सहारा – संजय सिंह।

 रात का समय था ।तकरीबन 10:00 बज रहे थे ।राम पूरा दिन काम करके अपनी थकान को मिटाने के लिए बिस्तर पर लेटा हुआ था। सोने की तैयारी कर रहा था। उसके बिस्तर के सामने एक मोमबत्ती जल रही थी ।उसी की रोशनी सारे कमरे को रोशन कर रही थी।राम मन ही मन में सोचने … Read more

हम कलंकित नहीं हैं – प्रतिभा भारद्वाज (प्रभा)

एक आलीशान मकान के बाहर जैसे ही अंजना पहुंची उसके पांव वहीं ठिठक गए, उस घर को आखिर वह भूल भी कैसे सकती थी…. आज से लगभग 25 साल पहले ही तो वह इस घर में आती थी एक बूढ़ी महिला की देखभाल करने;  अंजना एक नर्स थी जिसे इस घर में इस बूढ़ी महिला … Read more

स्वाभिमान मेरा भी है – आरती झा आद्या

रंगोली बचपन से ही थोड़ा ऊँचा सुनती थी, पर उसके भीतर जीवन के रंग बेहद गहरे थे। उसकी हँसी में उजास था, सपनों में खुला आसमान विस्तार ले रहा था। अभी वह इक्कीसवें वर्ष में कदम ही रख ही रही थी कि उसके पेट पर सफेद छोटे धब्बे उभर आए। जब डॉक्टर ने जाँच के … Read more

कभी भी किसी पर आंख मूंद कर भरोसा मत करना चाहिए। – सीमा सिंघी

बाजार के बीचो-बीच रमेश जी की कपड़े की दुकान खूब अच्छी चल रही थी क्योंकि रमेश जी की पारखी नजर लोगों की पसंद ना पसंद को बहुत अच्छी तरह समझने लगी थी इसीलिए जिस तरह के ग्राहक आते। उन्हें उसी तरह के कपड़े दिखाकर खुश कर देते। रमेश जी की दुकान से कोई भी ग्राहक … Read more

अपने और पराए वक्त ने बतलाए – सीमा सिंघी

जब से राधे और उसके काका रामेश्वर जी के बीच खेत का बटवारा हुआ है। तबसे राधे का मन काका के उस खेत के हिस्से पर आ चुका था। वह दिन रात तरकीब लगाते रहता कि किस तरह अपने काका से वह खेत की जमीन हथिया ले। मगर ठीक इसके विपरीत राधे जितना बेईमान कुटिल … Read more

मेरे जैसे बदनसीब दुनिया में कोई नहीं – सीमा सिंघी

नंदू के जाने के बाद गीता की जिंदगी बड़ी वीरान हो गई थी। उसने बड़ी भाग दौड़ कर अपने पति नंदू का इलाज कराया मगर अचानक ऐसी निगोड़ी बीमारी आ लगी । जो नंदू को ले जाकर ही शांत हुई। नंदू तन से गरीब था मगर मन से नहीं इसीलिए वो गीता और अपनी दस … Read more

बड़े भाई हो बाप मत बनो। – सीमा सिंघी

छोटे भाई राज के घर में घुसते ही ब्रजेश बोल उठा। छोटे लाइट का बिल कल याद कर के दे देना और हां कल दुकान पर भी तुम थोड़ी जल्दी चले जाना, कुछ ग्राहक आने वाले हैं। अभी आते वक्त तुम सब्जी लेकर घर आ सकते थे। खैर कोई बात नहीं, अब आ गए हो … Read more

मेरा भी तो स्वाभिमान है – मंजू ओमर

मम्मी आपने मेरा कोई भाई या बहन क्यों नहीं किया कम से कम आपकी देखभाल करने के लिए जब मै नहीं होती तो दूसरा कोई तो होता। ये तो सब ऊपर वाले की देन है बेटा उसने बस तुम्हें ही मेरी गोद मे डालकर इतिश्री कर ली। और बेटा तुम क्यों परेशान होती हो बार … Read more

स्वाभिमान मेरा भी है – रेखा जैन

भोर का तारा चमकने के साथ ही कमला बिस्तर छोड़ कर उठ बैठी और अपने नित्य कर्म में लग गई। उसने घर की साफ सफाई की, बच्चों का नाश्ता बनाया, टिफिन बनाया, दोपहर का खाना बना कर रख दिया। सास ससुर को चाय दी और अपने दोनों छोटे बच्चों को उठा कर तैयार कर दिया। … Read more

मेरा भी स्वाभिमान – बिमला रावत जड़धारी

रजनी बैठी सोच रही थी। क्या ये मकान बेच दूॅं? जैसे बच्चें कह रहे हैं, तीन फ्लैट ले लेते हैं। तीनों भाइयों के नाम से तीन फ्लैट एक साथ ही ले लेते हैं। आपका जहॉं मन करे वहॉं रह लेना। जितने पैसे बचेंगे वो हम तीनों आपस में बांट लेंगे। आप पैसे का क्या करोगी? … Read more

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