औरत का दर्द – सुधा चौहान
“चुप… एकदम चुप बेशरम!” शालिनी ने अपनी उंगली नीलू के चेहरे की तरफ तानते हुए फुफकार कर कहा। “बोल तो ऐसे रही है जैसे वह तेरे मालिक न होकर तेरे बहुत अपने हो गए हों। अरे बदज़ात, तूने यह भी नहीं सोचा कि तू किस घर में सेंध मार रही है? पर तू भला क्यों … Read more