संध्या मैंने शिवानी के लिए एक लड़का देखा है अब मैं जल्दी से जल्दी उसकी शादी करके इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं सुरेश बोला।।लेकिन शिवानी तो अभी पढ़ रही है , वह तो अभी 20 साल की है। वैसे बीच मे ही पढ़ाई छुड़वाकर शादी कर देना ठीक नहीं है।
अच्छा अब तुम मुझे समझाओगी की क्या अच्छा है क्या बुरा। मैं अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं बस। एक तो मुझे बेटा चाहिए था और तुमने बेटी पैदा करके मुझे वैसे ही बोझ तले दबा दिया है। और अब मैं शादी करके अपने आपको फ्री करना चाहता हूं । तो तुम बहस कर रही हो।
देखो सुरेश आजकल समय ठीक नहीं है बेटियों को पहले पढ़ाओ लिखाओ उनको उनके पैरों पर खड़ा करो तब शादी की सोचो। अच्छा तुम भी तो पढ़ी-लिखी थी, ग्रेजुएशन किया था तुमने क्या कर लिया तुमने । तुम्हारे पिताजी ने शादी करके तुमसे छुटकारा पा रही लिया ना। और क्या उखाड़ लिया तुमने ग्रेजुएशन करके कर तो तुम घर का चूल्हा चौका ही रही हो ना ।
आराम से घर में पडी हो और मौज कर रही हो। अब शिवानी छोटी नहीं है उसके घर के काम धाम सिखाओ वही काम आएगा समझी। अच्छा कौन सा लड़का देखा है तुमने शिवानी के लिए क्या काम करता है कितनी उम्र है उसकी संध्या बोली ।
अरे शिवम नाम है उसका मेरे दोस्त के चाचा का बेटा है, मोटर पार्ट्स की दुकान है उसकी और उम्र कितनी है उसकी ।35 साल सुरेश बोला, 35 साल 15 साल बड़ा है वह शिवानी से शिवानी अभी 20 साल की है, तो क्या हो गया थोड़ी उम्र ज्यादा है तो बढ़िया कमा रहा है अच्छा बिजनेस चलता है उसका और अपना घर है और क्या चाहिए।
थोड़ी उम्र ज्यादा है तो क्या हुआ तभी शिवानी तैयार होकर कॉलेज जाने को बाहर आई । तभी सुरेश चिल्ला पडा बंद करो ये पढाई लिखाई और घर के काम धाम सीखो यही काम आएगा। यह पढ़ाई लिखाई नहीं समझी । लेकिन पापा मैं पढ़ना चाहती हूं अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं ।
कोई जरूरत नहीं है जहां मैं तुम्हारी शादी कर रहा हूं ना वह अच्छा कमाता है अच्छे से रखेगा तुझे । पढ़कर क्या उखाड़ लेगी तू ,तेरी मां भी तो पढ़ी लिखी थी कर तो चूल्हा चौका ही रही है ना। शिवानी ने फिर तहरीर दी लेकिन ,लेकिन वेकिन कुछ नहीं। अंदर रसोई मे जाओ और मेरे लिए चाय बना कर लाओ।
शिवानी मजबूरन रसोई में गई और मां से बोली मां पापा ऐसा क्यों कर रहे हैं। क्या अभी तक समाज नहीं बदला पूरी तरह ,अभी तक लोग लड़कियों की जगह रसोई में ही देखते हैं । आज लड़कियां क्या क्या कर रही है और क्या कुछ नहीं कर सकती।
लेकिन बहुत से घरों में अभी भी वही पुरानी मानसिकता के लोग हैं जैसे कि हमारे पापा। अभी भी लड़कियों की पढ़ाई के खिलाफ है शादी कर दो बस अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं । चाहे बेटी की इच्छा हो या नहीं हो वह तैयार है कि नहीं है शादी को उससे उनका कोई मतलब नहीं है।
हाँ बेटा तुम पापा को तो अपने जानती हो बहुत जिद्दी है। वो जो ठान लेते है करके रहते है। लेकिन तू परेशान न हो बेटा ले खाना खा ले, कल मै बात करूगीं उनसे। समझाती हू तेरे पापा को।
नहीं खाना मुझे, खाने से कैसी दुश्मनी ले खाले। मम्मी पापा को बेटा चाहिए था और उसकी जगह मैंआ गई तो उनका सारा गुस्सा मुझपर उतर रहा है। इसमें मेरी क्या गलती है। नहीं बेटा तुम्हारी गलती नही है, मै समझाऊंगी तू परेशान न हो। अच्छा मेरा बेटा खाना खा ले। संध्या ने किसी तरह पुचकार कर शिवानी को खाना खिलाया।
रात को संध्या बिस्तर पर लेटी तो थी पर उसके आंखों से नींद कोसो दूर थी। सोचं रही थी क्या करे कैसे रोके सुरेश को बहुत जिद्दी है कैसे मानेगा। यही सोचते सोचते संध्या की न जाने कब आखं लग गई। दूसरे दिन संध्या जब सुरेश के लिए चाय लेकर आई तो संध्या के बोलने से पहले ही सुरेश ने कह दिया कि आज शाम को शिवानी को लडके वाले देखने आ रहे है उसको ढग से तैयार कर देना।
संध्या कुछ कहने जा रही थी कि सुरेश ने कहा चुप बिलकुल चुप। इतने मे शिवानी तैयार होकर कालेज के लिए बाहर आई तो सुरेश चिल्ला पडा फिर चली तू कालेज कहीं नहीं जाना जा अंदर जा। शाम क़ तुझे लडके वाले देखने आ रहे है ढंग से तैयार हो जाना समझी। शिवानी अंदर चली गई और कमरा बंद करके रोने लगी।
