बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – कृतिका भण्डारी
शाम के धुंधलके में बारिश की हल्की फुहारें शहर की सड़कों को भिगो रही थीं। ऑफिस की दसवीं मंजिल पर स्थित केबिन में खामोशी छाई हुई थी। यह खामोशी किसी उदासी की नहीं, बल्कि एक लंबे और सफल सफर के खत्म होने की थी। श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। … Read more