किशन मां के कमरे में आया तो देखा मां मुक्ता के सर में तेल लगा रही है ठीक वैसे ही जैसे बचपन में लगाती थी देखकर किशन बोला मां मेरे सर में भी लगाओ ना मां , मां बोली अरे तू तो बहू से लगवा लेना अब मेरा इतना शरीर नहीं चलता वो तो मुक्ता ससुराल वाली है अब वहां कौन लगाएगा इसे ,तुम तो अपने ही हो ।
किशन का मन उदास हो गया उसके मन में आया कि कह दे अपने है तो अपनापन क्यों नहीं लगता
किशन को याद आया कि बचपन में भी कभी कोई सामान की जिद्द करता तो मां पहले मुक्ता को दिलाती कहती तू तो अपना है वो तो पराई है । मां हमेशा मुक्ता से सलाह लेती हर बात में यहां तक कि शादी के बाद भी अपने दिल की बात मुक्ता से ही कहती और कभी वो आ
जाती तो भूल ही जाती घर में बेटा – बहु भी है किशन को कभी कभी मुक्ता से जलन होती की पराई के नाम पर उसे ज्यादा अपनापन मिल जाता है क्योंकि संग में रहने पर तो मां का ध्यान ही नहीं जाता कि उनका बेटा है जब से शादी हो गई तब से जिम्मेदारी पत्नी की हो गई ।
हां मां को कुछ जरूरत होती या बहन के आने पर कुछ देना होता तो उन्हें बेटे – बहु की याद आती।
सुरभि किशन की पत्नी उसे भी अहसास था कि मां बेटी को ज्यादा चाहती है क्योंकि आज तक उन्होंने सुरभि से नहीं पूछा कि उसे क्या पसंद है और जब से वो आ गई तो
किशन की पसंद भी भूल गई एक बार सुरभि ने कहा भी मां इनको आपके हाथ का गाजर हलवा बहुत पसंद है तो आप बना दो पर शायद उनको बहु के होते बेटे के लिए कुछ करना अपनी शान के खिलाफ लगता उन्हानें कहा तू तैयारी करती जा मैं बताती जाती हूं मुझसे इतना खड़ा नहीं हुआ जाता।
और कुछ दिन बाद बेटी – दामाद आए तो बेटी की पसंद का सब अपने हाथ से बनाया सुरभि बोली मांजी आप थक जाएंगी मैं बना देती हूं
तो मांजी बोली अरे उसे मेरे हाथ का ही पसंद है ।सुरभि ने भी बोल दिया तो आप बताती जाती जैसे गाजर का हलवा बताया था ।थोड़ी देर के लिए विमला जी चुप हो गई जैसे उनका भेदभाव समझ आ गया फिर बोली अरे वो कौन सा रोज आ रही कभी कभी तो आती है।
कुछ दिनों बाद दिवाली आने वाली थी विमलाजी ने किशन से कहा कि उन्हें पैसे दे दे मुक्ता की ससुराल में दिवाली जाएगी मुक्ता और दामाद के कपड़े भी लाने है
किशन ने कहा मां अभी पैसों की थोड़ी दिक्कत है तो आप कपड़ों की जगह लिफाफा और शगुन भेज दो वैसे भी अब तो उनकी शादी को बहुत साल हो गए
विमलाजी गुस्सा होते हुए बोली तुम अपने खर्चों में कमी कर लेना हम दिवाली पर ज्यादा खर्चा नहीं करेंगे बेटा – बहु तो अपने होते है पर बेटी तो पराई है उनका तो ख्याल रखना पड़ेगा ।
आज किशन का सब्र जवाब दे गया बोला मां अगर बेटी पराई है इसलिए उसे इतना अपनापन मिलता तो काश हम भी पराए होते आपने हमेशा अपने के नाम पर मुझे पराया किया है चाहे अपने दिल की बात कहनी हो ,या बचपन वाली देखभाल ,या मेरी पसंद और तो और दीदी की खुशी के चक्कर में आपने मेरी कभी परेशानी भी नहीं
समझी कि मुझे कोई दिक्कत है जब से सुरभि आ गई तब से तो आपने और ही पराया कर दिया किशन का गुबार आंसुओं के रूप में निकला तब विमलाजी को अहसास हुआ की उनके व्यवहार का बेटे बहु पर क्या असर हो रहा था उन्होंने किशन को चुप कराते हुए कहा माफ करना बेटा बेटी से मन की बात कर लेते है
और उनके दूर जाने पर उनकी खुशी का ख्याल बना रहता है इस कारण जो करीब रहता है उसका ध्यान नहीं रहता और उन्होंने सुरभि को भी गले लगा लिया बोली अब मै उस बात का ध्यान रखूंगी ।
आज किशन खुश था कि अब उसे भी अपनापन मिलेगा ।।
दोस्तों मां के लिए बच्चे समान होते है लेकिन कई बार एक से ज्यादा लगाव दूसरे के मन ईर्ष्या भर देता है कई बार बेटियों के मोह में मां ये भूल जाती है कि जो साथ रह रहा है उसे भी साथ चाहिए अपने तभी रहते है जब अपनापन मिलता रहे आपकी क्या राय है अवश्य शेयर करें
स्वरचित
अंजना ठाकुर
Thanking you
Regards
Anjana thakur
कहानी प्रतियोगिता ,बेटा – बहू तो अपने होते है ।।