रिश्तों की महक

 कुणाल का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने अंजलि से कहा, “अंजलि, तुम्हें हो क्या गया है? पिछले पाँच सालों में तो तुमने कभी ऐसा नहीं सोचा। आज अचानक तुम्हारे मन में यह ज़हर कहाँ से भर गया? बाबूजी और माँ ने कभी हमसे एक पैसा नहीं माँगा, भैया और भाभी ने हमेशा हमें … Read more

“कटे पंखों की परवाज ” – राशि सिंह

“कुछ सपने हमेशा सपने ही रह जाते हैं… कभी मुकम्मल या कहिए हकीकत का जामा नहीं पहन पाते।” रोशनी ने नितारा से मुस्कराते हुए कहा, लेकिन उसकी मुस्कान हजारों आँसुओं में लिपटी हुई थी। शाम अपने पूरे शबाब पर थी। सूरज विदा होने से पहले आकाश पर अपनी आखिरी सुनहरी लकीरें खींच रहा था। सामने … Read more

रिटर्न गिफ़्ट – के कामेश्वरी

सुशीला जी पति की मृत्यु पर उदास बैठी हुई थीं। उनका पूरा घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था। उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि पति के साथ छोड़ने के बाद उनका क्या हाल होगा, बल्कि वह इस बात को लेकर परेशान थीं कि बेटा और बहू इन रिश्तेदारों को बारहवीं (तेरहवीं/श्राद्ध) पर रिटर्न … Read more

ये कैसा बंधन – उमा वर्मा

आज सुबह सुबह खबर मिली कि तुम नहीं रहे ।यह तो होना ही था।कल  ही तो बेटे के साथ तुम्हे  देखने गयी थी ।बिस्तर पर पड़े असहाय सा मुझे देखते रहे तुम ।पलक भी नहीं झपका रहे थे ।न जाने क्या सोच रहे थे तुम ।पूरे शरीर पर मशीन लगी हुई थी ।डाक्टर ने तो … Read more

रिश्तों का आईना

 भाभी की यह बात सुनकर शालिनी का कलेजा भर आया। जहाँ वह कल तक भाभी पर गुस्सा हो रही थी, वहीं भाभी का यह निश्छल प्रेम देखकर उसकी आँखें फिर छलक पड़ीं। उसने अपने आँसू पोंछते हुए बेहद कोमल स्वर में कहा, “अरे नहीं भाभी, बिल्कुल नहीं! आप कहीं वापस मत आइए। मेरी तो अचानक … Read more

चौखट की धूप

 एक रात जब तान्या भूख से बिलखते हुए खाली दूध का गिलास देखकर सो गई और आरव अपनी फटी हुई कॉपी को गोंद से चिपका रहा था, मंजरी पूरी रात आलोक की तस्वीर के सामने घुटनों के बल बैठकर रोती रही। “हे ईश्वर, मैं क्या करूं? मैं तो अनपढ़ नहीं हूं, बीए किया है मैंने, … Read more

दहलीज का दायरा

 मनोज ने तुरंत खड़े होकर अपने सूटकेस की चेन खींची और बनावटी गंभीरता ओढ़ते हुए कहा, “हाँ भैया, सारिका बिल्कुल ठीक कह रही है। और वैसे भी, भाभी इतनी बीमार हैं, इस हालत में हमारा यहाँ रुकना आप पर अतिरिक्त बोझ ही बनेगा। हम तो सोच रहे हैं कि अभी इसी वक्त कैब बुक करते … Read more

रिश्तों की बगिया

शकुंतला देवी ने तुरंत वंदना को उठाया और उसे अपने गले से लगा लिया। उन्होंने वंदना के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “पागल लड़की, इस हालत में तुझे सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर आने की क्या ज़रूरत थी? कुछ ऊँच-नीच हो जाती तो? माँ कभी अपने बच्चों से हमेशा के लिए रूठ सकती है क्या? मेरा … Read more

अफसोस नहीं …. – आराधना श्रीवास्तव

कितना सुंदर ,मासूम सा चेहरा ,,,,मदमस्त काया,, गोरी सुंदर ,,,”नैना,”,,, मात्र अठारह वर्ष की थी l गांव में अपनी सहेलियों के साथ निश्चल हंसी  ठिठोली करते हुये कब वह बड़ी हो गई उसे खुद भी पता नहीं चला ।  उसका चंदन सा महकता बदन ,,,चंचल चितवन,, और उस पर से उसका खिलखिला कर हंसना उसके … Read more

सात समंदर पार की छांव

“जा यशोदा… एक नया आसमान, एक नया सवेरा और तेरे अपने बच्चे पलकें बिछाए तेरा इंतजार कर रहे हैं। इस उम्र में बहुत कम माताओं को यह सौभाग्य मिलता है कि वे अपने बच्चों के साथ उस आंगन में रह सकें जिसे उनके बच्चों ने अपने सपनों से सींचा है। खूब खुश रहना, अपनी सेहत … Read more

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