रक्त की रोटी और नियति का क्रूर खेल

चिंटू अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी मां की छाती से चिपका हुआ था। वह बार-बार अपना छोटा सा मुंह अपनी मां के स्तनों पर मार रहा था, इस उम्मीद में कि शायद उसकी क्षुधा शांत करने के लिए वहां से दूध की कोई बूंद छलक पड़े। लेकिन एक मां, जिसके अपने ही पेट में पिछले … Read more

भ्रम का आईना

नीता मेरी कॉलेज के दिनों की सबसे करीब सहेली थी। हम दोनों ने साथ में पढ़ाई की, साथ में सपने देखे थे, लेकिन शादी के बाद नीता की दुनिया पूरी तरह से बदल गई। उसकी शादी एक बहुत ही अच्छे परिवार में हुई थी। उसके पति, राघव, एक मल्टीनेशनल कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट थे और … Read more

रिश्तों का बाज़ार और एक बेटी का स्वाभिमान

रमाकांत जी भारी मन और झुके हुए कंधों के साथ घर लौटे। सुमित्रा ने जब उनका उतरा हुआ चेहरा देखा, तो वह तुरंत समझ गईं कि कुछ गड़बड़ है। रात के अंधेरे में दोनों पति-पत्नी अपने कमरे में बैठकर इस नई मुसीबत पर चर्चा करने लगे। “सुमित्रा, उन्होंने इतनी बड़ी मांग रख दी है कि … Read more

न्याय की लाल माटी

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

सपनों का घर

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली कमला देवी का परिवार आस-पड़ोस में काफी प्रतिष्ठित माना जाता था। उनके पति दीनानाथ जी एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी थे। परिवार में एक बेटा था सौरभ, जिसकी शादी को अभी महज़ दो साल ही हुए थे, और घर में एक प्यारी सी बहू थी मेघा। सबसे … Read more

सच्ची चौखट

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

**सात समंदर पार का सन्नाटा**

 पंडित शिवशंकर जी के पुश्तैनी मकान का बड़ा सा आँगन अब हमेशा खामोश रहता था। कभी इस आँगन में उनके बेटे रोहन की किलकारियां गूंजा करती थीं, लेकिन आज यहाँ सिर्फ शिवशंकर जी की सूखी खांसी और उनकी पत्नी, रमा देवी की अस्थमा से उखड़ती हुई सांसों की आवाज़ सुनाई देती है। उम्र के सातवें … Read more

सपनों की उड़ान और रिश्तों की दहलीज

शाम का धुंधलका गहराने लगा था और बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ड्राइंग रूम में टीवी पर समाचार चल रहे थे, जहाँ विक्रम अपने मोबाइल में उलझा हुआ था, पास ही सोफे पर बैठी उसकी माँ सुमित्रा जी स्वेटर बुन रही थीं और पिता रघुनाथ जी अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अखबार के … Read more

असली दौलत

 सुधाकर बाबू ने तुरंत बीच में टोकते हुए कहा, “अरे तो इसमें सोचने वाली क्या बात है? पागल है क्या तू? पुणे में क्या रखा है! तू अमेरिका जाएगा। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी इस सीलन भरे घर में और दफ्तर की घिसी हुई कुर्सियों पर बिता दी, ताकि तू खुले आसमान में उड़ सके। अपने … Read more

कर्मों की वसीयत

“हम किसी को दोष नहीं दे सकते अंजलि,” आंटी ने बड़ी सहजता से कहा। “रोहन कोई बुरा बेटा नहीं है। वह बस हमारी ही परछाईं है। उसने वही सीखा जो हमने उसे दिखाया। हम अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी नहीं बने, तो हम किस हक से उम्मीद करें कि रोहन हमारा सहारा बनेगा? प्रकृति … Read more

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