धूप-छाँव की देहरी

“सही कह रही हो मनोरमा। आज की बहुओं को सास-ससुर फूटी आँख नहीं सुहाते। ज़रूर रागिनी ने ही शर्त रखी होगी कि जब तक तुम्हारे माँ-बाप घर खाली नहीं करेंगे, मैं पाँव नहीं रखूँगी। तभी तो बेचारी सुमित्रा को भरी दुपहरी से पहले ही घर छोड़ना पड़ा। ऊपर से नाम लगा दिया बेटी का! अरे … Read more

जलन – मधु वशिष्ठ

गायत्री जब गांव से जब नौवीं क्लास में हमारे कॉन्वेंट स्कूल में आई थी , तो काली सी और लंबे दांतों वाली लड़की जिसके कि कोई पास भी नहीं बैठना चाहता था। हम सब शहरों में रहने वाले स्वत: ही उस ग्रामीण लड़की को हेय नजर से देखते थे। लंच टाइम में जब सब अपना … Read more

जलन – आराधना श्रीवास्तव

वार्षिक परीक्षा होने में केवल  एक महीने शेष रह गए थे, परीक्षा की तारीख दिन- प्रतिदिन करीब आ रही थी, निधि जी- जान से परीक्षा की तैयारी में जुटी थी उसे इस वर्ष भी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना था l निधि बहुत ही होनहार चतुर तेजतर्रार लड़की थी वह हर वर्ष परीक्षा … Read more

जलन – डॉ आभा माहेश्वरी

शहर की उस शांत-सी कॉलोनी में आमने-सामने दो घर थे। एक घर में रहती थीं सुधा और दूसरे में नंदिनी। दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, दोनों गृहिणी थीं और दोनों के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते थे। सुबह की चाय से लेकर शाम की बालकनी तक, दोनों की दिनचर्या में बहुत कुछ एक … Read more

समझौतों की धूप-छांव

 सत्यनारायण जी की आंखों में अंगारे दहक उठे। उन्होंने भरे गले से कहा, “यह घर तुम्हारी माँ के कंगन और मेरी उम्र भर की कमाई से बना है समर। मर्यादा और संस्कारों से समझौता करने की एक सीमा होती है। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। यदि तुम्हें इस तरह जीना है, तो … Read more

आत्मसम्मान की दहलीज

 मास्टर जी और रघुवीर सिंह ने किसी तरह अवनि को सहारा दिया और उसे लेकर उसके घर पहुंचे। अवनि के पिता दीनानाथ और मां यशोदा अपनी लाडली बेटी की यह हालत देखकर सुध-बुध खो बैठे। घर में कोहराम मच गया। अवनि मां के सीने से लगकर फूट-फूटकर रोने लगी। पिता का दिल टुकड़े-टुकड़े हो गया। … Read more

धूप-छाँव का नया सवेरा

अनुराग और वंदना ने आगे बढ़कर एक साथ दोनों के पैर छुए। वंदना की आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उसने कहा, “पापा, मम्मी… आज आपने हमें सिखाया कि प्यार सिर्फ जवानी का आकर्षण नहीं होता। असली प्यार तो वह है जो उम्र के पतझड़ में भी एक-दूसरे की छांव बनकर खड़ा रहे। हमें … Read more

ममता की छांव

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैंने हिम्मत जुटाकर टॉर्च की रोशनी उस अंधेरे कोने में डाली। वहां कोई भूत या साया नहीं था, बल्कि लगभग बारह-तेरह वर्ष का एक दुबला-पतला, मैले कपड़ों में लिपटा लड़का बैठा था। उसके बाल बिखरे हुए थे और वह ठंड से बुरी तरह कांप रहा था। उसके हाथ में … Read more

धूप की चौखट

“तो फिर आज इस बात से तकलीफ़ क्यों?” रश्मि ने अपनी आवाज़ में दृढ़ता लाते हुए कहा, “इंसान को दूसरों के साथ वही बर्ताव करना चाहिए, जो वह कल अपने लिए चाहता है। कर्म लौटकर ज़रूर आते हैं। अगर हम आज अपने बड़ों को यह संदेश देंगे कि उनका वक़्त ख़त्म हो चुका है और … Read more

लहू की छांव

 आलोक की आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था। उन्होंने कहा, “सुमित, परिवार मुनाफे और घाटे पर चलने वाली कोई कॉर्पोरेट कंपनी नहीं होती। परिवार एक ऐसा वटवृक्ष होता है जिसकी छांव में जब एक डाल सूखने लगे, तो दूसरी डालियां उसे सहारा देती हैं, उसे काटकर अलग नहीं फेंका जाता। जिस भाई ने अपनी … Read more

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