अनकही अनुगूंज: एक गृहणी के समर्पण की कहानी
मालती की आँखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली। ये दुख के आंसू नहीं थे, बल्कि बरसों से मन के किसी कोने में दबी हुई उस प्यास के बुझने के आंसू थे, जो एक औरत सिर्फ अपने परिवार के प्यार और सम्मान के लिए महसूस करती है। उसने रमेश की तरफ देखा, जिनकी आँखों … Read more