उम्मीद का नया सवेरा – मधु वशिष्ठ

पापा, आप तो कह रहे थे कि प्रिया को  मम्मी जैसा अच्छा खाना बनाना आता है।  गट्टे की‌ सब्जी और साग तो वह मम्मी से भी अच्छा बनाती है।  यहां तो हालत यह है कि सवेरे की चाय अभी भी मैं ही बनाता हूं। हम तो सोच रहे थे की मां के जाने के बाद … Read more

उम्मीदों का नया सवेरा – विनीता सिंह

रामपुर गाँव में सूखे की मार ने हर चेहरे पर मायूसी लिख दी थी। धूल भरी पगडंडियों पर अब बच्चों के पैरों की चाप कम और बड़ों की चिंताओं की गूँज ज़्यादा सुनाई देती थी। माधव, जिसका पूरा जीवन इन खेतों की मिट्टी से जुड़ा था, हर सुबह फटी हुई ज़मीन को इस उम्मीद में … Read more

*उम्मीदों का नया सवेरा* – तोषिका

इतने साल हो गए तुम्हे जहां जेल में अपनी सजा काट ते हुए पर तुम्हारा बर्ताव देख कर तो नहीं लगता कि तुमने कभी किसी का खून किया होगा। आरक्षी ने बड़े सामान्य स्वर में पूछा। उधर सेल में बैठा साहिल बोला “सर अब मैं आपको क्या बताऊं, जब किसी की जिंदगी में *उम्मीदों का … Read more

अभी मुझे और जीना है – शुभ्रा बैनर्जी

पिछले छह महीने से लगातार बीमार रहने की वजह से,मां बहुत कमजोर हो गई थी।पिछले बत्तीस सालों से साथ में रह रही थी निशा।मां का जीवन के प्रति मोह छूट रहा था धीरे-धीरे।अपने जीते जी पति, इकलौते बेटे और दामाद को खोया था उन्होंने।अब उनकी बड़ी बेटी , जो दो साल पहले विधवा हुई थी … Read more

उम्मीदों का त्याग ।। – अंजना ठाकुर

नमिता ससुराल में कदम रखते ही एक पल के लिए ठिठक गई बिल्कुल साधारण घर लग रहा कमरे में चार कुर्सी और एक टेबल पड़ी थी साइड में एक पलंग रखा था बहु का स्वागत करने के बाद उसे अंदर कमरे में ले गए नमीता ने देखा वहां भी एक लोहे की अलमारी और एक … Read more

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