संस्कार के नाम पर. – संगीता त्रिपाठी
“शोभा सुना है तू और देवर जी पायल को उसकी ससुराल से वापस ले आये, कुछ समझ है तुम लोगों को, बेटी अपने घर में ही सोहती है,हमारे घर का यही संस्कार है, शादी हो गई, चाहे जैसा ससुराल हो बेटियों को ही निभाना है।”रमा जी ने देवरानी शोभा को डांटते हुये कहा। शोभा तो … Read more