अफसोस नहीं …. – आराधना श्रीवास्तव

कितना सुंदर ,मासूम सा चेहरा ,,,,मदमस्त काया,, गोरी सुंदर ,,,”नैना,”,,, मात्र अठारह वर्ष की थी l गांव में अपनी सहेलियों के साथ निश्चल हंसी  ठिठोली करते हुये कब वह बड़ी हो गई उसे खुद भी पता नहीं चला । 

उसका चंदन सा महकता बदन ,,,चंचल चितवन,, और उस पर से उसका खिलखिला कर हंसना उसके व्यक्तित्व में चार- चांद लगा देती l

 उसी समय उसके गांव में एक अपरिचित युवक का आगमन हुआ ,,,जिसका नाम था,” कमल ” पहली बार नैना की मुलाकात “कमल “से गांव के प्राथमिक स्कूल के पीछे बड़े से बगीचे में हुई थी। जब कमल ने उससे पोस्ट ऑफिस जाने का रास्ता पूछा था, 

नैना तो उसे रास्ता बता रही थी, किंतु ‘कमल’ अपनी  सुध -बुध खोकर उसके चेहरे को निहार रहा था, वह उसके खूबसूरती में इतना गुम था कि नैना द्वारा बताए गए रास्ते को ध्यान से सुना ही नहीं  अचानक अक बका कर कमल ने दोबारा पूछा? तब नैना खिलखिला कर हंसने लगी और बोली ..

अभी तक क्या सुन रहे थे? कमल मुस्कुराया।

 यह उनकी पहली मुलाकात थी उसके बाद गाहे-बेगाहे उनकी मुलाकात हो ही जाती। कुछ समय बाद तो वे एक दूसरे से मुलाकात का बहाना ढूंढते

 समय तेजी से बढ़ रहा था और उसी के साथ उनका प्रेम परवान भी चढ रहा था । चुकी कमल,, निम्न जाति का था और नैना,, ब्राम्हण जाति की थी अतः उनका मेल हो पाना लगभग असंभव था l

   मां-बाप तथा गांव की रजामंदी किसी भी तरह से संभव नहीं थी। अतः उन दोनों ने निश्चय किया कि वे भागकर शादी करेंगे और उन दोनों ने वैसा ही किया। कमल उसे अपने शहर कोलकाता लेकर आ गया वहां शादी भी कर ली  कुछ साल तो आराम से बीते लेकिन कुछ सालों बाद नैना बीमार रहने लगी उसकी कमजोरियां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी,  उसने अपने को एक सरकारी हॉस्पिटल में दिखाया तो पता चला कि उसे ऐड्स हो गया है,वह यह जानकर हैरान थी,। 

जब डॉक्टरों के जोर देने पर उसने कमल का भी टेस्ट कराया तो वह भी एचआईवी पॉजिटिव निकला।  नैना अपने को अपराध बोध महसूस करने लगी उसे महसूस होने लगा की उसी के कारण उसका पति कमल भी एचआईवी पॉजिटिव है। 

वह पहले से ज्यादा कमल को प्यार करने लगी एवं देखभाल करने लगी । 

समय तेजी से गुजर रहा था । उन दोनों का इलाज उसी सरकारी हॉस्पिटल में हो रहा था। एक दिन एचआईवी काउंसलर अंजू श्रीवास्तव ने उसके पति “कमल “की काउंसलिंग की, उस दौरान उसे पता चला कि कमल विवाह से पहले एचआईवी पॉजीटिव था  उसने जानबूझकर नैना को विवाह के जाल में फसांया क्योंकि किसी लड़की के माता-पिता यह जानते हुए कि वह एचआईवी पॉजिटिव है अपनी लड़की का विवाह उससे नहीं करेंगे, इसलिए उसने नैना से प्यार का ढोंग कर विवाह के लिए राजी किया। 

एचआईवी काउंसलर अंजू श्रीवास्तव ने जब यह बात सुनी तो उनके पैरों से जमीन सरक गई उसने कमल को खूब डांट फटकार लगाई कि उसने जानबूझकर नैना जैसी भोली- भाली लड़की को एचआईवी पॉजिटिव बना दिया। अगर उसने संयम से काम लिया होता तो कम से कम नैना तो इस जानलेवा रोग से बची रहती । 

लेकिन अब क्या हो सकता था ? जब नैना को एचआईवी काउंसलर अंजू ने सारी बात बतायी तो उसे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उस पर वज्रपात हो गया हो, उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि कमल उसके साथ इस तरह का धोखा भी कर सकता है।

   आज तक वह यही समझ रही थी कि कमल उसी के कारण एचआईवी पॉजिटिव है और उसी अपराध बोध में जी रही थी। 

जब कमल को यह जानकारी हुई की नैना सब कुछ जान चुकी है तो उसने नैना पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया उसे घर से बाहर नहीं जाने देता उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करता  चुकी नैना भी अब सब कुछ जान चुकी थी। अतः वह भी चुप नहीं रहती जिसके कारण घर में कलह का वातावरण बना रहता आए दिन मार-पीट  दिनचर्या का हिस्सा बन गया था ।  

एक दिन में नैना दवा लेने के लिए हॉस्पिटल आई उसने वहा के एचआईवी काउंसलर अंजू से बात की और रोती हुई सारी बात बताई उसने कहा वह गांव वापस जाना चाहती है, वह उस आदमी के साथ नहीं रहना चाहती  जिसने उसको इतना बड़ा धोखा दिया, उसने टिकट कराने तथा कुछ आर्थिक सहयोग  की बात भी की। 

एचआईवी काउंसलर अंजू ने उसका टिकट कराया कुछ पैसे भी दिए उसने उसी समय ट्रेन पकड़ ली और अपने गांव आ गई ,  वहां आने के बाद उसने एक एचआईवी पॉजिटिव लड़के से विवाह किया ।

 आज वे दोनों अपनी जिंदगी में बहुत खुश हैं।  डॉक्टर्स द्वारा बताए गए एड्स नियमों का पालन कर नैना ने एक स्वस्थ,एवं सुंदर बच्ची को जन्म दिया।

 नैना जिंदगी की तमाम खुशियों का आनंद अपने परिवार के साथ ले रही है उसे कमल को छोड़कर आने का अफसोस नहीं है क्योंकि उसने एक ऐसे व्यक्ति को छोड़ा था जिसने उसके साथ छल किया, उसकी जिंदगी बर्बाद की,। 

उसने अपने स्वार्थ के लिए उसे रोग ग्रस्त बना दिया। आज नैना को अपने लिए गए निर्णय पर बिल्कुल अफसोस नहीं है । उसने जो किया वह बिल्कुल ठीक था  

समाप्त.. आराधना श्रीवास्तव  

लखनऊ ( उत्तर प्रदेश)

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