सिंदूरी भोर की दस्तक
“मेरी बच्ची… मेरी लाडो,” देवकी जी ने अंजलि की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा, “आज मेरी आँखें धन्य हो गईं। आज मुझे लगा कि मेरा निशांत जहाँ भी होगा, स्वर्ग से हम पर फूलों की बारिश कर रहा होगा। मेरे घर की बहार लौट आई।” तभी पीछे खड़ा रोहन दोनों हाथों में मिठाइयों और … Read more