खोया हुआ सम्मान – गरिमा चौधरी
“अम्मा, क्या बात है? आज फिर आप यहाँ सीढ़ियों पर बैठी हैं? धूप कितनी तेज़ है, अंदर क्यों नहीं जातीं?” मैंने अपने घर का दरवाज़ा खोलते हुए सामने वाली सीढ़ियों पर बैठी शांति अम्मा से पूछा। शांति अम्मा ने अपने मैले हो चुके पल्लू से अपनी डबडबाई आँखें पोंछीं और एक सूखी, बेजान सी मुस्कान … Read more