संस्कार के नाम पर. – संगीता त्रिपाठी

“शोभा सुना है तू और देवर जी पायल को उसकी ससुराल से वापस ले आये, कुछ समझ है तुम लोगों को, बेटी अपने घर में ही सोहती है,हमारे घर का यही संस्कार है, शादी हो गई, चाहे जैसा ससुराल हो बेटियों को ही निभाना है।”रमा जी ने देवरानी शोभा को डांटते हुये कहा।      शोभा तो … Read more

हमारे संस्कार किसी को मूर्ख बनाना नही है – संगीता अग्रवाल 

” चलो रिया , रितिक जल्दी से नहा धो लो कॉलेज का समय हो रहा है आज नववर्ष का पहला दिन है तो साथ में पूजा भी करनी है !” शैलजा ने रसोई में से ही आवाज लगाई। ” मम्मी मम्मी वो रितिक के पेट में बहुत जोर का दर्द हो रहा है !” तभी … Read more

सास, बहु और पोता – शकुंतला शर्मा 

“बहू….”सास ज़ोर से चिल्लाई, “आई माँजी” बहु ने भी ज़ोर से कहा,,पर बहु वहीं की वहीं रही , न आई ,,,, सास ने फिर आवाज़ लगाई, बहु को जाना पड़ा,,सिर ढक कर बोली “क्या बात है माँजी, कुछ चाहिए क्या”? सास ने कहा,”पानी का गिलास पकड़ा दे, प्यास लगी है” !    बहु ने गिलास पकड़ाया … Read more

अपने अपने संस्कार – निभा राजीव “निर्वी”

आज बड़े दिनों के बाद निधि की बचपन की सहेली विनीता उससे मिलने आई थी। यूं तो दोनों एक ही शहर में रहते थे मगर कामकाजी होने के कारण व्यस्तता इतनी हो जाती थी कि मिलना कभी-कभार ही हो पाता था। निधि ने बड़े मन से विनीता के पसंद का बेसन का हलवा बनाया था … Read more

चंद्रमुखी – भगवती सक्सेना गौड़

आज चंद्रमुखी 65 वर्षीय महिला, अपने किरायेदार विक्की बाबू के साथ बैंक जा रही थी, वर्ष में एक बार लाइफ सर्टिफिकेट के लिए जरूरी होता है जाना। तिमंजले घर मे चार किरायेदारों के परिवार के साथ अकेली ही जीवन बीता रही हैं। सुबह 11 बजे बैंक पहुँच गयी। पूछताछ करने के बाद एक युवक अपने … Read more

रिश्ते -परीक्षा /प्रतियोगिता ?? – ज्योति अप्रतिम

धूमधाम से शादी हो गई । जेठानी और देवरानी  दोनों की बहुएं एकसाथ रुनझुन करती अपने घर में आ गईं। करीब – करीब सभी मेहमान विदा ले चुके थे पर घर की सभी बहन बेटियां अभी यहीं थीं। आज बहुओं की पहली रसोई थी ।एक बहू सूजी का हलवा बना रही थी औऱ दूसरी चावल … Read more

‘ अन्न का आदर करना भी संस्कार है ‘ – विभा गुप्ता

 मेरे पति के बाॅस की पत्नी हमेशा अपना और अपने बच्चों की बड़ाई करतीं और मेरे बच्चों को नीचा दिखाने की कोशिश करती रहतीं थीं।         एक दिन उन्होंने हमें अपनी शादी की सालगिरह पर डिनर के लिए इन्वाइट किया।डिनर शहर के नामी रेस्तरां में था।इच्छा न होते हुए भी मुझे वहाँ जाना पड़ा।           एक टेबल … Read more

दूसरी तनख्वाह – कंचन श्रीवास्तव

प्रभात उठो न कितनी देर हो गई देखो न दिन चढ़ आया। बच्चों को छोड़ना है दूध लाना है,और तुम्हें ताज़ी सब्जियां खाने का शौक है तो उन्हें भी लाना है। फिर कहीं जाके दफ्तर जा पाओगे, कहती हुई बालों में उंगली फेरती सुधा धीरे से बिल से उठी और सीधे बाथरूम में चली गई। … Read more

संस्कार तो बेटे को भी देने पड़ते हैं। – अर्चना खंडेलवाल

“मुझे उम्मीद नहीं थी सात साल बाद ऐसा कुछ होगा!!! अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सामने प्राची को देखकर लग रहा था कि दुनिया बहुत ही छोटी है सोना कभी प्राची से फिर से मिलेगी ऐसा सोना ने सपने में भी नहीं सोचा था। जो रिश्ते संज्ञाहीन और भावशून्य हो जाये उन … Read more

सोने का पिंजरा – रश्मि प्रकाश

शीना के चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे…. तभी कमरे में सुमिता जी आ गई….“ क्या कर रही हो दोनों… सोई नहीं अब तक…. ।” कह कर वो भी वहीं बैठ गई शीना माँ को देखते उनके गले लग गई और बिलख पड़ी….ऐसा लग रहा था आज कई वर्षों बाद वह अपनी माँ … Read more

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