“ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं … – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

” ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं। और आप लोग मेरे बारे में बिल्कुल भी ना सोचो। अब घर में मेहमान हों और घर की बहू कमरे में कुंडी लगाकर बैठी रहे, यह अच्छा लगता है क्या? लोग क्या कहेंगे? कि भाई-भाभी ने स्वागत नहीं किया?” … Read more

माँ ने 25 लाख के लिए बेटा बेच दिया… – मुकेश पटेल

बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन शर्मा विला के ड्राइंग रूम में जो तूफ़ान खड़ा था, वह बाहर के मौसम से कहीं ज़्यादा भयानक था। दीवार घड़ी रात के नौ बजा रही थी। कमरे के बीचों-बीच बिखरे हुए काँच के टुकड़े और फटे हुए कागज़ इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ … Read more

“पापाजी अब घर में रह रहे हैं.. तो कुछ तो काम करना ही होगा।” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

खिड़की से आती धूप अब कमरे के फर्श से हटकर दीवार पर चढ़ चुकी थी। दोपहर के दो बज रहे थे, लेकिन दीनानाथ जी अभी तक अपनी उसी पुरानी आराम कुर्सी पर लेटे हुए थे। उनकी आँखों पर चश्मा टिका था, और हाथ में एक किताब थी जिसका पन्ना पिछले एक घंटे से नहीं पलटा … Read more

घर कचहरी नहीं बनेगा! – मुकेश पटेल 

आख़िर छोटी-छोटी बातों में बहू के मायके वालों को क्यों शामिल करना??  शाम के छह बज रहे थे। घर की दीवार घड़ी ने अपना घंटा बजाया, लेकिन सुमन के कानों में वह आवाज़ किसी अलार्म की तरह नहीं, बल्कि किसी आने वाले तूफ़ान की चेतावनी जैसी लगी। वह ऑफिस से अभी-अभी लौटी थी। थकी हुई … Read more

बहु जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारने चाहिए – सावित्री मल्होत्रा

दरवाजे की घंटी बजी और डिलीवरी बॉय ने एक बड़ा सा कार्टन बरामदे में रख दिया। पसीने से तर-बतर होकर उसने रसीद पर साइन मांगे। रसोई से बाहर आईं 60 वर्षीय सुमित्रा देवी ने उस विशाल डिब्बे को देखा और उनका माथा ठनका। “यह क्या है?” उन्होंने अपनी बहू, अवनी, से पूछा जो अभी-अभी डिलीवरी … Read more

पीहर – प्रभा पारीक

सुबह बाबुजी का फोन आया ,मां के जाने के बाद बाबुजी के बस एक आध ही तो फोन आये थे ।. आज उन्होंने बिना किसी लाग लपेट के बड़ी गंभीर आवाज में कहा था ’’जाकर घर संभाल आना, जो सामान ठिकाने लगाना है लगा देना, घर चाहो तो रखो अन्यथा अपने भाई माधव से पूछ … Read more

जज पिता का फैसला! – हेमलता गुप्ता

जब बूढ़े मां बाप की बेटी को बहू ने अपनी बर्थडे पार्टी में किया सबके सामने.. बेइज्जत.. तो माता पिता ने उठाया ऐसा कदम जिससे बेटे बहू की रूह कांप जाएगी  शहर के सबसे पॉश इलाके में स्थित ‘रॉयल ओक बैंक्वेट हॉल’ आज रोशनी से नहाया हुआ था। बाहर महंगी कारों की कतार लगी थी … Read more

अम्मा की अलमारी – प्रभा पारीक

बचपन से लेकर आज तक न जाने क्यों, अनेक बार खोल कर देख लेने के बावजूद भी हमारे लिए अम्मा की अलमारी  एक रहस्य ही रही|  कभी जब  भी  माँ  अलमारी  खोलकर साफ करने के लिए बैठती  तो  हम सबसे पहले आ धमकते, जबकि हमें कुछ चीजों का निश्चित रूप से पता ही होता था … Read more

तोहफ़ा – पुष्पा जोशी 

जब बेटे ने अपनी पहली तनख्वाह से अपनी मां को दिया सबसे बेहतरीन तोहफा.. मोबाइल की स्क्रीन पर मेसेज की बीप ने समीर का ध्यान अपनी ओर खींचा। “आपके खाते में 45,000 रुपये जमा कर दिए गए हैं – वेतन माह अगस्त।” समीर के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान तैर गई जिसे शब्दों में बयां … Read more

खोखली दीवारें – रश्मि प्रकाश 

कहीं बहु ने ससुराल की बातें अपने मायके में जग-जाहिर कर दी तो?? रसोई के दरवाजे की ओट में खड़ी सुलोचना देवी की सांसें जैसे गले में ही अटक गई थीं। उनकी बहू, आकृति, फोन पर अपनी माँ से बात कर रही थी। आवाज़ धीमी थी, लेकिन सुलोचना देवी के कान चौकन्ने थे। “हाँ माँ… … Read more

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