औरत का दर्द – सुधा चौहान

 “चुप… एकदम चुप बेशरम!” शालिनी ने अपनी उंगली नीलू  के चेहरे की तरफ तानते हुए फुफकार कर कहा। “बोल तो ऐसे रही है जैसे वह तेरे मालिक न होकर तेरे बहुत अपने हो गए हों। अरे बदज़ात, तूने यह भी नहीं सोचा कि तू किस घर में सेंध मार रही है? पर तू भला क्यों … Read more

इश्क़ का नया सफर – दिव्या मिश्रा

 “मैं एक ऐसी लड़की का इंतज़ार कर रहा था, जिसने अपनी पूरी जवानी दूसरों के लिए कुर्बान कर दी। मैं इंतज़ार कर रहा था कि कब उसके कंधों से ज़िम्मेदारियों का बोझ कम हो, कब वो अपने परिवार के दायित्वों से मुक्त हो और कब मैं उससे कह सकूं कि अब उसे अकेले चलने की … Read more

*घर के लक्ष्मी का सम्मान* – तोषिका

आज भगवान ने हमारी सुन ली, हमें बहु के रूप में एक बेटी दे दी खुश होते हुए माही के सास ससुर बोले। अरे समधन जी आज से हमारे घर की लक्ष्मी, आपके घर की लक्ष्मी है। माही की सास बोली “आप लोग फिकर ना कीजिए, माही बेटी को हम बिल्कुल पलकों की छांव में … Read more

कड़वे बोल – करुणा मलिक 

कमलेश, कुछ भी करके भाभी के मायके वालों से बातचीत करवा दे वरना घर बिगड़ जाएगा मेरे भाई का।  अब मैं कैसे बात करवा दूँ जब तेरी माँ ने बहू के साथ मारपीट करके घर से निकाला था तब इस बात का ख्याल नहीं आया था कि बेटे का घर बिगड़ जाएगा। उन्होंने तो बड़े … Read more

भाग्य का दोष नहीं  _सोच का दोष है ।। – अंजना ठाकुर

कुसुम जी को अपनी बेटी सुरभि की शादी की बहुत चिंता थी उनका मानना था लड़की एक बार अपने घर चली जाए तो वो गंगा नहा ले ।सुरभि पढ़ी लिखी थी लेकिन कुसुमजी की सोच के कारण वो नौकरी नहीं कर पाई उनका सोचना था कि बाहर निकलते ही लड़कियां बिगड़ जाती है सुरभि के … Read more

एक भटके हुए मन की वापसी – शारदा सक्सेना

 यह सुनकर कबीर आगबबूला हो गया। “तुम क्या बकवास कर रही हो?” “सच कह रही हूँ,” श्रुति ने अपनी बात जारी रखी। “तुम जिसे प्यार कहते हो, वो शायद तुम्हारी जिद थी। प्यार में इंसान आज़ाद करता है, कैद नहीं। और वैसे भी कबीर, अगर तुम खुश नहीं हो, तो किसी और की खुशी की … Read more

अंतर्मन की आहट – मोहिनी मिश्रा

  “नंदिनी, उस दिन तुमसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा था, और आज भी तुम्हारे पास बैठकर जो सुकून मिलता है, वो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सच कहूं तो सब कुछ है मेरे पास। एक बहुत अच्छा घर है, एक बेहतरीन करियर है, पैसा है, रुतबा है… बस वो एक दोस्त नहीं है, … Read more

एक खाली कोख – राजेन्दर सक्सेना

 “ये सज़ा नहीं है रोहन, ये मेरा चुनाव है,” काव्या ने रोते हुए उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा। “तुम्हें लगता है कि कोख से जन्म देने वाली ही माँ होती है? कबीर को जब चोट लगती है, तो दर्द मुझे यहाँ, मेरे सीने में होता है। जब वह मुझे ‘काव्या मम्मा’ कहता है, … Read more

**फ़र्ज़ की वेदी पर खिला प्रेम** – विजय सीकर

“सच बताऊं मयंक?” पल्लवी ने एक गहरी और हताशा भरी सांस ली। “एक तो अब उम्र बहुत हो गई है। पैंतीस की होने वाली हूँ मैं। इस उम्र में हमारे समाज में लड़कियों को सिर्फ समझौते मिलते हैं, जीवनसाथी नहीं। और दूसरा, अब इस उम्र में मुझे कौन ढूंढेगा? न मेरे सिर पर पिता का … Read more

घर की लक्ष्मी का सम्मान – विनीता सिंह

कर्नल रमेश जी आर्मी से रिटायर होने के बाद अपने परिवार के साथ रहने लगे। उनके पास धन दौलत किसी भी चीज की कमी नहीं थी उनका बेटा एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन था। उसका नाम समीर था। समीर और उसकी पत्नी मीरा दोनों साथ रहते थे समीर हर समय पैसे और ज्यादा से ज्यादा से … Read more

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