संस्कारों की छाँव
मयंक ने आगे बढ़कर अपनी माँ के आँसू पोंछे और बहुत ही कोमल स्वर में कहा, “माँ, जब बाबूजी अस्पताल में थे, तो वे अक्सर मुझसे कहते थे कि ‘मयंक, तुम्हारी माँ को सीढ़ियाँ चढ़ने में घुटनों में बहुत दर्द होता है। जब मैं ठीक होकर घर लौटूंगा, तो हम नीचे बगीचे वाली ज़मीन पर … Read more