भरोसा – संध्या सिन्हा 

हेलो जय! भैया की तबियत ठीक नहीं है.. किसी बड़े डॉक्टर को दिखा दो। ठीक है भा… भी, (जय पूरी बात भी ना कर पाया था कि… उसकी पत्नी नीता ने फ़ोन काट दिया और बोली  “क्या ठीक है.. तुम भी ना जय समझते नहीं हो… ये भाभी का शहर आने का बहाना है और … Read more

भरोसा – नेहा जैन

बरसात की हल्की बूंदें शहर की ऊंची इमारतों पर गिर रही थीं। रात के करीब ग्यारह बजे थे, लेकिन “सिटी केयर हॉस्पिटल” की चौथी मंजिल पर हलचल अभी भी जारी थी। कमरा नंबर 407 के बाहर एक आदमी बेचैनी से टहल रहा था। उसकी आंखों में डर था… और माथे पर पसीना। वो बार-बार डॉक्टर … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – आरती निलेश खरबडकर

वृंदा हाथ में बड़ी सी अटैची लेकर घर से बाहर निकल रही थी। उसका भाई उसे लेने आया था। आंसू भरी निगाहों से उसने विनय की ओर देखा। लेकिन आज वो वृंदा से नजरे नही मिला पा रहा था। क्योंकि आज वृंदा की आंखो में अनगिनत सवाल थे और अपार दुःख भी। कितना प्यार किया … Read more

निर्णय – संगीता त्रिपाठी

  “सुलभा तुम ..”एक जानी पहचानी आवाज उसके कानों में टकराई   ,कैसे भूल सकती है इस आवाज को ,जिसकी वो दीवानी थी ,।    पलट कर देखा तो नितांत अजनबी सा बिखरे  सफेद बालों वाला ,मोटे फ्रेम का चश्मा लगाए ,एक प्रौढ़ व्यक्ति खड़ा था । न ये सुशांत नहीं हो सकते……,उसके कानों ने गलत सुना … Read more

आउट डेटेड बुढ़िया – कविता भड़ाना

रीमा और सीमा की आँखें विस्मय से फ़टी रह गयी जब उन्होंने रेस्टोरेंट के सामने वाली टेबल पर सासु माँ दामिनी जी को अपनी सखियों के साथ खिलखिलाते हुए गरम गरम छोले भटूरे खाते हुए देखा, उससे भी ज्यादा हैरानी उनके कपड़ो को देख कर हो रही थी, गुलाबी रंग की शिफान की साडी, उम्र … Read more

बोया, वो पाया – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी, ये पुरानी सिलाई मशीन कब तक संभालकर रखोगी? अब तो कोई इसका इस्तेमाल भी नहीं करता।” संजय ने स्टोर रूम की धूल साफ़ करते हुए झुंझलाकर कहा। नीरा मुस्कुराई, मशीन पर हाथ फेरा और बोली, “कुछ चीज़ें सिर्फ़ सामान नहीं होतीं बेटा… उनमें किसी की पूरी ज़िंदगी सिलाई हुई होती है।” संजय ने बात … Read more

जो बोया, वही पाया – बिमला रावत जड़धारी

रामेश्वरी की अंतिम विदाई थी। सभी रिश्तेदार और दोनों बेटियाॅं भी पहुॅंच गयी थी। सभी कह रहें थे अच्छा हुआ मुक्ती मिल गयी, बहुत कष्ट में थी। दोनों बेटियाॅं आपस में बोली, मम्मी ने जो बोया था वही पाया। दादी को कितना परेशान किया था।दादा जी तो थे नहीं, दादी जी ही थी जो गाॅंव … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – विनीता सिंह

राहुल जी एक स्कूल में गेम के टीचर थे।उनकी उम्र 60साल की थी स्कूल से रिटायर हो चूके उन्होंने सोचा सारी जिन्दगी बहुत काम कर लिया अब अपने पोते पोतियों के साथ समय बीताऊगा। लेकिन कहते हैं जो होना होता है वहीं होता है। उनके दोनों बेटे अपनी नौकरी के लिए अपने अपने परिवार को … Read more

सबक – खुशी

चारु एक सम्पन्न परिवार की लड़की थी इसलिए जिद्दी स्वभाव की थी । परिवार में माता रत्ना पिता राजन दो भाई  सुनील और अनिल और भाभियां नीता और प्रिया थे ।सारा दिन चारु भाभियों को भी परेशान करती उनकी झूठी सच्ची लगा मां और भाईयों से डॉट  पड़ती तो उसे बड़ा मजा आता।समय बीता चारु … Read more

*जो बोया, वही पाया* – तोषिका

उसने *जो बोया, वही पाया* है, और मुझे अपनी बहु पर गर्व है, शशि की सास मीनू सीना तान कर बोली। पूरे घर में खुसुर फुसुर होने लग गई। सब आपस में ये बातें करने लग गए कि शशि अपने बेटे,राजीव; जो उसको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है उस के लिए ऐसा कैसे … Read more

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