बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – कृतिका भण्डारी

शाम के धुंधलके में बारिश की हल्की फुहारें शहर की सड़कों को भिगो रही थीं। ऑफिस की दसवीं मंजिल पर स्थित केबिन में खामोशी छाई हुई थी। यह खामोशी किसी उदासी की नहीं, बल्कि एक लंबे और सफल सफर के खत्म होने की थी। श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। … Read more

जब स्वाभिमान ने तोड़ी अपमान की बेड़ियां – निधि सहाय

अवनि आज बहुत देर तक आईने के सामने खड़ी रही। कांच में उभरने वाला अक्स उसे अपना सा नहीं लग रहा था। यह वह अवनि तो बिल्कुल नहीं थी जो पांच साल पहले इस घर में दुल्हन बनकर आई थी। तब वह छरहरी थी, उसके चेहरे पर एक अलग सा नूर था और उसके पति … Read more

**एक अधूरी तस्वीर: दर्द और प्यार का सफर** – मीरा महेश

काव्या ने अपनी माँ, नंदिनी को सिर्फ दीवारों पर टंगी उन बेजान तस्वीरों में ही देखा था। उन तस्वीरों में नंदिनी की आँखें इतनी जीवंत लगती थीं, मानो वो अभी तस्वीर से बाहर आकर काव्या को गले लगा लेंगी। काव्या के लिए उसकी माँ किसी परीकथा की उस रानी जैसी थी, जिसके किस्से उसने अपनी … Read more

एक ज़िद्दी इश्क – नमिता पंडित

 सुहानी अभी कुछ समझ पाती, उससे पहले ही एक सफेद रंग की एसयूवी आकर ठीक उसके सामने रुकी। गाड़ी का दरवाज़ा खुला और इससे पहले कि सुहानी कोई प्रतिक्रिया दे पाती, शौर्य ने उसका हाथ पकड़ा और उसे गाड़ी में बैठने का इशारा किया। उसकी आँखों में एक अजीब सी जल्दबाज़ी और एक ऐसा अधिकार … Read more

अप्रैल फूल – एम. पी. सिंह

हमारी कॉलोनी मैं शीतल कुमार नाम का एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता है. उसके नाम के जैसा ही उसका चरित्र था. खाना बनाना, कपड़े धोना, हर आने जाने वाली औरतो से बातें करना. सारी कॉलोनी की खबर रखना उसकी हॉबी थीं. इसके अलावा आते जाते लोगों से मजाख भी करता था, कई बार … Read more

प्रायश्चित – उषा भारद्वाज

   घर में शादी का माहौल था। रिया कुछ घंटे पहले ही दिल्ली से आई है। साथ में उसका 5 साल का बेटा मंटू भी है। अक्षांश रिया के पति को समय न मिल पाने के कारण वह नहीं आ सके। उनका मन तो बहुत था छोटी साली की शादी में सम्मिलित होने का, मगर नहीं … Read more

खुद से मुलाकात – उषा भारद्वाज

कितनी अजीब बात है ना… तुम जब दूर हो रहे थे, तब हम घबरा रहे थे। सब कुछ खाली-खाली सा लग रहा था। कितनी अजीब बात है ना… घर में सब थे, मगर हम अकेले हो रहे थे। कितनी अजीब बात है ना… दिल में डर, चिंता, थोड़ा-थोड़ा गुस्सा भी भर रहा था, मगर तुमसे … Read more

कर्ज – एम. पी. सिंह

रामू की चाय की टपरी कॉलेज के बाहर ही थीं. सामने एक स्कूल भी था. रामू के गुजर जाने के बाद उसकी पत्नि कान्ता ने उस चाय की टपरी क़ो संभाल लिया. कान्ता की बेटी कुन्ती बहुत छोटी थीं और उसकी जिम्मेदारियाँ बड़ी. हर रोज़ की तरह कान्ता टपरी पर चाय भजिया बनाने में व्यस्त … Read more

सच्चा प्यार – एम. पी. सिंह

अशोक ओर अलका कॉलेज से ही एक दूसरे क़ो चाहने लगे थे. पहले दोस्त हुआ करते थे, फिर प्रेमी और अब साथ जीने मरने क़ी कसमें खाने लगे. पढ़ाई पूरी होते ही अशोक क़ो नौकरी मिल गई. दोनों ने अपने अपने पेरेंट्स से अपनी अपनी पसंद बता दी. थोड़ी ना नुकुर के बाद, अलका के … Read more

यह कलंक कभी ना मिटेगा – संजय सिंह

 रुद्र के माता-पिता ने बड़े शोक के साथ उसे पढ़ाया लिखाया । इस काबिल बनाया कि वह इस समाज में अपना तथा उनका नाम रोशन करें। तकदीर ने साथ दिया और रुद्र अब एक अध्यापक बन गया ।माता-पिता उसकी तरक्की से काफी खुश थे। जिंदगी आगे बढ़ रही थी ।रुद्र अपनी मेहनत से अपने अध्यापन … Read more

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