शाम को लडके वाले शिवानी को देखने आए तो उन्हें शिवानी पसंद आ गई। लेकिन संध्या और शिवानी के मन मे कुछ और ही झंझावात चल रहा था, कि कैसे इस शादी को रोका जाए। दूसरे दिन सुरेश के काम पर चले जाने के बाद शिवानी कालेज को निकली तो वहाँ पहुँच कर शिवानी अपनी सहेली निशा के गले लग कर रो पडी, क्या हुआ शिवानी क्यों रो रही है। शिवानी ने अपनी पूरी आपबीती सुनाई।
निशा बोली अरे यार शिवानी तू ऐसे पढाई बीच मे छोडकर अच्छा नहीं कर रही है। मै क्या करूँ निशा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। आंटी जी तुम्हारा साथ नहीं दे रही हैं। नहीं मम्मी भी परेशान है लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। तभी निशा बोली शिवानी तू मेरे घर आजा और हम लोग पुलिस कम्पलेन करते है। क्योंकि तू अभी 21 साल की नहीं हुई है अभी तेरी शादी नहीं हो सकती ये गैर कानूनी है।
और तेरी मर्जी के बिना भी कोई शादी नहीं कर सकता। तू बस मेरे घर आजा फिर देखेगे क्या कर सकते है। अच्छा ठीक है। इतना कर पाएगी अपने पापा के खिलाफ जा पाएगी इतनी हिम्मत है तुझमें, हाँ कर पाऊंगी मम्मी है न मेरे साथ।
शाम को घर जाकर शिवानी ने मां को सब बातें बताई संध्या को भी ठीक लगा,,और कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। संध्या ने कहा शाम को पापा के आने से पहले तू घर से चली जा ,लेकिन मम्मी फिर पापा तुम्हारे साथ क्या करेंगे वह मैं देख लूंगी बेटा, तू तो बस जा यहां से ।
शिवानी ने बैग तैयार किया कुछ कपड़े रखे और अपनी बुक्स उठाई जरूरी दस्तावेज लेकर बाहर निकल आई । इतने में सुरेश आ गया उसने शिवानी के कंधे पर बैग और हाथ में एक बैग देखा तो आग बबूला हो गया। कहां जा रही है सामान लेकर भाग रही है घर से ,नहीं पापा, चल घर के अंदर नहीं मैं नहीं जाऊंगी ।
सुरेश ने हाथ खींच कर शिवानी को थप्पड़ मारना चाहा, तभी संध्या ने सुरेश का हाथ पकड़ लिया । खबरदार मेरी बेटी पर हाथ उठाया तो । तुम मदद कर रही है बेटी को घर से भागने की । हां कर रही हूं जिस घर में तुम जैसे जालीम बाप हो तो उसको तो अपनी बेटी का साथ देना पड़ेगा ना । अब सुरेश देखो बहुत हो गया अब मैं समझौता नहीं करूंगी तुम्हारे साथ।
बहुत कर लिया अब जो मेरी बेटी चाहती है वही होगा । तुम उसकी जबरदस्ती शादी नहीं कर सकते। मेरे संग तो हर समय तुम जबरदस्ती अपनी बात मानवते रहे । अब मैं पुलिस कंप्लेंट करूंगी इतनी तुझ में हिम्मत आ गई है हां आ गई है। बच्चों की खातिर माँ तो भगवान से भी लड़ जाती है फिर तुम क्या चीज हो ।
आज संध्या ऐसा रौद्र रूप देख कर सुरेश दंग था।दोनों मां बेटी घर से निकल जाओ, नहीं जाऊंगी मेरा भी अधिकार है इस घर पर यही रहूंगी, और अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाऊंगी तभी उसकी शादी होगी। पुलिस की धमकी देने को सुरेश भी थोड़ा डर गया क्योंकि आजकल बच्चों की शादी भी जबरदस्ती नहीं कर सकते समझौता करना ही पड़ा सुरेश को और शिवानी की शादी कैंसिल करनी पडी।
क्योंकि मां बेटी दोनों बगावत पर उतारू हो गई थी । इसलिए सुरेश सब कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं था। पहले तो सुरेश संध्या को डरा धमका कर हर बात मनवा लेता था पर आज, आज वो ऐसा नहीं कर पा रहा था। कुछ समय बीत गया। सुरेश की फिर से हिम्मत नहीं हुई कि शादी की बात घर मे करे। शिवानी अपनी पढाई पूरी कर ती रही।
आज जब सुरेश घर आए तो देखा मां बेटी खूब ठहाके लगा रही थी । लेकिन अब सुरेश कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी।सुरेश शिवानी के फीस के लिए पैसे देने मे परेशान करता था तो शिवानी टयूशन करके अपनी फीस का इंतजाम कर लेती थी।इस लिए सुरेश कुछ कह नहीं पाता था। क्योंकि अब दो नारी शक्ति एक हो जाए तो सबको कदमों में झुका ही देती है। अब शिवानी ने अपनी पढ़ाई पूरी की और अपनी पसंद के लड़के से शादी करके अपने परिवार में खुश है ।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
30 अगस्त