राख के नीचे सुलगती उम्मीद

 दो साल का लंबा, तपस्या भरा वक्त बीत गया। अदालत ने निमेश के अच्छे आचरण, अनुराधा द्वारा भरे गए जुर्माने और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उनकी रिहाई का आदेश दे दिया। जिस दिन निमेश जेल के भारी लोहे के दरवाज़े से बाहर निकले, बाहर कोई लग्ज़री गाड़ी नहीं खड़ी थी। बाहर खड़ी थी अनुराधा—सूती साड़ी … Read more

मीठी चाशनी में घुला छलावा

नीलिमा स्तब्ध रह गई। जिस कठपुतली को वह उंगलियों पर नचाती थी, उसने पहली बार खुलकर इनकार कर दिया था। नीलिमा ने तुरंत अपना पैंतरा बदला और आंखों में आंसू लाकर बोली, “अंजलि, तुम मुझसे ऐसे बात कर रही हो? मैंने तो तुम्हें अपनी सगी बहन समझा था। क्या यही सिला है मेरे प्यार का?” … Read more

संस्कारों का इम्तिहान

“यही तमीज़ सिखाई थी हमने तुम्हें विश्वनाथ? घर की चौखट पर तुम्हारी दोनों विवाहित बहनें भूखी-प्यासी बैठी रहीं और तुम ससुराल के हुक्म बजाने में मशगूल रहे! और तुम बहू, क्या तुम्हारे मायके में यही सीख मिली थी कि ससुराल आते ही बेटे को उसके अपने ख़ून से ही बेगाना कर दो?” बैठक का सन्नाटा … Read more

दूध वाली चाय – श्वेता अग्रवाल

ऑफिस से लौटते ही नियति ने घर का लॉक खोला और सीधे किचन की ओर बढ़ गई। फ्रिज खोलकर दूध का भगौना निकाला और एक बड़ा कप दूध भरकर चाय के बर्तन में डाल दिया। फिर छटांक भर पानी, चीनी, कुटी हुई इलायची और अदरक डालकर चाय को खौलाने लगी। देखते ही देखते दूध वाली … Read more

आखिर कब तक चुप रहोगे – मंजू ओमर

फोन की घंटी बजी इंदु जी ने फोन उठाया हेलो बेटी सौम्या, मां कैसी हो क्या हो रहा है खाना-वाना खा लिया कि नहीं।अभी नहीं बेटा तेरे भैया भाभी और चिंटू बाहर खाना खाने गए हैं ।। और आप लोग का खाना, बेटा वह भाभी आती है तो देखती हूँ कि  क्या बनाती है माँ … Read more

आत्मसम्मान – बीना शुक्ला अवस्थी

आज बरखा ने स्वयं अपनी नौकरी छोड़ दी।‌ पति की मृत्यु के बाद उसके सामने दो साल की पाखी और बूढ़े सास ससुर की देखकर और जीवन यापन की समस्या अचानक आकर खड़ी हो गई।  जतिन  कानपुर में सुरक्षा कर्मी की नौकरी करता था, जहॉ उसे रहने और खाने के साथ पन्द्रह हजार रुपए मिलते … Read more

सुकून की दो रोटी – डॉ बीना कुण्डलिया  

अरे ओ वैशाली , वैशाली रे वैशाली कहां मर गई रे जुबान में ताला लगा लिया क्या ?  तुझसे कितनी बार बोला जब मैं घर आऊं तो सज-संवर कर दरवाजे पर मेरा इंतजार करती मिला कर ।  वैशाली ने शराबी पति की आवाज सुनकर हड़बड़ा कर प्रैस जो वो सुबह स्कूल जाने के लिए बच्चों … Read more

राख में दबी उम्मीद

अस्पताल से घर आते ही उसने देवांग के कमरे में तूफान खड़ा कर दिया। बेड पर लाचार पड़े देवांग पर चीखते हुए वह बोली, “तुमने मुझे धोखा दिया! तुम्हें पहले से पता था कि तुम मरने वाले हो, इसीलिए तुमने मुझसे शादी करके मेरी पूरी जवानी और मेरी जिंदगी तबाह कर दी! तुम सब धोखेबाज … Read more

रिश्तों की तिजोरी

  अलका सोफ़े पर बैठकर नए कंगन पहनकर देख रही थी और अपनी बड़ी बहू रुचिका को हिदायतें देती जा रही थी कि कौन सी साड़ी के साथ कौन सा हार जंचेगा। अगले हफ़्ते अलका के देवर हरीश की इकलौती बेटी नंदिनी का विवाह था। पूरा परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था, लेकिन अलका की … Read more

त्याग की चौखट

 रागिनी ने पल्लवी का हाथ अपने कांपते हाथों में थाम लिया। उनके आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। वह रुंधे गले से बोलीं, “पल्लवी… मुझे माफ कर दे मेरी बहना। मैंने तेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है। तूने बरसों तक मेरे बच्चों को अपने बच्चों की तरह पाला, बिना किसी … Read more

error: Content is protected !!