बहू जिम्मेदारियाँ और अधिकार दोनों साथ-साथ चले तो ही अच्छा है – अर्चना खंडेलवाल
“अरे वाह, आज तो गली में बड़ी शांति है… न तो बरामदे से कोई ऊँची आवाज़, न बर्तन बजने की खटर-पटर!”लता मासी ने मोहल्ले की परिचित टोन में आवाज़ लगाते हुए चौखट पर पायल खनकाई। अंदर से किचन में रखे बर्तनों की हल्की खनक और गैस पर सीटी बजाती कुकर की आवाज़ आ रही थी।कैलाश … Read more