होगी, तो मैं उसे यह नहीं बताऊंगी कि उसके पिता ने क्या गलत किया था, बल्कि यह बताऊंगी कि जब उसकी सांसें उखड़ रही थीं, तब उसके पिता ने ही अपना खून देकर उसकी जान बचाई थी। अगर तुम सचमुच बदल चुके हो, तो तुम्हें अपनी बेटी से मिलने के लिए किसी पर्दे के पीछे छिपने की जरूरत नहीं है। तुम एक अच्छे पति नहीं बन सके, लेकिन अगर चाहो, तो एक जिम्मेदार पिता बनने की कोशिश जरूर कर सकते हो।”

अमित के घुटने टिक गए और वह अवनि के सामने बच्चों की तरह फफक-फफक कर रो पड़ा। सालों का बोझ, ग्लानि और आत्म-घृणा उसके आंसुओं के साथ बह गई। रिश्तों की टूटी हुई इमारत भले ही पहले जैसी न बन सके, लेकिन इंसानियत, पश्चाताप और क्षमा ने एक नई और सकारात्मक शुरुआत की नींव रख दी थी। जीवन में नफरत का अंत हमेशा प्यार और समझदारी से ही संभव होता है।

क्या गलतियों का पश्चाताप करने वाले इंसान को जिंदगी में दूसरा मौका मिलना चाहिए? क्या एक बच्चे की खातिर अतीत की कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ना सही फैसला है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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