झूठा शक रिश्तों की जड़ें हिला देता है
दिनेश जी के ऑफिस से लौटने का समय था। घड़ी की सुइयाँ शाम के करीब पहुँच रही थीं, पर जानकी जी के घर में सुबह से ही जैसे तूफ़ान उठा हुआ था। रसोई से लेकर बच्चों के कमरे तक, हर जगह एक अजीब-सी बेचैनी फैली हुई थी। घर के वातावरण में वह गर्माहट नहीं थी … Read more