हम कलंकित नहीं हैं – प्रतिभा भारद्वाज (प्रभा)

एक आलीशान मकान के बाहर जैसे ही अंजना पहुंची उसके पांव वहीं ठिठक गए, उस घर को आखिर वह भूल भी कैसे सकती थी…. आज से लगभग 25 साल पहले ही तो वह इस घर में आती थी एक बूढ़ी महिला की देखभाल करने;  अंजना एक नर्स थी जिसे इस घर में इस बूढ़ी महिला … Read more

कलंक – खुशी

निशा ओ निशा कहा मर गई।सुनाई नहीं देता तुझे जी ताई जी क्या हुआ।चाय कहा है मनहूस,जी ला रही हूं।तेरी मां तुझे हमारे दरवाजे पर फेक कर अपने आशिक़ के साथ भाग गई। यह कलंक कभी नहीं मिटेगा।रोज़ यही बात सुनते हुए निशा बड़ी हो रही थी।उसका क्या दोष उसकी मां भाग गई और पिताजी … Read more

*यह कलंक कभी ना मिटेगा* – तोषिका

निखिल बेटा आकर खाना खाले, फिर दफ्तर भी तो जाना है। चिल्लाते हुए उसकी मां राधा बोली। अंदर कमरे से एक चीखती हुई आवाज आई “आ रहा हू मैं मां, तोड़ा सब्र करा करो।” राधा को अपने बेटे के मुंह से सुनते हुए ये शब्द काँटों की तरह चुभे पर फिर भी वो चुप रही। … Read more

यह कलंक कभी ना मिटेगा। – मधु वशिष्ठ

“आप थक गए होगे अब थोड़ी देर गाड़ी मैं चला लेता हूं, आप पापा के पास आकर बैठ जाओ|” बहुत समय बाद रजत और रमन अपने पिता के साथ गाड़ी में अकेले ही जा रहे थे| दिल्ली की पॉश कॉलोनी में एक दो मंजिला घर, जिसमें कि दोनों भाई ऊपर नीचे रहते थे| हालांकि वर्मा … Read more

नौ नहीं नब्बे – लतिका श्रीवास्तव 

रात भर आँखें जागतीं रहीं।दिल में बादलों की उमड़ घुमड़ उत्ताल पर हो रही थी।दीप्ति को बिस्तर पर चैन कहां था।कल उसकी जिंदगी का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन होने वाला था।इतने महीनों की अथक मेहनत का परिणाम मिलने वाला था।कल उसका रिजल्ट डे था।सुबह ही टीवी और समाचार पत्रों में उसने देखा और पढ़ा था कि … Read more

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