खुद से मुलाकात – उषा भारद्वाज

कितनी अजीब बात है ना… तुम जब दूर हो रहे थे, तब हम घबरा रहे थे। सब कुछ खाली-खाली सा लग रहा था। कितनी अजीब बात है ना… घर में सब थे, मगर हम अकेले हो रहे थे। कितनी अजीब बात है ना… दिल में डर, चिंता, थोड़ा-थोड़ा गुस्सा भी भर रहा था, मगर तुमसे … Read more

स्वाभिमान –  सुनीता माथुर 

माला भाभी को हर समय काम करता हुआ देखकर उनका देवर किशन को बहुत बुरा लगता था वैसे तो मां बाबूजी ने कृष्ण कुंज में खुशियां ही खुशियां बनाई थीं बाबूजी ने ईमानदारी का धन कमा कर और पूजा पाठ कर सारे परिवार के लिए ईमानदारी से घर बनाया था, जिसका नाम “कृष्ण कुंज” रखा … Read more

स्वाभिमानी अम्मा जी – गीता वाधवानी

 शिल्पी जब भी बाजार जाती थी, एक बूढी औरत को कुछ ना कुछ सामान बेचते हुए देखी थी। कभी कुछ सब्जियाँ, कभी धनिया मिर्च अदरक लहसुन, कभी कोई फल, कभी  आलू तो कभी टमाटर। उस अम्मा जी की उम्र लगभग 75 या 80 वर्ष की होगी।   अम्मा जी रोड की एक साइड में एक कपड़ा … Read more

स्वाभिमान – खुशी

नियति कहा हो तुम ? क्या हुआ क्यों चिल्ला रहे हैं? अरे मेरी टाई कहा है ब्लेजर कहा है? जनाब खुद भी कुछ ढूंढ लिया कीजिए।अरे क्या बहु लाये है जिसे ये चिंता नहीं की ससुर ने जाना है सुबह चाय नाश्ता छोड़ कमरे में घुस गई रात कम पड़तीं है।नियति आई बोली मां वो … Read more

कर्ज – एम. पी. सिंह

रामू की चाय की टपरी कॉलेज के बाहर ही थीं. सामने एक स्कूल भी था. रामू के गुजर जाने के बाद उसकी पत्नि कान्ता ने उस चाय की टपरी क़ो संभाल लिया. कान्ता की बेटी कुन्ती बहुत छोटी थीं और उसकी जिम्मेदारियाँ बड़ी. हर रोज़ की तरह कान्ता टपरी पर चाय भजिया बनाने में व्यस्त … Read more

बदनसीब नहीं मैं – विमला गुगलानी

     जिस दिन से रवीना को यह पता लगा कि वह इस परिवार की अपनी बेटी नही, गोद ली गई है, उसी दिन से से उसके स्वभाव में अजीब सा परिवर्तन आ गया। हर समय चहकने वाली सतरह वर्षीय चुलबुली रवीना जैसे गुमसुम सी हो गई।कालिज में इसी साल प्रवेश लिया।नया माहौल, कुछ नई पुरानी सहेलियां, … Read more

*मेरे जैसे बदनसीब इस दुनिया में कोई नहीं* – तोषिका

आज पूरे १० साल हो गए है, दुनिया आगे बढ़ गई है पर मैं वही कि वही रह गई जहां मैं १० साल पहले थी, खिड़की से बाहर ढलते सूरज को देखते हुए मीना बोली। जैसे जैसे सूरज ढल रहा था, मीणा भी मायूस हो रही थी क्योंकि उसको वो ही १० साल पहले की … Read more

नालंदा – डॉ बीना कुण्डलिया 

भारती तेज कदमों से चलने लगी आज वो जल्दी ही घर पहुँच जाना चाहती थी। जैसे ही बेटी नालंदा ने अपने अस्पताल में नियुक्त होने की फोन में उसको सूचना दी थी तभी से फैक्ट्री में उसका बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। घर पहुंचते ही दरवाजे के बाहर खड़ी नालंदा दौड़कर उसके गले लग … Read more

सच्चा प्यार – एम. पी. सिंह

अशोक ओर अलका कॉलेज से ही एक दूसरे क़ो चाहने लगे थे. पहले दोस्त हुआ करते थे, फिर प्रेमी और अब साथ जीने मरने क़ी कसमें खाने लगे. पढ़ाई पूरी होते ही अशोक क़ो नौकरी मिल गई. दोनों ने अपने अपने पेरेंट्स से अपनी अपनी पसंद बता दी. थोड़ी ना नुकुर के बाद, अलका के … Read more

कलंक – खुशी

निशा ओ निशा कहा मर गई।सुनाई नहीं देता तुझे जी ताई जी क्या हुआ।चाय कहा है मनहूस,जी ला रही हूं।तेरी मां तुझे हमारे दरवाजे पर फेक कर अपने आशिक़ के साथ भाग गई। यह कलंक कभी नहीं मिटेगा।रोज़ यही बात सुनते हुए निशा बड़ी हो रही थी।उसका क्या दोष उसकी मां भाग गई और पिताजी … Read more

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