सिंदूर की लाज – मीना सहाय

राघव ने तुरंत उठकर उसे अपने कंधों से पकड़ लिया। “नहीं मीरा, तुम में कोई कमी नहीं है। तुम मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी नेमत हो। लेकिन तुम खुद को देखो! तुम सुबह से लेकर रात तक इस घर की चक्की में पिसती रहती हो। माँ की हालत ऐसी नहीं है कि वो तुम्हारी कोई … Read more

समर्पण का आँगन – कविया गोयल

अंशुल ने विमला देवी की तरफ देखा कि शायद वो एक माँ होने के नाते इस दर्द को समझेंगी, लेकिन विमला देवी भी अपनी जेठानी के दबाव में चुप रहीं। अंशुल रोता हुआ, अपनी बहन की उजड़ती हुई दुनिया का बोझ सीने में लिए वहां से चला गया। एक बहुत ही शानदार और प्यार से … Read more

अजनबी सफ़र  : एक अनकहे रिश्ते की दास्तान – शशि चोपड़ा

 “मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ अपने अतीत को समेटने आई हो,” माधव ने बहुत ही कोमल स्वर में कहा। “लेकिन जब तुम वापस दिल्ली लौटो, और अगर तुम्हें लगे कि उस बड़े शहर की भीड़ में तुम्हें एक ऐसे दोस्त की ज़रूरत है जो तुम्हारे साथ सिर्फ एक कप चाय पीकर तुम्हारी खामोशी को … Read more

प्यार की उड़ान – यशोदा सिंह

 “श्रुति बेटा,” कौशल्या देवी ने बहुत ही गंभीर लेकिन ममता भरी आवाज़ में बोलना शुरू किया, “मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे बेटे ने अपने जीवनसाथी के रूप में तुम्हें चुना है। तुम बहुत प्यारी हो। लेकिन मुझे एक बात बताओ… इतनी रात गए तुम यहाँ मेरे बेटे के साथ हो, क्या तुम्हारे माता-पिता यह … Read more

औरत का दर्द – सुधा चौहान

 “चुप… एकदम चुप बेशरम!” शालिनी ने अपनी उंगली नीलू  के चेहरे की तरफ तानते हुए फुफकार कर कहा। “बोल तो ऐसे रही है जैसे वह तेरे मालिक न होकर तेरे बहुत अपने हो गए हों। अरे बदज़ात, तूने यह भी नहीं सोचा कि तू किस घर में सेंध मार रही है? पर तू भला क्यों … Read more

इश्क़ का नया सफर – दिव्या मिश्रा

 “मैं एक ऐसी लड़की का इंतज़ार कर रहा था, जिसने अपनी पूरी जवानी दूसरों के लिए कुर्बान कर दी। मैं इंतज़ार कर रहा था कि कब उसके कंधों से ज़िम्मेदारियों का बोझ कम हो, कब वो अपने परिवार के दायित्वों से मुक्त हो और कब मैं उससे कह सकूं कि अब उसे अकेले चलने की … Read more

कड़वे बोल – करुणा मलिक 

कमलेश, कुछ भी करके भाभी के मायके वालों से बातचीत करवा दे वरना घर बिगड़ जाएगा मेरे भाई का।  अब मैं कैसे बात करवा दूँ जब तेरी माँ ने बहू के साथ मारपीट करके घर से निकाला था तब इस बात का ख्याल नहीं आया था कि बेटे का घर बिगड़ जाएगा। उन्होंने तो बड़े … Read more

एक भटके हुए मन की वापसी – शारदा सक्सेना

 यह सुनकर कबीर आगबबूला हो गया। “तुम क्या बकवास कर रही हो?” “सच कह रही हूँ,” श्रुति ने अपनी बात जारी रखी। “तुम जिसे प्यार कहते हो, वो शायद तुम्हारी जिद थी। प्यार में इंसान आज़ाद करता है, कैद नहीं। और वैसे भी कबीर, अगर तुम खुश नहीं हो, तो किसी और की खुशी की … Read more

अंतर्मन की आहट – मोहिनी मिश्रा

  “नंदिनी, उस दिन तुमसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा था, और आज भी तुम्हारे पास बैठकर जो सुकून मिलता है, वो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सच कहूं तो सब कुछ है मेरे पास। एक बहुत अच्छा घर है, एक बेहतरीन करियर है, पैसा है, रुतबा है… बस वो एक दोस्त नहीं है, … Read more

एक खाली कोख – राजेन्दर सक्सेना

 “ये सज़ा नहीं है रोहन, ये मेरा चुनाव है,” काव्या ने रोते हुए उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा। “तुम्हें लगता है कि कोख से जन्म देने वाली ही माँ होती है? कबीर को जब चोट लगती है, तो दर्द मुझे यहाँ, मेरे सीने में होता है। जब वह मुझे ‘काव्या मम्मा’ कहता है, … Read more

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