एहसास का आईना
कौशल्या देवी की आंखों से पछतावे के आंसू बह निकले। वे वहीं जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। “मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई दीनानाथ जी। सच में, मैं अपनी सत्ता और अधिकार के नशे में इतनी अंधी हो गई थी कि मैंने यह सोचने की कोशिश ही नहीं की कि श्रुति के माता-पिता … Read more