मुक्ति का स्वाद

 आज सुबह रघुनाथ जी की हालत बहुत खराब थी। वे दर्द से कराह रहे थे और उनकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उन्होंने कांपते हाथों से विमला का हाथ पकड़ा और टूटी हुई आवाज़ में कहा, “विमला… मुझे जाने दे। पर इस कड़वाहट के साथ मत भेज… मेरा मुँह मीठा करवा दे… मेरी … Read more

वजूद की उड़ान

 नौ साल का ‘सावन’ कोने में दुबक कर रो रहा था। दीनानाथ भारी कदमों से अंदर गए और सावन के सिर पर हाथ रखा। सावन ने अपनी डबडबाई आँखों से पिता की ओर देखा और मासूमियत से पूछ लिया, “बाबा, मेरे शरीर में ये अजीब से बदलाव क्यों हो रहे हैं? आज स्कूल में जब … Read more

कोख का नहीं, दिल का रिश्ता

 आज निशा  और समीर की शादी की पांचवीं सालगिरह थी। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। ड्रॉइंग रूम में रखी मेज पर एक शानदार केक रखा था, जिसके पास ही समीर की तरफ से लाया गया एक महंगा तोहफा भी था। सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी इस घर में। समीर … Read more

सूने आंगन की गूंज

सर्दियों की एक धुंधली और सर्द सुबह थी। लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित ‘आनंद कुंज’ नाम की एक विशाल और खूबसूरत हवेली, जो कभी बच्चों की किलकारियों और मेहमानों के ठहाकों से गूंजा करती थी, आज एक अजीब से सन्नाटे में डूबी हुई थी। उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक ही आवाज़ … Read more

फासलों के पार का अपनापन

लखनऊ की सर्द और कोहरे में लिपटी हुई नवंबर की वह सुबह देवकी जी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। साठ पार कर चुकीं देवकी जी पिछले कई सालों से इस विशाल और पुराने पुश्तैनी मकान में नितांत अकेली रह रही थीं। उनके इकलौते बेटे सिद्धार्थ की नौकरी मर्चेंट नेवी में थी, जिसके … Read more

घुटन भरे रिश्ते – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

नंदिनी को अब याद भी नहीं था कि वह आखिरी बार बिना किसी डर के कब जोर से हंसी थी। कभी उसकी हँसी पूरे घर में गूँजती थी। छोटी-सी बात पर खिलखिला उठना, बारिश की बूँदों को हथेली पर रोकना, माँ से घंटों बतियाना और अपनी पसंद के गीत गुनगुनाना—ये सब उसके जीवन का हिस्सा … Read more

ममता अनमोल है

आज शारदा जी  बहुत गमगीन होकर विचारों में डूबी हुई थी। सिंगापुर में रहने वाली उनकी बेटी संजना की तबियत बहुत खराब थी। पिछले माह ही उसके सिज़ेरियन सैक्शन से बेटा हुआ था पर उन्हें कोई खुशी नहीं हुई थी। एकदम निर्विकार भाव से सब देखती सुनती रही थी।  सच तो ये था कि वो … Read more

 दो आंगनों की दहलीज

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सीढ़ियां उतरते हुए अर्चना  के पैर मन से भी ज्यादा भारी हो रहे थे। उसके कपड़ों में अब भी अस्पताल की वो अजीब सी गंध बसी हुई थी—दवाइयों, स्पिरिट और फिनाइल की मिली-जुली गंध। ऑटो में बैठकर पूरे रास्ते वह शून्य में ताकती रही। उसकी आंखों के सामने … Read more

स्वाभिमान की उड़ान: एक बेटी का फर्ज

रात के करीब दो बज रहे थे। पूरा घर गहरी नींद में डूबा था, लेकिन स्वाति की आँखों से नींद कोसों दूर थी। तभी उसके फोन की स्क्रीन रोशन हुई। स्क्रीन पर ‘माँ’ का नाम झिलमिला रहा था। इतनी रात गए माँ का फोन आना किसी अनहोनी का संकेत था। कांपते हाथों से स्वाति ने … Read more

नई सुबह की देहरी

 “मुझे माफ़ कर दीजियेगा बाबूजी,” राधिका का गला बुरी तरह रुंध चुका था। “मुझे पता है, मेरा चेहरा देखकर हर कोई ऐसे ही डर जाता है। मैं यहां से चली जाती हूँ।” वह पीछे मुड़ने लगी, लेकिन उसका दर्द आंसुओं और शब्दों के रूप में बह निकला। वह बिना उनकी तरफ देखे, रुंधे हुए गले … Read more

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