*जो बोया वही पाया* – पुष्पा जोशी
‘सुजाता ओ सुजाता जरा रूकों ना’ शोभा जी ने आवाज लगाई मगर शायद सुजाता जी ने सुना नहीं। शोभा जी प्रात:कालीन भ्रमण करके घर लौट रही थी, आज कई दिनों के बाद, उन्हें उनकी सहेली सुजाता नजर आई और वे उसे आवाज लगा रही थी। उन्होंने अपनी चाल कुछ तेज कर दी वे सुजाता से … Read more