आउट डेटेड बुढ़िया – कविता भड़ाना

रीमा और सीमा की आँखें विस्मय से फ़टी रह गयी जब उन्होंने रेस्टोरेंट के सामने वाली टेबल पर सासु माँ दामिनी जी को अपनी सखियों के साथ खिलखिलाते हुए गरम गरम छोले भटूरे खाते हुए देखा, उससे भी ज्यादा हैरानी उनके कपड़ो को देख कर हो रही थी, गुलाबी रंग की शिफान की साडी, उम्र … Read more

बोया, वो पाया – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी, ये पुरानी सिलाई मशीन कब तक संभालकर रखोगी? अब तो कोई इसका इस्तेमाल भी नहीं करता।” संजय ने स्टोर रूम की धूल साफ़ करते हुए झुंझलाकर कहा। नीरा मुस्कुराई, मशीन पर हाथ फेरा और बोली, “कुछ चीज़ें सिर्फ़ सामान नहीं होतीं बेटा… उनमें किसी की पूरी ज़िंदगी सिलाई हुई होती है।” संजय ने बात … Read more

जो बोया, वही पाया – बिमला रावत जड़धारी

रामेश्वरी की अंतिम विदाई थी। सभी रिश्तेदार और दोनों बेटियाॅं भी पहुॅंच गयी थी। सभी कह रहें थे अच्छा हुआ मुक्ती मिल गयी, बहुत कष्ट में थी। दोनों बेटियाॅं आपस में बोली, मम्मी ने जो बोया था वही पाया। दादी को कितना परेशान किया था।दादा जी तो थे नहीं, दादी जी ही थी जो गाॅंव … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – विनीता सिंह

राहुल जी एक स्कूल में गेम के टीचर थे।उनकी उम्र 60साल की थी स्कूल से रिटायर हो चूके उन्होंने सोचा सारी जिन्दगी बहुत काम कर लिया अब अपने पोते पोतियों के साथ समय बीताऊगा। लेकिन कहते हैं जो होना होता है वहीं होता है। उनके दोनों बेटे अपनी नौकरी के लिए अपने अपने परिवार को … Read more

सबक – खुशी

चारु एक सम्पन्न परिवार की लड़की थी इसलिए जिद्दी स्वभाव की थी । परिवार में माता रत्ना पिता राजन दो भाई  सुनील और अनिल और भाभियां नीता और प्रिया थे ।सारा दिन चारु भाभियों को भी परेशान करती उनकी झूठी सच्ची लगा मां और भाईयों से डॉट  पड़ती तो उसे बड़ा मजा आता।समय बीता चारु … Read more

*जो बोया, वही पाया* – तोषिका

उसने *जो बोया, वही पाया* है, और मुझे अपनी बहु पर गर्व है, शशि की सास मीनू सीना तान कर बोली। पूरे घर में खुसुर फुसुर होने लग गई। सब आपस में ये बातें करने लग गए कि शशि अपने बेटे,राजीव; जो उसको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है उस के लिए ऐसा कैसे … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – परमा दत्त झा

आज फिर रोहन और उसकी पत्नी श्यामा विजय बाबू और उनकी पत्नी संग उलझ गए थे। पापा पैसे पेड़ पर नहीं उगते?-यह रोहन था। ऐसा क्या मांग लिया हमने,बस तेरी मां की दवा लाने को कहा था जो खत्म हो गई है।-वे सहज भाव से बोले। वहीं तो मैं समझा रहा हूं,पैसे पेड़ पर नहीं … Read more

जो बोया वही पाया – सीमा सिंघी 

चार दिवारी के इस छोटे से कमरे में नंदनी जी का मन नहीं लग रहा था । उनका बहुत मन कर रहा था कि वह भी बेटे बहू और पोते-पोतियो के साथ बाहर घूमने जाएं। उनके संग होटल में बैठकर सुकून से कुछ पल बिताए, कुछ अच्छा खाएं क्योंकि अब तक की जिंदगी में तो … Read more

काहे मरे जा रहे हो – लतिका श्रीवास्तव 

ओ ओ काम के कीड़े ईमानदारी के भूतनाथ सुन तो भाई रुक जा थोड़ा हम भी पीछे हैं तुम्हारे….रमेश ने रघुनाथ को आवाज दी। आजा भाई आजा अपनी रफ्तार में तनिक भी कमी ना करते हुए रघुनाथ जी ने ऑफिस के दरवाजे तक तेजी से कदम बढ़ाते हुए मुस्कुरा के कहा तो रमेश ठठा कर … Read more

जो बोया वही पाया – अरुणा गर्ग

मालाजी के परिवार में उनके सास ससुर और पति ,दो बच्चे थे।वे एक तेज स्वभाव की महिला थी।जब तक उनकी सास से बनी वे बहू की पूरी मदद करतीं।माला भी अच्छी बन सहयोग ले लेती। अचानक उनकी सास को लकवे की शिकायत हो गई । उनके हाथ पैर अब कमजोर हो गये फिर भी वे … Read more

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