पंखों पर बंधी डोर
फोन के उस पार प्रणय ने बेहद संयम से उत्तर दिया, “पिताजी, अवनी कोई गलत काम नहीं कर रही है। वह अपनी मेहनत, अपने हुनर और अपनी लगन से अपने पैरों पर खड़ी हो रही है। उसने परिवार के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई, बल्कि शास्त्री नाम को एक नई प्रतिष्ठा दी है। मैं उसका … Read more