दहलीज़ के दो तराज़ू

 वंदना ने आलोक की ओर मुड़कर कहा, “और आलोक, आप? आप दिन-रात मेहनत करके बैंक में अपनी जान खपाते हैं। घर का हर खर्चा, माताजी-पिताजी की हर दवाई का बिल आप भरते हैं। लेकिन इस घर में आपकी कोई कद्र नहीं है। कद्र सिर्फ दामाद जी की है क्योंकि वे कभी-कभार आकर मुस्कुरा देते हैं। … Read more

मान की डोरी

सुनैना वहीं चौखट के पास पत्थर की मूरत बनी खड़ी थी। उसके पैरों तले से जैसे पूरी कायनात खिसक चुकी थी। उसके दिमाग में वे सारे मंज़र बिजली की तरह कौंधने लगे—जब उसने सुमित्रा जी के हाथ से पानी का लोटा झटक दिया था क्योंकि उनके हाथ कांपते थे; जब उसने उन्हें डांटा था कि … Read more

मैली चादर की सुनहरी सिलाई

 शादी के ठीक तीन दिन बाद, जब सुनैना पहली बार अपने पति अनिरुद्ध के साथ उस घर की दहलीज पर पहुंची, तो उसके मन में एक आधुनिक, सजावटी संसार की कल्पना तैर रही थी। वह इंदौर के एक खाते-पीते और आधुनिक सोच वाले परिवार में पली-बढ़ी थी। उसे चमक-दमक, करीने से सजी अलमारियां और हर … Read more

गुप्त दायित्व की छांव

 सुधा नाम की उस महिला की आँखों से आँसू छलक पड़े। वह हाथ जोड़कर बोलीं, “दीदी, अगर आप हर महीने अपनी पेंशन का एक-एक पैसा यहाँ न भेजतीं, तो पिछले साल ही यह केंद्र बंद हो गया होता। मास्टर जी (मेरे ससुर जी) ने अपने रिटायरमेंट के पैसे से यह जमीन इस उम्मीद के साथ … Read more

 ममता की छांव

पापा! मम्मी! देखो हम सब आ गए! सबसे आगे पल्लवी, वैशाली, तन्वी, हिमानी और चारु जैसी वे बेटियां थीं, जिनका कन्यादान मनसुख भाई ने पहले किया था। उनके चेहरों पर मायके आने की वही रौनक और खिलखिलाहट थी, जो किसी भी लाडली बेटी के चेहरे पर होती है। उनके पीछे उनके पति यानी मनसुख भाई … Read more

बाबुल की छांव और सौ खुशियां

सूरत के तापी नदी के किनारे बने एक भव्य रिसॉर्ट में सुबह से ही चहल-पहल अपने चरम पर थी। चारों तरफ पीले गेंदे और सफेद चमेली के ताजे फूलों की महक फैली हुई थी। मंडप के बीचों-बीच लगे विशाल शामियाने में लगभग इक्यावन छोटे-छोटे वेदी कुंड सजाए जा रहे थे। हर वेदी के सामने पीतल … Read more

रिश्तों की धूप-छांव

 उसी शाम मायके से बड़े चचेरे भाई का फोन मालती के मोबाइल पर घनघनाने लगा। मालती ने जैसे ही ‘हैलो’ कहा, दूसरी तरफ से तीखी आवाज़ गूंजी, “मालती, तुम्हारी यह हिम्मत? मेरा बेटा पहली बार तुम्हारे दरवाजे पर कोई उम्मीद लेकर गया था और तुमने उसे खाली हाथ लौटा दिया? शहर जाकर इतनी मगरूर हो … Read more

अधूरे वादों की चौखट

नंदिनी एकदम चौंक गई। उसने फौरन झुककर अपनी सास के हाथ पकड़े और उन्हें उठाया, “मम्मी जी, यह आप क्या कर रही हैं? आप मेरी माँ के समान हैं, मुझसे बड़ी हैं। इस तरह हाथ जोड़कर मुझे पाप का भागी मत बनाइए। लेकिन… आज मैं आपसे एक सवाल जरूर पूछना चाहती हूँ।” नंदिनी की आवाज … Read more

टूटी चूड़ियाँ, नई उड़ान

अदालत में जब मयंक के वकील ने नैना के चरित्र पर कीचड़ उछालने की कोशिश की, तो नैना विचलित नहीं हुई। उसने अपने मेडिकल रिपोर्ट्स और मयंक की सच्चाई के पुख्ता सबूत जज के सामने रखे। नैना की निडरता और सच्चाई के आगे मयंक के झूठ टिक नहीं सके। अदालत ने न केवल नैना के … Read more

स्वाभिमान की दहलीज

 पति की यह प्रतिक्रिया अनघा के सीने में तीर की तरह चुभी। वह समझ गई कि पुरुष प्रधान व्यवस्था में अंधभक्ति की पट्टी इतनी मोटी होती है कि अपनों का दर्द भी दिखाई नहीं देता। अब वह बिल्कुल अकेली थी। एक तरफ उसका अपना स्वाभिमान था और दूसरी तरफ वह परिवार था जो एक पाखंडी … Read more

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