साए से उजाले की ओर
विद्याधर जी अपने बेटे के दृढ़ संकल्प और उसके आंसुओं को देखकर निःशब्द हो गए। उन्हें समझ आ गया कि जिस बेटे को वे कमजोर और नरम दिल समझ रहे थे, वह अपने बच्चों की ढाल बनने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने आगे बढ़कर मयंक के कंधे पर हाथ रखा … Read more