मुझे माफ़ कर दो 

राघव और काव्या की सगाई हुए अभी मुश्किल से तीन महीने ही बीते थे। यह वह समय था जब दो अजनबी एक-दूसरे की आदतों, पसंद और नापसंद को समझने की कोशिश कर रहे थे। दोनों परिवारों की रजामंदी से यह रिश्ता तय हुआ था, इसलिए शुरू से ही उन दोनों को मिलने-जुलने की पूरी आज़ादी … Read more

तस्वीर

रघुनाथ जी एक सप्ताह के बाद अपने छोटे भाई के घर से तीर्थयात्रा पूरी करके वापस लौटे थे। शहर के सबसे पॉश इलाके में बना उनका यह आलीशान दो मंजिला घर, उनकी ज़िंदगी भर की खून-पसीने की कमाई का जीता-जागता सबूत था। हाल ही में उनके बेटे मोहित और बहू शिखा ने घर के निचले … Read more

 समझ की उम्र

रसोई से आती बर्तनों की खटपट के बीच मीरा की दबी हुई सिसकियाँ भी जैसे उस घर की दीवारों का हिस्सा बन चुकी थीं। मीरा, जो पिछले आठ सालों से इस घर की बहू थी, आज भी खुद को एक अजनबी ही महसूस करती थी। उसका पति, विकास, शहर के एक बड़े दफ़्तर में काम … Read more

अच्छी शादी

मीरा ने अपनी एमबीए की डिग्री में पूरे कॉलेज में टॉप किया था। उसके आँखों में भविष्य को लेकर हज़ारों सपने तैर रहे थे। वह अक्सर अपने कमरे में बैठकर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस, अपनी केबिन और अपनी पहली सैलरी से माता-पिता के लिए खरीदे जाने वाले तोहफों की कल्पना किया करती थी। उसने कई मल्टीनेशनल … Read more

 कुछ रिश्ते दुनिया की हर दौलत से बढ़कर होते हैं

सुरेश का गला रुंध गया, उसके अंदर का बड़ा भाई चीख-चीख कर रोना चाहता था, लेकिन उसने अपने जज्बातों को चेहरे पर नहीं आने दिया। वह जानता था कि राघव बहुत खुद्दार है। अगर सुरेश ने पैसे दान या मदद के नाम पर दिए, तो राघव शायद अपनी जान दे देगा लेकिन पैसे नहीं लेगा। … Read more

परिवार का साथ

“हम तो कहीं के नहीं रहे सुजाता! अब क्या होगा हमारा? कैसे जिएंगे हम? ये सफेद लिफाफा मेरी पच्चीस साल की वफादारी का इनाम है… उन्होंने कंपनी से निकाल दिया मुझे!” आनंद जी की आवाज़ गले में ही घुट कर रह गई। उनके आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। “अब कहाँ जाएंगे … Read more

रिश्ते पैसों से नहीं संस्कार से चलते हैं

रघुनाथ जी और गीता जी के घर में इन दिनों उल्लास और चिंता का मिला-जुला माहौल था। उनकी इकलौती और लाड़ली बेटी मीरा की शादी शहर के एक बहुत बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार में तय हुई थी। लड़के का नाम आकाश था, जो अपने पिता महेंद्र जी का कारोबार संभालता था। महेंद्र जी और … Read more

वो अनकही लकीर

उनके गालों पर एक आँसू लुढ़क आया था। यह आँसू इस बात का नहीं था कि उन्हें खाने के लिए फल नहीं मिले। दर्द की चुभन उन फलों की कमी की नहीं थी। पीड़ा तो इस बात की थी कि वह घर, जिसे उन्होंने अपनी जवानी के खून-पसीने से सींचा था, आज उसी घर में … Read more

संस्कार

शहर के एक शांत पार्क के कोने में बैठी अंजलि की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसके घर में आज सुबह ही एक बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा हुआ था। अंजलि के बड़े भाई और घर की बागडोर सँभालने वाली उसकी बड़ी भाभी ने उसका रिश्ता किसी और रसूखदार परिवार में … Read more

 मूहूर्त 

यह सुनते ही पूरे घर में सन्नाटा छा गया। जो मेहमान कुछ देर पहले तक ताने मार रहे थे, उनकी आँखें शर्म से झुक गईं। सुशीला देवी का सारा गुस्सा, सारा घमंड जैसे किसी बर्फ की तरह पिघल गया। उनके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई कि वह किन महान लोगों को बुरा-भला कह रही … Read more

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