ममता की कोई कीमत नहीं ! – डाॅ संजु झा
रामलाल की नींद आधी रात को अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज से खुल गई।वे एक नजर अपनी सोई हुई पत्नी और नमिता पर डालते हैं और चुपके से दरवाजा खोलकर बाहर निकल जाते हैं। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंढ़ पड़ रही थी। उन्होंने खुद को ऊनी शाॅल से अच्छी तरह लपेटा और … Read more