अनपढ़ माँ – रमा शुक्ला

सुधीर बाबू की आंखों से एक आंसू छलक कर उनके गाल पर आ गया, “तेरी उस अनपढ़ और गँवार मां ने मेरे पढ़े-लिखे फैसले को फाड़ कर डस्टबिन में फेंक दिया। वह मुझसे और डॉक्टरों से लड़ पड़ी। उसने कहा, ‘मैं लंदन नहीं जानती, मैं करियर नहीं जानती, मैं बस इतना जानती हूं कि मेरे … Read more

अपनों की कीमत – गरिमा चौधरी 

सुधा बोलते-बोलते अपने बच्चों के बारे में बताने लगी। “और आप जानती हैं दीदी? लोग कहते हैं कि बच्चों को बीमारों से दूर रखना चाहिए। लेकिन मेरे दोनों बच्चे, आरव और मिष्टी, स्कूल से आते ही सबसे पहले अपनी दादी के कमरे में जाते हैं। सुबह-शाम उनके पास बैठकर अपनी तोतली ज़बान में उन्हें स्कूल … Read more

उम्मीदों का नया सबेरा – मंजू ओमर

सावित्री के घर जैसे आज एक नया सबेरा हुआ है। सभी के चेहरे खुशी से खिले हैं। आठ सालों के लंबे इंतजार के बाद सावित्री की बहू की खुशी की खबर आई है। अब घर मे किलकारियां गूंजेगी, मै भी उसे गोद मे लेकर अपने सारे अरमान पूरे करूगीं। कितना तरसी हूँ ऐसा समय देखने … Read more

प्यार और त्याग से बड़ी कोई चीज़ नहीं होती – हर्षिता सिंह

“नहीं भाभी, यह तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता। आप चाहे कितना भी इमोशनल ड्रामा कर लें, लेकिन मुझे वह कमरा हर हाल में खाली चाहिए ही चाहिए।” सुमेधा ने अपनी बात को बिना किसी लाग-लपेट के बिल्कुल साफ-साफ शब्दों में अपनी जेठानी विशाखा से कह दिया। सुमेधा की आवाज़ में एक अजीब सी कठोरता … Read more

असली खुशी…अपनों के साथ… – मोहिनी मिश्रा

दोपहर के करीब दो बज रहे थे। डाइनिंग टेबल पर जूठे बर्तनों का ढेर लगा था और विशाखा जल्दी-जल्दी उन्हें समेट कर सिंक में डाल रही थी। अभी-अभी उसके पति सुमित और दोनों बच्चे खाना खाकर अपने-अपने कमरों में गए थे। विशाखा की नज़र बार-बार दीवार घड़ी पर जा रही थी। आज महीने का वो … Read more

निस्वार्थ

इस बार देवकीनंदन ने भी अपने जोड़े हुए आखिरी तीन हज़ार रुपये उस फंड में डाल दिए। उन्हें पता था कि 100 लोगों में से उनका नाम निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं है, लेकिन डूबते को तिनके का सहारा ही बहुत होता है। उन्होंने रात भर अपनी आँखों में आंसू लिए भगवान विश्वनाथ से … Read more

मैं समाज के डर से तुझे मौत के मुंह में धकेलने जा रही थी। – शारदा सक्सेना 

ड्राइंग रूम में एक ऐसा भारी सन्नाटा पसरा था, जिसे वहां मौजूद हर शख्स की तेज सांसें और उलझनें और भी गहरा कर रही थीं। वीरेंद्र जी सोफे पर सिर थामे बैठे थे। उनके माथे पर पसीने की बूंदे चमक रही थीं और आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। उनके सामने उनकी पत्नी सुषमा, … Read more

सुमन ताई

“सुमन ताई, आज ये सूखी लाल मिर्च, लहसुन और राई का मसाला आप सिलबट्टे पर पीस देंगी क्या?” काव्या ने रसोई के दरवाज़े पर खड़ी अपनी कामवाली ताई से बेहद झिझकते हुए और धीमी आवाज़ में पूछा। सुमन ताई ने एक पल के लिए काव्या की तरफ देखा और फिर घबराकर अपने दोनों कान पकड़ … Read more

अटूट बंधन

घर की मंझली बहू रितु बार-बार छज्जे पर आ रही थी और गली के नुक्कड़ की तरफ देखकर भारी कदमों से वापस लौट जा रही थी। उसकी देवरानी श्रेया और जेठानी नेहा भी मायके से घर आ चुकी थीं और नीचे आंगन में बहुत ही ज्यादा चहल-पहल थी। घर के सभी लोग होली के त्योहार … Read more

संतोष के आंसू – प्रियंका नाथ

“क्या कर रही हो तुम मीरा? पागल हो गई हो क्या?” कमरे में घुसते ही कमला जी की आवाज़ में एक तीखापन और गहरी हैरानी थी। उनकी नज़र बिस्तर पर रखे उस लाल मखमली डिब्बे पर थी, जिसमें मीरा का पुश्तैनी भारी सोने का हार और कंगन रखे हुए थे। साथ ही मेज पर बैंक … Read more

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