दहलीज़ के दो तराज़ू
वंदना ने आलोक की ओर मुड़कर कहा, “और आलोक, आप? आप दिन-रात मेहनत करके बैंक में अपनी जान खपाते हैं। घर का हर खर्चा, माताजी-पिताजी की हर दवाई का बिल आप भरते हैं। लेकिन इस घर में आपकी कोई कद्र नहीं है। कद्र सिर्फ दामाद जी की है क्योंकि वे कभी-कभार आकर मुस्कुरा देते हैं। … Read more