उम्मीद का धागा

आरुषि के लिए जैसे वक्त ठहर सा गया था। कमरे में मद्धिम उजाला था और वह चुपचाप अपनी हथेलियों की लकीरों को घूरती हुई बैठी थी। तभी दरवाजे की कुंडी झटके से बजी और उसकी बचपन की सहेली नैना बिना किसी औपचारिक इजाजत के भीतर दाखिल हो गई। उसके चेहरे पर रोज की तरह वही … Read more

फ़र्ज़ का सिंदूर

राघव के इस पवित्र और निष्कलंक त्याग को देखकर वहां खड़े हर एक शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। समर के पिता समान ताऊ जी आगे बढ़े और उन्होंने राघव को सीने से लगा लिया। रिश्तेदारों ने एक सुर में इस रिश्ते को अपनी मूक सहमति और आशीर्वाद दिया। इसके बाद पूरे राजकीय … Read more

उजालों की वापसी

“मुझे माफ कर दीजिए…” रागिनी की आवाज आंसुओं में डूब गई। उसने विवेक की ओर देखा, “मैं भटक गई थी। मैंने सिर्फ अपने सुख को देखा, उस ममता को नहीं जो ईश्वर ने मुझे बिना मांगे एक झोली में भरकर दी थी। मैं भूल गई थी कि मां बनने का सुख दुनिया के किसी भी … Read more

रेत का महल

 मोहिनी की आँखों में अब आँसू नहीं थे, बल्कि एक ऐसी तीखी ज्वाला थी जो किसी भी पाखंडी को जलाकर भस्म कर सकती थी। उसने अपने होंठों पर एक कड़वी मुस्कान लाई और बहुत ही शांत, पर बर्फ जैसी ठंडी आवाज में कहा, “हाँ कैप्टन मानवेंद्र, मैं ही हूँ। मैं तुम्हें जन्मदिन का सरप्राइज देने … Read more

क्योंकि मैं मर्द हूँ – अर्चना सिंह

मैं गोपाल ….! उम्र पैंसठ साल । बहुत जमाने बाद आज पूरे परिवार के लोग एक साथ मेरे घर में इकट्ठा हुए हैं । कारण ये कि आज मेरी धर्म पत्नी मनोरमा जी का स्वर्गवास हो गया है , क्रिया कर्म से लौटने के बाद कुछ रस्मों रिवाज कराए गए और फिर खाकर सोने की … Read more

 ससुराल की लाज

 शकुंतला बुआ ने जैसे ही गौरी को देखा, वे पान चबाते हुए मुस्कुराईं और बोलीं, “अरे आ गई बहू! तेरा भाई तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला रे! पहले खुद खाली हाथ सा आकर हम सबकी परीक्षा ले गया और पीछे से जौहरी की दुकान के मुनीम और नौकरों के हाथ ये सारा सामान भिजवा दिया। … Read more

उपेक्षा का दंश 

 रोहन से अब और नहीं रहा गया। उसने आगे बढ़कर अपने सिर को अपने बूढ़े पिता के सीने से लगा दिया और फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने रोते हुए कहा, “नहीं बाबूजी, ऐसा मत कहिए! मुझसे मेरी गलतियाँ भूल जाइए, बस आप ठीक हो जाइए। माँ तो चली गई, अब अगर आपको भी कुछ हो … Read more

मायके का मोह – मधु वशिष्ठ

मम्मी आप नया नौकर क्यों नहीं रखती हो? ” प्रिया बोली”।  बेटा ,मैंने साथ वाली आंटी को बोला तो है, थोड़ा ठीक हो जाऊं ,तो बाहर बैठकर कोई काम वाली ही ढूंढ लूंगी। सिर दर्द से फटा जा रहा है ,जरा थोड़ी अदरक वाली चाय तो बना देना । सवेरे से काम कर कर के … Read more

मायके का मोह -खुशी 

रीमा एक शिक्षित, सुंदर और संस्कारी महिला थी। उसकी शादी अमित से हुई थी, जो एक निजी कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत था। अमित का परिवार छोटा और सुखी था। घर में उसके सास-ससुर, पति और दो बच्चे थे। सास-ससुर रीमा को अपनी बेटी की तरह प्यार करते थे और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत … Read more

रिश्तों की छांव

 न्वी के माता-पिता को इस पूरी घटना का पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे अपनी बेटी के पास दौड़े चले आए। अपनी नासमझी और बच्चों को वक्त न दे पाने के अपराध-बोध से उनका सिर शर्म से झुक गया था। बृजमोहन जी और उषा जी ने न केवल तन्वी को संभाला, … Read more

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