आईने का सच
गरिमा ने अपनी आवाज को थोड़ा ऊँचा करते हुए कहा, “माँ जी, इसमें बेहूदगी कैसी? शादी के तीन साल हो गए मुझे इस घर में रहते हुए। अब मैं इस पुराने ढर्रे और संयुक्त परिवार की रोज-रोज की बंदिशों से तंग आ चुकी हूँ। सुबह से शाम तक बस परिवार की खिदमत करो, सबकी पसंद-नापसंद … Read more