*स्वाभिमान मेरा भी है* – तोषिका
आज बहुत गर्मी हो रही है मेरा तो आमरस पीने का मन कर रहा है, अपने पसीने पूछते हुए रज्जो बोली। तभी वहां खड़ी उनकी गाय जैसे बहु नेहा बोली “माजी मैं आपके लिए अभी आमरस बना देती हू” रज्जो ताने मारते हुए बोली “तुझे किसी ने कहा कुछ और ये क्या दूसरों की बातें … Read more