Moral Stories in Hindi
संतोष के आंसू – प्रियंका नाथ
“क्या कर रही हो तुम मीरा? पागल हो गई हो क्या?” कमरे में घुसते ही कमला जी की आवाज़ में एक तीखापन और गहरी हैरानी थी। उनकी नज़र बिस्तर पर रखे उस लाल मखमली डिब्बे पर थी, जिसमें मीरा का पुश्तैनी भारी सोने का हार और कंगन रखे हुए थे। साथ ही मेज पर बैंक … Read more
खुशियां बांटने से बढ़ती हैं – मोहिनी मिश्रा
दीवाली के त्योहार की सुबह थी। सूरज ने अभी तक अपनी किरणें नहीं बिखेरी थीं, लेकिन निर्मला जी की सुबह हमेशा की तरह अलार्म बजने से पहले ही हो चुकी थी। भोर के चार बज रहे थे। घर में गहरी शांति थी, सिर्फ रसोई से बर्तनों की हल्की खनक और बेसन भूनने की सोंधी महक … Read more
रिश्तों में अधिकार से ज्यादा प्रेम और भरोसे की ज़रूरत होती है? – मीना सहाय
रक्षाबंधन का त्यौहार नज़दीक था, इसलिए कुंती अपनी भतीजी की शादी की तारीख पक्की होने की खुशी में अपने मायके, यानी अपने भाई के घर आई हुई थी। यहाँ आए उसे तीन दिन हो चुके थे, लेकिन इन तीन दिनों में उसने इस घर में जो कुछ देखा, वह उसकी अपनी सोच और जीवनशैली से … Read more
बड़ी माँ – सविता गर्ग
“दीदी, आप हमेशा आईने के सामने इतनी देर लगाती हैं! मैं पिछले आधे घंटे से बाहर खड़ी आपका इंतज़ार कर रही हूँ, और आप हैं कि आपकी बिंदी ही सेट नहीं हो रही।” निहारिका ने अपने हाथों में पहनी कांच की चूड़ियों को खनकाते हुए अपनी बड़ी चचेरी बहन काव्या से शिकायत की। काव्या ने … Read more
दौड़ती जिंदगी और ठहरे हुए संस्कार… – संध्या त्रिपाठी
क्यों परेशान है मिसराइन जी….. संयुक्त का हाथ पकड़ते हुए मिश्रा जी ने पूछा… अरे कुछ नहीं मिश्रा जी… मैं तो बस ऐसे ही… कुछ कुछ सोचती रहती हूं ना … अच्छा बताइए आप अभी क्या सोच रही थीं …मुस्कुराते हुए मिश्रा जी ने कहा … आप हसेंगे… तो क्या हुआ …अच्छा तो है आप … Read more
बुढ़ापा तो सब पर आना है – नीलम गुप्ता
वह इस सोसाइटी में पिछले काफी वर्षों से रह रही हैं ।घर में कोई दूसरा नहीं है ,ना पति ना बच्चे बस एक नौकरानी है जो उनके सब काम करती है। 4 वर्ष पूर्व जब हम यहां रहने आए तो सबसे पहले हमारा परिचय उन्हीं से हुआ। वह छड़ी के सहारे धीरे-धीरे चलती हुई हमारे … Read more
छोटी बहन – नीलम गुप्ता
अनुपमा उर्फ़ अनु, मेरी छोटी बहन बहुत प्यारी है l मेरा हर कहा मानती है l अपने चार साल छोटी अनु पर मैं खूब रॉब चलाती हूँ – अनु एक गिलास पानी देना l अनु मेरे बेग में से हिन्दी की किताब निकाल कर ला l मेरे कपडे में अलमारी में रख दे ! वगैरह … Read more
मेंहदी अभियान – विभा गुप्ता
बचपन में गर्मी की छुट्टियाँ होते ही हम सब भाई-बहन नानी घर चले जाते थें।दोपहरी में घर के बड़े आराम करते और हम छोटे खूब उधम मचाते।ऐसे में एक दिन हमारी नानी ने हम बच्चों को बगीचे से मेंहदी के पत्ते तोड़ लाने का काम सौंप दिया। हम सभी ने बड़े उत्साह से अपने-अपने रुमाल … Read more
सुयोग्य बहू की तलाश – साधना वैष्णव
गौरव आज बहुत खुश है। खुश क्यों न हो उसे आज पहली तनख्वाह जो मिली है। वह खुशी-खुशी लगभग दौड़ता हुआ माँ के पास पहुँचा। उनको अपनी आँखें बंद करने कहा। माँ बोलीं- क्यों? मैं अभी संध्या आरती की तैयारी कर रही हूँ, मेरे पास तुम्हारे साथ खेलने के लिए समय नहीं है। गौरव ने … Read more