जड़ों की पुकार
सुमित्रा की बात सुनते ही मेरे मन का सारा बोझ, सारा अपराधबोध जैसे आंसुओं के साथ बह गया। मैंने सुमित्रा की ओर देखा। एक स्त्री जब माँ बनती है तो त्याग की प्रतिमूर्ति होती है, और जब वह बहू बनती है तो बिखरते हुए रिश्तों को एक सूत्र में पिरोने वाली डोरी बन जाती है। … Read more