प्यार और भरोसा – संगीता त्रिपाठी 

   रीमा दो दिन से फोन नहीं उठा रही थी ,उसके बाद फोन स्विच ऑफ आने लगा ,मयंक ने सोचा शायद घर में व्यस्त होगी और फोन चार्ज नहीं कर पाई होगी ,लेकिन जब चार – पांच दिन बीत गए रीमा का फोन नहीं आया तो मयंक का माथा ठनका,रोज बात करने वाली रीमा का अचानक फोन न आना

और कॉल करने पर रिप्लाई न देना ,उसके घर के लोग भी उसके फोन का रिप्लाई नहीं दे रहे थे ,छोटे भाई रितेश ने उठाया भी तो ये बोल कर फोन रख दिया “जीजू मै कॉलेज में हूं घर पहुंच कर दीदी से बात करवाता हूँ “कह कर फोन रख दिया ,जब रात तक फोन नहीं आया तो मयंक चिंतित हो गया ,

एक महीने बाद उन दोनों की शादी है ,कल  ही तो उसे अपने शहर पहुंच कर शेरवानी का ट्रायल करना है ,रीमा को शेरवानी ट्रायल के लिए साथ जाना है ,

   कुछ सोच कर मयंक बाइक उठा ,अपने शहर चल दिया जो उसकी पोस्टिंग की जगह से मात्र तीन घंटे की दूरी पर था ,।

      घर पहुंच मयंक ने फिर रीमा को कॉल किया , मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा ,कुछ सोच कर मयंक ने रीमा के पापा यानी अपने होने वाले ससुर जी को फोन लगाया,वे भी फोन काट दे रहे थे ,अब मयंक उलझन में आ गया , आखिर क्या बात है जो उससे छुपाया जा रहा  ।

      मयंक सीधे रीमा के घर पहुंचा ,घंटी बजाने पर दरवाज़ा रीमा के छोटे भाई रितेश ने खोला ,मयंक को देख

    घबरा कर अंदर भागा,घर में शादी की तैयारियों के बजाय एक अजीब सा सन्नाटा फैला था ,

    “रीमा कहां है पापा जी “

    “अस्पताल में “दुखी स्वर में मोहन जी बोले 

     “क्या हो गया अचानक रीमा को “

      “वहीं पता चलेगा , चलो हम भी चल रहे है “

    सबके साथ मयंक भी अस्पताल पहुंचा ,बाहर कैंसर अस्पताल का बोर्ड देख मयंक कुछ समझा नहीं ,

  अंदर रीमा को देख वो सकते में आ गया , कीमोथेरपी की पहली डोज़ में उसके बाल झड़ गये थे 

     “क्या रीमा को …”अधूरी बात छोड़ मयंक चुप हो गया ,

       “हां ,हम तुम्हे बता नहीं पा रहे थे ,तुम शादी तोड़ कर जा सकते हो ,”

       मयंक वहां से चला गया ,मोहन जी अपने आँसू पोंछ बुदबुदाए,”उसने कुछ गलत नहीं किया ,ये तो होना ही था “कह कर अपने को दिलासा दें ,बिलख रही रीमा के सर पर हाथ फेरते हौंसला दे रहे थे ,”तुम ठीक हो जाओगी और देखना  एक दिन एक नहीं कई शादी के प्रपोजल आयेंगे “

   “पापा मैने मयंक से प्यार किया है “बेटी का भीगा स्वर सुन मोहन जी बोले ,”बेटी प्यार – व्यार सब फालतू बातें है ,सब अवसर के अनुरूप आगे बढ़ते है “

     “सही कहा पापा आपने ” 

    अगले दिन जब परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे तो उन्हें   सर मुड़वा कर हाथ में सिंदूर की डिब्बी ले मयंक खड़ा मिला  ,

      स्तब्ध मोहन जी और परिवार के लोग कुछ बोल नहीं पाएं ,

     रीमा के विरोध को नजरअंदाज करते ,और उसके केशविहीन सर पर सिंदूर लगाते मयंक बोला 

      “पगली , ये दिल का मजबूत बंधन है ,जो विपरीत परिस्थितियों पर भी अपना हौसला नहीं खोता ,और जहां तक तुम्हारी बीमारी की बात है ,तुम्हारे संघर्ष में मै तुम्हारे साथ हूँ , ईश्वर पर भरोसा रखो एक दिन यकीनन हम इस बीमारी पर विजय पा लेंगे ,हम साथ रहेंगे जनम जनम तक ..”रीमा के माथे  को होठों से छू एक  विश्वास और हौसलें की नींव रख दी मयंक ने ,।

  “मयंक मेरे बाल “

   “इसीलिए तो मैने भी बाल मुड़वा लिया ,जिससे तुम अपने को अकेला न समझो ,रीमा मैने तुम्हारे मन से प्यार किया है तन से नहीं ,”

   “तुम मुझे छोड़ कर अपना आगे देखो “

   “रीमा ,हमारा जन्म – जन्म का साथ है ,अच्छी या बुरी परिस्थिति हो ,सब में हमें एक दूसरे का साथ देना है ,विवाह तो एक सामाजिक औपचारिकता है ,दिल से तो हम कब का एक हो चुके है ,और अगर आज तुम्हारी जगह मै होता तो क्या तुम शादी से इनकार कर देती,मुझ पर भरोसा रखो ,मै कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा”

 एक सच्चे प्यार को देख ,रीमा ही नहीं कमरे में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो आई ।

    “रीमा शादी तय हुई उसी तारीख पर होगी “मयंक की मां ने कहा तो मयंक ने मां की तरफ देखा ,

    “बेटे माफ करना ,मै गलत थी तुमने सही कहा ,यदि शादी के बाद ये बीमारी तुम्हे या रीमा को होती तो क्या तुम दोनों एक दूसरे को छोड़ देते ,परिवार का मतलब ,हर मुसीबत में साथ खड़े होना है “

   रीमा के परिवार वालों के चेहरे पर सुकून था साथ ही एक बेहतरीन सोच रखने वाले परिवार का साथ देख उनके चेहरे पर नूर आ गया ।

    तय समय पर घोड़ी पर केश विहीन सर वाला दूल्हा और स्टेज पर इंतजार करती केशविहीन दुल्हन पारंपरिक लिबास में कुछ अलग दिख रहे थे क्योंकि उनके चेहरे पर चमक थी , संघर्ष की ,साथ की ,हिम्मत की और एक आत्मविश्वास की जो उन्हें दूसरों से जुदा दिखा रहा था 

    एक दूसरे को माला पहनाते दोनों हँस पड़े ,तालियों और दुआओं की छांव तले एक नए दाम्पत्य के जीवन का सफ़र आरम्भ हो गया ।

      करीब एक साल बाद रीमा मयंक के साथ और हौसलें से कैंसर को मात दे दी ।

   “तुमने सच कहा था मयंक प्यार में भरोसा सबसे बड़ी औषधि है , ईश्वर पर भरोसा कर लगन से किये काम में सफलता जरूर मिलती है ,तभी तो आज हम साथ है “

   कुछ समय बाद एक प्यारे से बेटे की माँ बन गई ,

  प्यार में भरोसा का साथ अपने में संजीवनी बूटी है ।

       —- संगीता त्रिपाठी 

#भरोसा 

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