धूप-छाँव की देहरी
“सही कह रही हो मनोरमा। आज की बहुओं को सास-ससुर फूटी आँख नहीं सुहाते। ज़रूर रागिनी ने ही शर्त रखी होगी कि जब तक तुम्हारे माँ-बाप घर खाली नहीं करेंगे, मैं पाँव नहीं रखूँगी। तभी तो बेचारी सुमित्रा को भरी दुपहरी से पहले ही घर छोड़ना पड़ा। ऊपर से नाम लगा दिया बेटी का! अरे … Read more