अपने और पराए वक्त ने बतलाए – सीमा सिंघी
जब से राधे और उसके काका रामेश्वर जी के बीच खेत का बटवारा हुआ है। तबसे राधे का मन काका के उस खेत के हिस्से पर आ चुका था। वह दिन रात तरकीब लगाते रहता कि किस तरह अपने काका से वह खेत की जमीन हथिया ले। मगर ठीक इसके विपरीत राधे जितना बेईमान कुटिल … Read more