एक खाली कोख – राजेन्दर सक्सेना
“ये सज़ा नहीं है रोहन, ये मेरा चुनाव है,” काव्या ने रोते हुए उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा। “तुम्हें लगता है कि कोख से जन्म देने वाली ही माँ होती है? कबीर को जब चोट लगती है, तो दर्द मुझे यहाँ, मेरे सीने में होता है। जब वह मुझे ‘काव्या मम्मा’ कहता है, … Read more