हम फिर मिलेंगे कभी – वीणा राज
ठंड के मौसम में चाय की भाप मन को आत्मिक तुष्टि का एहसास करा रही थी. जगजीत सिंह की ग़ज़ल, कप से उठता भाप और पेड़ों से छनकर आती धूप ने बालकनी में बैठी तृषा को स्वर्गिक आनन्द दे रखा था . साथ में मूंगफली के गुलाबी दानों को एक एक कर मुंह में डालती … Read more