अदृश्य डोर: एक माँ की वापसी

 यह सुनते ही देवकी की आत्मा सिहर उठी। वह जोर से “कबीर!” चिल्लाते हुए नींद से जाग गई। वह हांफ रही थी और उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। बाहर बारिश रुक चुकी थी और सुबह की पहली किरण कबीर के कमरे की खिड़की से अंदर आ रही थी। देवकी वहीं बैठी रही … Read more

जिसे उसने अपना सच समझा – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

“माँ, आप मुझे पहचानती हैं?” सामने बैठी वृद्धा ने कुछ क्षण उस लड़की को देखा। फिर मुस्कराकर बोलीं— “बिल्कुल। तुम मेरी बेटी हो।” लड़की की आँखों में आँसू आ गए। “नहीं माँ… मैं आपकी बेटी नहीं हूँ।” वृद्धा चुप हो गईं। कमरे में कुछ देर तक सिर्फ दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक सुनाई देती … Read more

‘मुनिया’ – श्वेता अग्रवाल 

अभी अम्मा जी दोपहर का खाना खाकर लेटी ही थी कि अचानक गेट खटखटाने की जोर-जोर से आवाज़ आने लगी।  “अम्मा! ओ अम्मा दरवाजा खोलो।” “आ रही हूॅं। कौन आ गया इस वक्त? दो घड़ी सुस्ताने भी नहीं देता।” धीरे-धीरे दरवाजे की ओर बढ़ती अम्मा जी बड़बड़ाई। लेकिन जैसे ही वह दरवाजे के करीब पहुॅंची … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – शुभ्रा बैनर्जी

सविता जी की उम्र अब सत्तर के करीब हो चुकी थी।शरीर तो कमजोर हुआ था,पर इच्छाशक्ति और भी मजबूत हो रही थी।पति अरिहंत जी उम्र में उनसे पांच-छह साल बड़े थे।एक बेटे और दो बेटियों का परिवार था उनका।बच्चों की शादी करवा कर चिंता मुक्त हो चुके थे दोनों।बेटियां तो अपने ससुराल में रह रहीं … Read more

समझौता अब और नहीं – मंजू ओमर

संध्या मैंने शिवानी के लिए एक लड़का देखा है अब मैं जल्दी से जल्दी उसकी शादी करके इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं सुरेश बोला।।लेकिन शिवानी तो अभी पढ़ रही है , वह तो अभी 20 साल की है। वैसे बीच मे ही पढ़ाई छुड़वाकर शादी कर देना ठीक नहीं है। अच्छा अब तुम … Read more

खामोश दीवारें और एक बहन की पीड़ा

मेरी छोटी बहन राधिका का स्वभाव शुरू से ही पानी की तरह निर्मल और पारदर्शी रहा है। छल-कपट, चालाकी या दुनियादारी की पेचीदगियां जैसे उसे कभी छू कर भी नहीं गुजरीं। घर में सब से छोटी होने के कारण वह सबकी लाडली तो थी, लेकिन उसमें नखरे या ज़िद नाम की कोई चीज़ नहीं थी। … Read more

टूटे हुए सपनो की सुबह

शिखा की आँखों के सामने का वो सुनहरा सपना, जो उसने पिछले कई महीनों से बुना था, एक पल में कांच की तरह टूट कर बिखर गया। जिन रिश्तेदारों ने कहा था कि भाभी माँ बनकर आएगी, उनके सारे वादे और सारी बातें उस ठंडी सुबह के कोहरे में कहीं गायब हो गई थीं। उसे … Read more

एक रात का सफर

आज, मोहिनी  ने वही किया था। वह अपने ही घर में एक चोर की तरह दबे पांव उठी थी। अलमारी से अपनी मां के गहनों का डिब्बा निकाला, कुछ नगद रुपये रखे और अपनी सालों की यादों को एक छोटे से बैग में ठूंसकर उस दहलीज को पार कर गई, जिसने उसे चलना सिखाया था। … Read more

विश्वासघात  – सुदर्शन सचदेवा

बारिश उस दिन भी हो रही थी… बिल्कुल वैसी ही, जैसी पाँच साल पहले हुई थी, जब आरती ने पहली बार अपनी सबसे अच्छी सहेली निधि का हाथ पकड़कर कहा था— “दुनिया चाहे कुछ भी कहे निधि, मुझे तुम पर हमेशा भरोसा रहेगा।” निधि मुस्कुरा दी थी। उस मुस्कान में अपनापन था, दोस्ती थी और … Read more

धोखा – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   आज देव और कुमुद का चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है। कुमुद अकेली बाहर गार्डेन में फूलों से सुखी पत्तियां छांट रही है।कल शाम में ही देव किसी जरुरी काम से बाहर चला गया । ” अचानक कौन सा काम आ गया,कल हमारा चालीसवां वैवाहिक वर्षगांठ है, फिर चले जाना” कुमुद देव को जल्दी-जल्दी अपने कपड़े लत्ते … Read more

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