ज़िन्दगी की दूसरी पारी – बिमला रावत जड़धारी

दिव्या ने कभी नहीं सोचा था कि जिन्दगी की दूसरी पारी इतनी खुबसूरत होगी। कभी शौक से सीखा हुआ योगा आज उसका व्यक्तित्व ही बदल देगा।कभी घर से बाहर ना निकलने वाली दिव्या अपने घर के काम में ही व्यस्त रहती। दिव्या के दो बच्चे, दोनों ही अपनी गृहस्थी में व्यस्त रहते। कभी वह अपने … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – शिवांगी जैन

तालियो की तेज गड़गड़ाहट और मंच की ओर से कानों में सुनाई पड़ते अपनी बेटी शुभि के तीन वाक्य  ‘जिंदगी की दूसरी पारी ‘…  शिखा की आंखों में खुशी व चेहरे पर संतुष्टि के भाव जाग गए। शुभि ने अपना अवार्ड अपनी मां को देते हुए कहा ,मेरी इस कामयाबी का श्रेय मेरी मां को … Read more

दूसरी पारी – खुशी

राघव जी एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे। परिवार में पत्नी आरती तीन बच्चे महक,प्रफुल और खुशबू थे।मां पिताजी गांव में रहते थे।बचपन से ही राघव पढ़ाई लिखाई में अव्वल थे।तो जब उनकी 10 वीं की परीक्षा हुई तो ख़ाली समय में वो गांव के बच्चों को पढ़ाते थे।सब कहते राघव भैया ने पढ़ाया तो … Read more

भरोसे की डोर – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी जी, आप आराम कर लीजिए… दुकान मैं संभाल लूंगी।” रिया ने धीरे से कहा तो सविता जी ने चश्मे के ऊपर से उसे देखा। चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन मन में सवाल भी था। आजकल की बहुएँ कहाँ घर और कारोबार दोनों संभालती हैं? दो दिन जोश दिखाती हैं, फिर अपने फोन और … Read more

मोह से मुक्ति – शुभ्रा बैनर्जी 

शिवांश इस अगले हफ्ते सेवानिवृत्त हो रहे थे। छह महीने पहले ही से पार्टी की लिस्ट बना रहे थे।किसे-किसे बुलाना है?कैटरिंग किसे देना है? मेनू में क्या रहेगा? सुषमा अपने पति की आदत से भलीभांति परिचित थी।बस बहाना चाहिए, खिलाने का।अपने पैसे खर्च होने पर इतना खुश होने वाला इंसान शिवांश ही हो सकता था।बच्चों … Read more

*जिंदगी की दूसरी पारी* – तोषिका

कमाल है, आप इतनी मशहूर है, फिर भी कितने सभ्य तरीके से बात करती है और इतनी ज्यादा उम्र में आपने लंच सर्विस जैसा कारोबार शुरू किया और कुछ सालों में इतना बड़ा किया ये बहुत ही काबिल्य तारीफ है। हस्ते हुए एक रिपोर्टर ने राशि को बोला। राशि हल्का सा मुस्कुराई और बोली “इस … Read more

भरोसा – संध्या सिन्हा 

हेलो जय! भैया की तबियत ठीक नहीं है.. किसी बड़े डॉक्टर को दिखा दो। ठीक है भा… भी, (जय पूरी बात भी ना कर पाया था कि… उसकी पत्नी नीता ने फ़ोन काट दिया और बोली  “क्या ठीक है.. तुम भी ना जय समझते नहीं हो… ये भाभी का शहर आने का बहाना है और … Read more

भरोसा – नेहा जैन

बरसात की हल्की बूंदें शहर की ऊंची इमारतों पर गिर रही थीं। रात के करीब ग्यारह बजे थे, लेकिन “सिटी केयर हॉस्पिटल” की चौथी मंजिल पर हलचल अभी भी जारी थी। कमरा नंबर 407 के बाहर एक आदमी बेचैनी से टहल रहा था। उसकी आंखों में डर था… और माथे पर पसीना। वो बार-बार डॉक्टर … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – आरती निलेश खरबडकर

वृंदा हाथ में बड़ी सी अटैची लेकर घर से बाहर निकल रही थी। उसका भाई उसे लेने आया था। आंसू भरी निगाहों से उसने विनय की ओर देखा। लेकिन आज वो वृंदा से नजरे नही मिला पा रहा था। क्योंकि आज वृंदा की आंखो में अनगिनत सवाल थे और अपार दुःख भी। कितना प्यार किया … Read more

निर्णय – संगीता त्रिपाठी

  “सुलभा तुम ..”एक जानी पहचानी आवाज उसके कानों में टकराई   ,कैसे भूल सकती है इस आवाज को ,जिसकी वो दीवानी थी ,।    पलट कर देखा तो नितांत अजनबी सा बिखरे  सफेद बालों वाला ,मोटे फ्रेम का चश्मा लगाए ,एक प्रौढ़ व्यक्ति खड़ा था । न ये सुशांत नहीं हो सकते……,उसके कानों ने गलत सुना … Read more

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