कुलकलंकिनी – सुनीता मलिक सोलंकी
दो शब्दों का मेल “कुल” और “कलंकिनी”।अर्थात् परिवार पर कलंक हो जो …यह शब्द अक्सर समाज में महिलाओं पर लगाए जाने वाले दोहरे मानकों और उन पर रखी जाने वाली अपेक्षाओं को दर्शाता है। समाज महिलाओं को उनके परिवार की इज्जत का प्रतीक मानता है और उन पर कई तरह की जिम्मेदारियाँ डालता है । … Read more